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Omicron: वैक्सीन की जमाखोरी और असमानता से खराब हुए हालात, अफ्रीकी देशों ने पश्चिम देशों को बताया जिम्मेदार

Omicron: वैक्सीन की जमाखोरी और असमानता से खराब हुए हालात, अफ्रीकी देशों ने पश्चिम देशों को बताया जिम्मेदार

कोरोना वायरस के नए स्वरूप की सबसे पहले पहचान इस हफ्ते दक्षिण अफ्रीका में की गई थी.

कोरोना वायरस के नए स्वरूप की सबसे पहले पहचान इस हफ्ते दक्षिण अफ्रीका में की गई थी.

Inequality and Hoarding of Covid-19 Vaccine: कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के मिलने के बाद दुनिया के कई देशों ने अफ्रीकी देशों को अलग-थलग कर दिया है. ट्रैवल बैन और सीमाओं को सील करने के मुद्दे पर अफ्रीकी देशों ने नाराजगी जताई है, साथ ही वैक्सीन की जमाखोरी और सप्लाई में देरी से पैदा हुए इन हालातों को लेकर पश्चिमी देशों को जिम्मेदार बताया है. अफ्रीकी देशों ने कहा कि ये सभी देश वैक्सीन सप्लाई करने में असमर्थ रहे, जिसकी वजह से अफ्रीका में कई लोगों को वैक्सीन नहीं मिल पाई. यूनिसेफ (UNICEF) अफ्रीका ने कहा कि, विश्व के संपन्न देशों को जरुरत से ज्यादा कोरोना वैक्सीन की सप्लाई की गई. इन देशों ने गरीब और मध्यम वर्ग के देशों को कोवैक्स के जरिए वैक्सीन देने का वादा किया था लेकिन इसकी सप्लाई काफी धीमी रही.

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) के सामने आने के बाद कई पश्चिमी देशों ने अफ्रीकी देशों के साथ लगी अपनी सीमाओं सील करना शुरू करना दिया है. वायरस के नए वेरिएंट को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी से दुनिया के सभी देशों ने सतर्कता बढ़ानी शुरू कर दी है. लेकिन ट्रैवल बैन (Travel Ban) और सीमाओं को सील करने के मुद्दे पर दक्षिण अफ्रीका ने नाराजगी जताई है. अफ्रीकी देश का कहना है कि उन्हें इस बात की सजा दी जा रही है कि उन्होंने अपनी उन्नत तकनीक से कोरोना वायरस के इस नए वेरिएंट को जल्द ही पहचान लिया. साउथ अफ्रीका समेत अन्य अफ्रीकी देशों ने शनिवार को प्रदर्शन करते हुए अपने नागरिकों पर लगे ट्रैवल बैन और बॉर्डर सील करने के फैसले का विरोध किया. इस हालात के लिए अफ्रीकी देशों (African Countries) ने पश्चिमी देशों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ये सभी देश वैक्सीन सप्लाई करने में असमर्थ रहे, जिसकी वजह से अफ्रीका में कई लोगों को वैक्सीन नहीं मिल पाई.

    ओमिक्रॉन वेरिएंट का पहला केस बोत्सवाना में सामने आया. इसके बाद साउथ अफ्रीका ने यह ऐलान किया कि देश में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले कोरोना के डेल्टा वेरिएंट ने इन देशों में हालात काफी खराब हो गए थे. इन दोनों देशों में कोविड-19 वैक्सीनेशन की दर कम है और पर्याप्त वैक्सीन नहीं मिलने की वजह से नागरिकों का टीकाकरण नहीं हो पाया है. इसके लिए इन अफ्रीकी देशों ने विकसित देशों पर वैक्सीन की जमाखोरी करने का आरोप लगाया है. ओमिक्रॉन वेरिएंट से पहले कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट ने दुनियाभर में लाखों लोगों की जान ले ली थी. इसलिए अब इस विषय पर सोचने की जरुरत है कि वैक्सीन की असमानता कैसे इस वेरिएंट को रोकने में बड़ी भूमिका निभा सकती थी.

