कोरोना वैक्‍सीन बनाने में इस दंपति को मिली 90% सफलता, शादी के दिन भी कर रहे थे रिसर्च

दंपति ने बनाई 90 फीसदी सफल कोरोना वैक्‍सीन. (Pic- jornaleconomico.sapo.pt)
दंपति ने बनाई 90 फीसदी सफल कोरोना वैक्‍सीन. (Pic- jornaleconomico.sapo.pt)

Coronavirus Vaccine: कंपनी बायोएनटेक ने ही फाइजर कंपनी के साथ मिलकर इस वैक्‍सीन पर शोध किया है. 55 साल के डॉक्‍टर यूगर साहिन और उनकी पत्‍नी डॉ. कैजलेम तुरेकी जर्मनी में बायोएनटेक कंपनी के संस्‍थापक हैं.

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  • Last Updated: November 11, 2020, 10:55 AM IST
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नई दिल्‍ली. दवा कंपनी फाइजर (Pfizer) ने हाल ही में दावा किया है कि उसकी ओर से बनाई गई कोरोना वायरस संक्रमण की वैक्‍सीन (Coronavirus vaccine) के विश्लेषण से पता चला है कि यह कोविड-19 को रोकने में 90 प्रतिशत तक कारगर है. इसके पीछे एक मेडिकल रिसर्चर दंपति की कड़ी मेहनत है. उन्‍होंने दिन रात इस वैक्‍सीन पर काम किया. उनकी कंपनी बायोएनटेक ने ही फाइजर कंपनी के साथ मिलकर इस वैक्‍सीन पर शोध किया है. 55 साल के डॉक्‍टर यूगर साहिन और उनकी पत्‍नी डॉ. कैजलेम तुरेकी जर्मनी में बायोएनटेक कंपनी के संस्‍थापक हैं.

पत्‍नी डॉ. कैजलेम के साथ मिलकर डॉ. यूगर ने 2008 में बायोएनटेक कंपनी बनाई थी. डॉ. यूगर इस कंपनी में सीईओ हैं तो उनकी पत्‍नी कंपनी की सीएमओ हैं. उनकी कंपनी 15 हजार करोड़ रुपये की है. वे जर्मनी के शीर्ष 100 अमीरों में गिने जाते हैं. इसके बावजूद डॉ. यूगर की सादगी का आलम यह है कि वह आज भी साइकिल से ही कंपनी में आते जाते हैं.

डॉ. यूगर का कहना है, 'मैं अपनी करीब आधी उम्र लैब में ही गुजार चुका हूं. आगे भी मैं रिसर्च का काम नहीं छोडूंगा.' दोनों की ओर से विकसित की गई कोरोना वायरस वैक्‍सीन को 90 फीसदी सफलता मिली है. दोनों ने कैंसर के खिलाफ रिसर्च करने में ही अपना जीवन समर्पित कर दिया है. वे कैंसर के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित करने में जुटे हैं.



डॉ. यूगर की पत्‍नी कैजलेम के अनुसार, 'हमारी शादी 2002 में हुई थी. हम दोनों ही अपनी शादी के कुछ घंटे बाद ही लैब में जाकर रिसर्च में जुट गए थे.' डॉ. यूगर साहिन ने कोलोन और हैम्‍बर्ग के अस्‍पतालों में काफी काम किया है. उनकी मुलाकात कैजलेम से वहीं हुई थी. उसके बाद से ही दोनों कैंसर की रिसर्च में जुटे हैं.

डॉ. यूगर साहिन ने बताया कि कोरोना के खिलाफ वैक्‍सीन बनाने के लिए उनकी टीम 24 घंटे काम कर रही है. कई हफ्तों तक वे खुद टीम के साथ लैब में ही रहे हैं. उन्‍होंने 2008 में कैंसर की इम्‍यूनोथेरेपी की एक श्रेणी पर काम करना शुरू किया था. इसमें वह सफल रहे. कैंसर के इलाज में सफल होने के बाद उन्‍हें समझ आया कि वे कोरोना की वैक्‍सीन भी बना सकते हैं. उन्‍होंने इस पर काम शुरू किया. उन्‍होंने दावा किया कि कई देशों में 44 हजार लोगों पर उनकी वैक्‍सीन का ट्रायल सफल रहा है.
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