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कोरोना वैक्सीन हलाल है या हराम? दुनिया के मुस्लिम धर्मगुरुओं के बीच छिड़ी बहस

ब्रिटेन में पाया गया कोरोना वायरस का नया प्रकार 60 प्रतिशत तेजी से फैलता है (सांकेतिक तस्वीर)

ब्रिटेन में पाया गया कोरोना वायरस का नया प्रकार 60 प्रतिशत तेजी से फैलता है (सांकेतिक तस्वीर)

Halal certification for Covid-19 Vaccine: कोरोना वैक्सीन को बनाने और उसके वितरण में सूअर के मांस से बनी चीज़ों के उपयोग के चलते अब एक नई बहस खड़ी हो गयी है. कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने वैक्सीन के हलाल होने पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं.

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    जकार्ता. दुनियाभर के इस्लामिक धर्मगुरुओं के बीच इस बात को लेकर असमंजस है कि सुअर के मांस का इस्तेमाल कर बनाए गए कोविड-19 टीके (COVID-19 vaccine Halal certification) इस्लामिक कानून के तहत जायज हैं या नहीं. वैक्सीन को बनाने और वितरण के दौरान सूअर के मांस के इस्तेमाल को लेकर मुस्लिम समुदाय के धर्मगुरुओं के बीच बहस छिड़ी हुई है. टीकों के भंडारण और ढुलाई के दौरान उनकी सुरक्षा और प्रभाव बनाए रखने के लिये सूअर के मांस (पोर्क) से बने जिलेटिन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है. कुछ कंपनियां सूअर के मांस के बिना टीका विकसित करने पर कई साल तक काम कर चुकी हैं.

    मुस्लिम देशों और धर्मगुरुओं की तरफ से उठाए जा रहे इन सवालों से टीकाकरण कार्यक्रम को बड़ा झटका भी लग सकता है. दुनियाभर के इस्लामिक धर्मगुरुओं के बीच इस बात को लेकर असमंजस है कि सुअर के मांस का इस्तेमाल कर बनाए गए कोविड-19 टीके इस्लामिक कानून के तहत जायज हैं या नहीं. स्विटजरलैंड की दवा कंपनी 'नोवारटिस' ने सूअर का मांस इस्तेमाल किये बिना मैनिंजाइटिस टीका तैयार किया था जबकि सऊदी और मलेशिया स्थित कंपनी एजे फार्मा भी ऐसा ही टीका बनाने का प्रयास कर रही हैं.

    फाइजर, मॉडर्ना और एस्ट्राजेनेका ने भी किया इनकार
    उधर फाइजर, मॉडर्ना, और एस्ट्राजेनेका के प्रवक्ताओं ने कहा है कि उनके कोविड-19 टीकों में सूअर के मांस से बने उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया गया है, लेकिन कई कंपनियां ऐसी हैं जिन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनके टीकों में सूअर के मांस से बने उत्पादों का इस्तेमाल किया गया है या नहीं. ऐसे में इंडोनेशिया जैसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देशों में चिंता पसर गई है. ब्रिटिश इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव सलमान वकार का कहना है कि ‘ऑर्थोडॉक्स’ यहूदियों और मुसलमानों समेत विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच टीके के इस्तेमाल को लेकर असमंजस की स्थिति है, जो सुअर के मांस से बने उत्पादों के इस्तेमाल को धार्मिक रूप से अपवित्र मानते हैं.

    इस्लाम में कोई रोक नहीं!
    सिडनी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर डॉक्टर हरनूर राशिद कहते हैं कि टीके में पोर्क जिलेटिन के उपयोग पर अब तक हुई विभिन्न परिचर्चा में आम सहमति यह बनी है कि यह इस्लामी कानून के तहत स्वीकार्य है, क्योंकि यदि टीकों का उपयोग नहीं किया गया तो 'बहुत नुकसान' होगा. इजराइल की रब्बानी संगठन 'जोहर' के अध्यक्ष रब्बी डेविड स्टेव ने कहा, 'यहूदी कानूनों के अनुसार सुअर का मांस खाना या इसका इस्तेमाल करना तभी जायज है जब इसके बिना काम न चले.' उन्होंने कहा कि अगर इसे इंजेक्शन के तौर पर लिया जाए और खाया नहीं जाए तो यह जायज है और इससे कोई दिक्कत नहीं है. बीमारी की हालत में इसका इस्तेमाल विशेष रूप से जायज है.

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