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    दूसरी बार कोरोना संक्रमित हुए वैज्ञानिक बोले, हर्ड इम्यूनिटी से महामारी को हराने की उम्मीद बेकार

    सांकेतिक फोटो
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    Corona Herd Immunity: वैज्ञानिक ने बताया कि उन्हें दूसरी बार कोरोना संक्रमित होने के बाद पता चला कि बीमारी के बाद तीसरे महीने के आखिर तक एंटी बॉडीज का पता नहीं चल सका.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 30, 2020, 3:37 PM IST
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    नई दिल्ली. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है. कोरोना वायरस पर प्रयोग कर रहे एक वैज्ञानिक ने खुद को दूसरी बार इससे संक्रमित कर लिया है. खुद को दूसरी बार कोविड-19 (Covid-19) से संक्रमित करने वाले वैज्ञानिक का कहना है कि उन्होंने इम्यूनिटी (Immunity) को ज्यादा बेहतर तरीके से समझने के लिए ऐसा किया. 69 वर्षीय डॉक्टर अलेक्जेंडर शिपरनो ने कहा, कोविड-19 से बनने वाली एंटी बॉडीज के रवैये, मजबूती और शरीर में मौजूद रहने के समय का मुआयना किया. वैज्ञानिकों ने पाया कि एंटी बॉडीज तेजी से कम हो गई.

    वैज्ञानिक ने बताया कि उन्हें दूसरी बार कोरोना संक्रमित होने के बाद पता चला कि बीमारी के बाद तीसरे महीने के आखिर तक एंटी बॉडीज का पता नहीं चल सका. उन्होंने बताया, मेरे शरीर की एंटी बॉडीज पहली बार बीमार होने के ठीक 6 महीने बाद गिर गई और कोवड-19 से सुरक्षा देनेवाली एंटी बॉडीज छह महीने बाद खत्म हो गई जबकि दूसरी बार संक्रमित होने पर अस्पताल में दाखिल होना पड़ा.

    हर्ड इम्यूनिटी की उम्मीद बेकार



    बता दें कि वो पहली बार फ्रांस की यात्रा पर फरवरी में कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे. पहली बार कोरोना से ठीक होने के बाद उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल एंड एक्सपेरीमेंटल मेडिसीन में कोरोना वायरस एंटी बॉडीज पर अध्ययन शुरू किया. इस दौरान उन्होंने लक्षण के तौर पर गले में खराश का अनुभव किया. उनका दूसरा संक्रमण पहले से ज्यादा गंभीर था. उन्होंने कहा, '5 दिनों तक मेरा तापमान 39 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा और मेरे सूंघने की क्षमता खत्म हो गई थी. इसके साथ ही स्वाद का अनुभव बदल गया.
    बीमारी के छठे दिन फेफड़ों का सीटी स्कैन साफ था और स्कैन के तीन दिन बाद एक्सरे से दोहरे न्यूमोनिया का पता चला. वायरस तेजी से चला गया और दो सप्ताह बाद अन्य सैंपल से पकड़ में नहीं आया. अध्ययन के बाद डॉक्टर ने नतीजा निकाला कि हर्ड इम्यूनिटी से महामारी को हराने की उम्मीद बेकार है.



    हर्ड इम्यूनिटी के लिए जारी की चेतावनी

    शिपरनो ने कहा कि हमें वैक्सीन की जरूरत होगी, जिसका इस्तेमाल कई बार किया जा सके. उन्होंने कहा, एक बार एडेनोवायरल वेक्टर आधारित वैक्सीन से लगाए जाने पर हम उसे दोहराने के योग्य नहीं होंगे क्योंकि एडेनोवायरल इंजेक्शन बार-बार दखल देगा. खुद के मामले पर आधारित डॉक्टर के निष्कर्ष से खुलासा हुआ कि हर्ड इम्यूनिटी को पा लेना नामुमकिन नहीं तो मुश्किल जरूर है क्योंकि वायरस आने वाले कई सालों तक रहेगा.

    शिपरनो ने हर्ड इम्यूनिटी के खिलाफ चेतावनी जारी करते हुए कहा है कोविड-19 को खत्म करने के लिए वैक्सीन के कई डोज का इस्तेमाल करना होगा.
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