चिंता! कोरोना वैक्सीन की एक डोज नहीं होगी काफी, भारत को चाहिए होंगी 260 करोड़ डोज

चिंता! कोरोना वैक्सीन की एक डोज नहीं होगी काफी, भारत को चाहिए होंगी 260 करोड़ डोज
कोरोना वैक्सीन की सिंगल डोज नहीं होगी काफी (फाइल फोटो)

Covid-19 vaccine update: ट्रायल में सबसे आगे चल रहीं वैक्सीन बनाने वाली कम्पनियों का मानना है कि वैक्सीन की एक डोज काफी नहीं होगी और कम से कम दो डोज देनी ही होंगी. ज्यादातर फेज-3 ट्रायल में लोगों को डबल डोज ही दी गयीं हैं. हालांकि इससे दुनिया की फार्मा कंपनियों पर बोझ भी डबल होने जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 31, 2020, 7:21 AM IST
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वाशिंगटन. विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) ने भले ही इस बारे में फिलहाल खुलकर बात नहीं की हो लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) की एक डोज इंसान के वायरस से बचाव के लिए काफी नहीं होगी. ट्रायल में सबसे आगे चल रहीं मॉडरेना (Moderna), एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca), नोवावैक्स (Novavax) और सनोफी (Sanofi) ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें ट्रायल में एक से ज्यादा डोज का इस्तेमाल करना पड़ा है ऐसे में तैयार वैक्सीन के भी सिंगल शॉट से काम बनेगा ऐसा मुश्किल नजर आ रहा है.

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सरकार ने देश की बड़ी 6 फार्मा कम्पनियों को वैक्सीन प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग का जिम्मा सौंपा हुआ है लेकिन डबल डोज के मामले में ये भी नाकाफी साबित होती नजर आ रहीं हैं. मॉडरेना, पीफाइजर फिलहाल कोरोना वैक्सीन का फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल कर रहीं हैं. इस ट्रायल में हिस्सा लेने वाले 30000 से वॉलंटियर्स को वैक्सीन की दो डोज देनी पड़ी हैं. मॉडरेना के मुताबिक उन्हें 28 दिन के बाद दूसरी डोज की ज़रुरत पड़ी तो पीफाइजर ने 21 दिन के बाद वैक्सीन का दूसरा शॉट दिया.






उधर एस्ट्रा जेनेका ने भी इसी महीने फेज-3 ट्रायल शुरू किये हैं और 28 दिन के अंतर पर इस ट्रायल में भी दूसरी डोज दी गयी है. इसके फेज-1 और फेज-2 ट्रायल में भी 2 डोज ही दी गयीं थीं. नोवावैक्स और जॉनसन एंड जॉनसन ने भी बताया है कि फेज-3 ट्रायल के लिए उन्हें कुछ मरीजों का काम ही एक डोज से चल पाया बाकी को वैक्सीन का दूसरा शॉट देना पड़ा. सनोफी ने ट्रायल की जानकारी नहीं सी है लेकिन ये कहा है कि वैक्सीन के दो शॉट्स की ज़रुरत पड़ सकती है. कम्पनी ने कहा है कि चिकनपॉक्स, हेपेटाईटस-A के लिए भी दो शॉट्स की ज़रुरत पड़ती रही है.

दबाव में फार्मा कंपनियां
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी दवा कंपनियां भारी दबाव में हैं और उन्हें जल्द से जल्द 660 मिलियन वैक्सीन डोज का उत्पादन और वितरण करना है. लोगों को वैक्सीन के डबल शॉट के लिए मनाना भी एक बड़ा काम है क्योंकि एंटी-वैक्सीन प्रदर्शन पहले ही शुरू हो गए हैं. इसके अलावा भारत और अन्य बड़ी आबादी के देशों की बार करें तो वहां स्थिति और भी खतरनाक साबित होने वाली है.

वैक्सीन की उपलब्धता के बाद भी 28 या 21 दिन के अंतराल पर दो बड़े वैक्सीनेशन प्रोग्राम चलाने होंगे. इतनी बड़ी सप्लाई चेन, प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन सरकारों के लिए काफी बड़ा मुद्दा साबित होने वाला है. वांडरबिल्ट यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर कैली मूर के मुताबिक ये दुनिया का अब तक का सबसे मुश्किल वैक्सीनेशन प्रोग्राम साबित होगा. ये इतने बड़े स्तर पर दुनिया में कभी नहीं हुआ है. अमेरिका ने साल 2009 में फ्लू के लिए 161 मिलियन लोगों को वैक्सीन दिया था जिसमें कई महीने लग गए थे.
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