पुरुषों के मुख्य सेक्स हॉर्मोन पर अटैक कर रहा है कोरोना, इसलिए हो रही ज्यादा मौतें- स्टडी

भारत में कोरोना (Covid-19 Cases in India) से अब तक 97 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है.
भारत में कोरोना (Covid-19 Cases in India) से अब तक 97 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है.

टेस्टोस्टेरॉन(Testosterone) पुरुषों के शरीर में पाया जाने वाला मुख्य सेक्स हॉर्मोन है, जिसका उत्पादन टेस्टिकल्स में होता है. स्टडी में कहा गया है कि टेस्टोस्टेरॉन पुरुषों में 40 साल के बाद हर साल 0.8-2 फीसदी तक घटता जाता है. ऐसे में कोरोना (Covid-19) पॉजिटिव पाए गए उम्रदराज पुरुष मरीजों की सेहत पर खराब असर होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 11:31 AM IST
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नई दिल्ली. दुनिया में अब तक 3 करोड़ 35 लाख 49 हजार 873 लोग संक्रमित हैं. 10 लाख 6 हजार 379 लोगों की मौत हो चुकी है. अमेरिका, भारत और ब्राजील कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की लिस्ट में टॉप पर बने हुए हैं. भारत में कोरोना (Covid-19 Cases in India) से अब तक 97 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. मरने वालों में ज्यादातर पुरुष ही हैं. इस बीच एक नई स्टडी में कोरोना वायरस की वजह से पुरुषों की ज्यादा मौत को लेकर चौंकाने वाली जानकारी दी गई है. स्टडी के मुताबिक, कोरोना पुरुषों के मुख्य सेक्स हॉर्मोन टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone) पर अटैक कर रहा है. इससे उनकी हेल्थ खराब हो रही है और संक्रमित होने के बाद शरीर कमजोर पड़ जा रहा है. ऐसे में मौत हो जा रही है.

मेर्सिन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स और तुर्की में मर्सिन सिटी एजुकेशन एंड रिसर्च हॉस्पिटल ने 'द एजिंग' नामक मेन्स मैगजीन में इसकी जानकारी दी है. स्टडी में कहा गया है, 'पहली बार, हमारा डेटा बताता है कि कोविड-19 SARS-CoV-2 संक्रमित पुरुष रोगियों में सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर बिगड़ सकता है. लो सीरम कुल टेस्टोस्टेरोन के स्तर को इतना कम कर देता है कि मरीज का शरीर वायरस से लड़ नहीं पाता. उसे सीधे आईसीयू की जरूरत पड़ती है. ऐसे मरीजों की मरने की संख्या ज्यादा है.'

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सेक्स ड्राइव को बढ़ाने वाला हार्मोन
टेस्टोस्टेरॉन, पुरुषों के शरीर में पाया जाने वाला मुख्य सेक्स हॉर्मोन है, जिसका उत्पादन टेस्टिकल्स में होता है. यह पुरुषों में सेक्स ड्राइव यानी कामेच्छा को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है. अगर पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन लेवल की कमी हो जाए तो हद से ज्यादा थकान, बाल गिरना, लिबिडो में कमी, मूड स्विंग्स और मसल लॉस जैसी दिक्कतें देखने को मिलती हैं. इस हॉर्मोन का संबंध पुरुषों के सेक्शुअल डिवेलपमेंट से भी है.

हर साल 0.8-2 फीसदी तक घटता है टेस्टोस्टेरॉन
स्टडी में कहा गया है कि टेस्टोस्टेरॉन पुरुषों में 40 साल के बाद हर साल 0.8-2 फीसदी तक घटता जाता है. ऐसे में कोरोना पॉजिटिव पाए गए उम्रदराज पुरुष मरीजों की सेहत पर खराब असर होता है. उनकी रिकवरी लेट होती है या होती ही नहीं है.

फूड एंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन FDA की मानें तो एक पुरुष के शरीर में टेस्टोस्टेरॉन की नॉर्मल रेंज 300 से 1 हजार नैनोग्राम प्रति डेसीलीटर होनी चाहिए, लेकिन जब टेस्टोस्टेरॉन का लेवल 300 से नीचे चला जाता है तो इसे ही टेस्टोस्टेरॉन लेवल की कमी के रूप में देखा जाता है. किशोरावस्था और युवाओं में यह हॉर्मोन तेजी से बढ़ता है लेकिन फिर बाद में जैसे-जैसे उम्र बढ़ने लगती है, इसके लेवल में भी कमी आने लगती है.


438 रोगियों का लिया गया सैंपल
इस महीने की शुरुआत में प्रकाशित स्टडी में 438 रोगियों का सैंपल लिया गया. उनमें से 232 पुरुष थे. स्टडी में कहा गया है, "इस आबादी में टेस्टोस्टेरोन से संबंधित SARS-CoV-2 संक्रमित हाइपोगोनाडल पुरुष रोगियों में रिकवरी बहुत धीमी रही या न के बराबर थी.''

इस स्टडी में योगदान देने वाले यूरोलॉजी के प्रोफेसर सेलाहिटिन बताते हैं, 'टेस्टोस्टेरोन श्वसन अंगों की प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ा हुआ है. इसका निम्न स्तर श्वसन संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकता है. जिससे बाद में जाकर मरीज की मौत भी हो सकती है.'


क्या कहता है देशों का आंकड़ा
अमेरिका में कोविड-19 के 5,700 मरीजों में से 60% पुरुष ही थे, जबकि बाकी महिलाएं थीं. वहीं ICU तक पहुंचे कोरोना मरीजों में 66.5% मरीज पुरुष रहे. इसके बाद से इटली, फ्रांस, यूके, जर्मनी और साउथ कोरिया में भी समान पैटर्न दिखा. यूके ने हाल ही में जो डाटा जारी किया, उसके मुताबिक पुरुषों में कोरोना के कारण होने वाली मौतें महिलाओं से लगभग दोगुनी हैं. ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य विभाग का डाटा भी कुछ यही बताता है.

दूसरी बीमारियों में भी यही ट्रेंड
कोरोना फैमिली की दूसरी बीमारियों में भी समान ट्रेंड दिखा. जैसे साल 2003 में SARS या फिर साल 2012 में MERS के दौरान भी पुरुषों में मृत्युदर महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा देखी गई. वैज्ञानिक जर्नल Western Journal of Emergency Medicine (WJEM) में इसी महीने आई स्टडी में ये सारे आंकड़े दिए गए हैं. यहां तक कि श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के कारण पुरुषों की मौत की दर ज्यादा होने के कारण ऐसी बीमारियों को "man flu" भी कहा जाता है.

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जेनेटिक संरचना भी हो सकती है जिम्मेदार
माना जा रहा है कि महिलाओं की जेनेटिक संरचना भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है, जिसमें दो X क्रोमोजोम होते हैं. इन्हीं X क्रोमोजोम्स में इम्यून स्सिटम को मजबूत बनाने वाले ज्यादातर जीन्स होते हैं. जबकि Y क्रोमजोम में ये तुलनात्मक तौर पर कम होते हैं. इसी वजह से बीमारियों से लड़ने में उनका इम्यून पुरुषों की अपेक्षा बेहतर काम करता है. इस थ्योरी के साथ-साथ अब वैज्ञानिक सेक्स हार्मोन पर भी स्टडी कर रहे हैं.
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