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Coronavirus: पूर्ण टीकाकरण के बाद भी क्यों बढ़ रहे मामले? ब्रिटेन के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार ने बताया

कोविड के टीके बेहद प्रभावी हैं, लेकिन 100 प्रतिशत हों ऐसा नहीं है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

कोविड के टीके बेहद प्रभावी हैं, लेकिन 100 प्रतिशत हों ऐसा नहीं है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

Covid-19 Vaccination एक अनुमान के अनुसार अकेले अमेरिका में हर साल फ्लू (Flu) के टीके बीमारी के लाखों मामलों, अस्पताल में भर्ती होने के हजारों मामलों और हजारों मौतों को रोकते हैं. यूके में अभी कोविड के टीके वही कर रहे हैं - सभी को बस इतना करना है कि बीमारी की इस गर्मी की लहर की तुलना सर्दियों की लहर से करें.

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    ऑक्सफोर्ड (यूके), (द कन्वरसेशन). ब्रिटेन के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वालेंस का कहना है कि ब्रिटेन में कोविड के साथ अस्पताल में भर्ती होने वाले 40 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) की दोनों खुराक मिल चुकी हैं. पहली नज़र में, यह बहुत गंभीर बात लगती है, लेकिन ऐसा है नहीं. टीके अभी भी बहुत अच्छी तरह काम कर रहे हैं. ऐसे बहुत से कारक हैं जो यह बताते हैं कि बीमारी से संक्रमित लोगों में पूर्ण टीकाकरण वाले लोगों का अनुपात इतना ज्यादा क्यों है.

    कोविड के टीके बेहद प्रभावी हैं, लेकिन 100 प्रतिशत हों ऐसा नहीं है. यह अपने आप में आश्चर्य की बात नहीं है - फ्लू के टीके भी 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं होते हैं. फिर भी एक अनुमान के अनुसार अकेले अमेरिका में हर साल फ्लू के टीके बीमारी के लाखों मामलों, अस्पताल में भर्ती होने के हजारों मामलों और हजारों मौतों को रोकते हैं. यूके में अभी कोविड के टीके वही कर रहे हैं - सभी को बस इतना करना है कि बीमारी की इस गर्मी की लहर की तुलना सर्दियों की लहर से करें.

    जैसे-जैसे मामले बढ़ रहे हैं, अस्पताल में भर्ती होने वालों और मौतों की संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन यह कहीं भी उस स्तर के करीब नहीं हैं जैसे सर्दियों में थे. 2020 की दूसरी छमाही में - एक समय जब यूके के मामलों की दर वैसी ही थी जैसी अभी है - लगभग 3,800 लोगों को प्रत्येक दिन कोविड के साथ अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा था. अब यह औसत लगभग 700 है. हालांकि हम नहीं चाहते थे कि यह इतना भी हो, लेकिन यह पिछली बार की तुलना में बहुत कम है जब बहुत से लोग संक्रमण का शिकार हुए थे.

    टीका लगाने वालों के बीच भी कोविड बढ़ रहा है क्योंकि यूके में दोनों खुराक लेने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि जारी है. लेखन के समय, ब्रिटेन के 88 प्रतिशत वयस्कों को पहली खुराक और 69 प्रतिशत को दूसरी खुराक मिल चुकी थी. जैसे-जैसे अधिक से अधिक आबादी को टीका लगाया जाता है, कोविड से संक्रमित होने वाले उन लोगों के सापेक्ष अनुपात में वृद्धि होगी, जिन्हें दोनों खुराक मिल चुकी हैं.

    अब यदि कल्पना करें कि शत प्रतिशत आबादी का दोहरा टीकाकरण हो चुका है, तो कोविड के संक्रमण के साथ जितने भी लोग अस्पताल में भर्ती होंगे या जितने लोगों की भी मौत होगी, उन्हें दोनों खुराक मिल चुकी होंगी. इसका यह मतलब नहीं है कि टीका काम नहीं कर रहा है. इसका सीधा सा मतलब है कि वैक्सीन लगाने का काम बहुत अच्छा चल रहा है.

    हमें यह भी याद रखने की जरूरत है कि यूके में वैक्सीन कार्यक्रम को लागू करते समय इस बात की पर्याप्त व्यवस्था की गई है कि कोविड से सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों को सबसे पहले टीका लगाया जाए. वृद्ध लोग और बीमारियों के शिकार लोगों में कोविड संक्रमण की अधिक आशंका को देखते हुए उनका टीकाकरण पहले किया गया. एक बार टीका लग जाने के बाद, इन लोगों (मेरे सहित) को बगैर टीकाकरण के मुकाबले अब कोविड का संक्रमण का जोखिम बहुत कम है, लेकिन अब भी जोखिम तो है.

    यह भी पढ़ें: आखिर क्यों इतनी तेजी से फैल रहा है कोरोना का डेल्टा वेरिएंट? वैज्ञानिकों ने बताई वजह

    क्या वैक्सीन लगवाने के बाद कोविड अलग है?
    पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि डेल्टा संस्करण के खिलाफ, जो अब यूके में प्रमुख है, ब्रिटेन में उपलब्ध किसी भी टीके की दो खुराक कोविड संक्रमण के खिलाफ 79 प्रतिशत सुरक्षा और अस्पताल में भर्ती होने के खिलाफ 96 प्रतिशत सुरक्षा प्रदान करने का अनुमान है. डेल्टा संस्करण के कारण होने वाली मृत्यु से सुरक्षा के स्तर पर हमारे पास अभी तक पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड से स्पष्ट अनुमान नहीं हैं - सौभाग्य से, यह आंशिक रूप से इस तथ्य से प्रेरित है कि यूके में इस तीसरी लहर के दौरान मौतें अपेक्षाकृत कम हुई हैं.

    लेकिन अल्फा संस्करण के लिए, पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के आंकड़ों का अनुमान है कि फाइजर वैक्सीन 95 प्रतिशत से 99 प्रतिशत के बीच कोविड-19 से होने वाली मौतों को रोकने में प्रभावी है, जबकि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन 75 प्रतिशत से 99 प्रतिशत के बीच प्रभावी होने का अनुमान है. हमारे पास अब तक के सबूत यह नहीं बताते हैं कि डेल्टा वेरिएंट इस तस्वीर को काफी हद तक बदल देता है. हमें अभी भी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है कि दोनों टीके वाले लोग वायरस से संक्रमित होने पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं. यूके का कोविड लक्षण अध्ययन इस पर विचार कर रहा है.

    प्रमुख प्रश्नों में से एक यह है कि सबसे अधिक जोखिम में कौन है. इस संबंध में जो आंकड़े सामने आए हैं वह एक प्रीप्रिंट में जारी किए गए हैं इसलिए अभी तक अन्य वैज्ञानिकों द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गई है. इसके अनुसार जो लोग अधिक वजन वाले या मोटापे से ग्रस्त हैं, गरीब हैं, और ऐसे स्वास्थ्य की स्थिति वाले लोग, जो बीमारी के मुकाबले कमजोर पड़ते हैं, के दोनों टीके लगवाने के बाद भी संक्रमित होने की अधिक आशंका होती है.

    प्रीप्रिंट से यह भी पता चलता है कि टीका लगने के बाद केवल उम्र ही कोविड विकसित होने की आशंका को प्रभावित नहीं करती है, और न ही अस्थमा, मधुमेह या हृदय रोग जैसी दीर्घकालिक परिस्थितियां - लेकिन हमें निष्कर्षों को लेकर किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले इस पर अधिक डेटा की आवश्यकता है.



    कोविड लक्षण अध्ययन में पाया गया है कि बीमारी से संक्रमित होने पर आम तौर पर लोगों में एक ही तरह के लक्षण उभरते हैं. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्होंने वैक्सीन लगवाई है या नहीं, लेकिन जिन लोगों को टीका लगाया गया है, उनमें यह लक्षण कम समय के लिए और कम गंभीर होते हैं. जिन लोगों ने दोनों टीके लगवा लिए थे, उनमें प्रमुख लक्षण सिरदर्द, नाक बहना, छींकना, गले में खराश और गंध की कमी थे.

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