    वैक्सीनेशन की धीमी दर से बढ़ा वेरिएंट का खतरा
    कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से यह वायरस लगातार विकसित होकर खतरनाक रूप ले रहा है और अपने मूल रूप से ज्यादा घातक होता जा रहा है. ऐसे हालात में विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों का अब तक कोरोना वैक्सीनेशन नहीं हुआ है उन लोगों के अंदर इस वायरस के म्यूटेशन की संभावना बढ़ गई है. दरअसल कोरोना वायरस की मुख्य विशेषता इसका स्पाइक प्रोटीन है जो कि कोशिकाओं पर हमला करता है और संक्रमण का कारण बनता है. लेकिन वैक्सीन की मदद से प्रोटीन के स्पाइक को रोकने में मदद मिलती है. वहीं जिन लोगों को वैक्सीन नहीं मिली है उन लोगों के शरीर में वायरस कोशिकाओं को लगातार नुकसान पहुंचाता है और अपने कई प्रतिरूप तैयार करता है, साइंटिस्ट इसे ही वायरस का म्यूटेशन कहते हैं. वायरस के म्यूटेशन के कारण ही नए वेरिएंट सामने आते हैं.

    यह भी पढ़ें:  ओमिक्रॉन के हैं 30 से ज्यादा म्यूटेंट, वैक्सीन लगवा चुके लोगों को भी कर सकता है संक्रमितः AIIMS प्रमुख

    अफ्रीकी देशों में वैक्सीन की कमी, पश्चिमी देशों की भूमिका

    अफ्रीकी देशों में आबादी के अनुपात में अब तक कोविड-19 वैक्सीनेशन की दर धीमी रही है. दरअसल इसका कारण यह रहा कि विकसित देशों ने वैक्सीन निर्माताओं के साथ करार करके करोड़ों डोज एडवांस में खरीद लिए थे. लेकिन गरीब देशों को विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों की ओर से वैक्सीन की अपर्याप्त सप्लाई मिली.

    हाल ही में G20 समिट शुरू होने से पहले अफ्रीकन देशों ने एक वैक्सीन को लेकर एक एनालिसिस जारी किया था. इसके अनुसार G20 देशों को सहारन अफ्रीकी देशों की तुलना में प्रति व्यक्ति 15 से अधिक वैक्सीन प्राप्त हुई थी. यह डेटा साइंस एनालिटिक्स कंपनी एयरफिनिटी ने तैयार किया था. जिसकी मदद से दुनिया में अमीरों और गरीबों वैक्सीन को लेकर असमानता की बात सामने आई है, विशेषकर अफ्रीकी गरीब देशों में.

    यूनिसेफ (UNICEF) अफ्रीका ने कहा कि, विश्व के संपन्न देशों को जरूरत से ज्यादा कोरोना वैक्सीन की सप्लाई की गई. इन देशों ने गरीब और मध्यम वर्ग के देशों को कोवैक्स के जरिए वैक्सीन देने का वादा किया था लेकिन इसकी सप्लाई काफी धीमी रही. विकसित देशों ने करीब 1.3 बिलियन डोज दान देने के लिए रिजर्व रखे थे, लेकिन कोवैक्स इनमें से सिर्फ 356 मिलियन डोज ही वितरित कर पाई. ओवर वर्ल्ड इन डाटा वेबसाइट से मिले आंकड़ों के अनुसार, अफ्रीकी देशों में सिर्फ 11 फीसदी आबादी को ही कोरोना वैक्सीन का पहला डोज मिल पाया है और करीब 7.2 फीसदी लोगों का पूर्ण टीकाकरण हो सका है.

    ट्रैवल बैन से मिलेगी मदद?

    कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रैवल बैन लगाने से हमें कोरोना के इस नए वेरिएंट के बारे में जानने और इससे निपटने के लिए समय मिल सकता है. वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग में संक्रामक रोगों के प्रोफेसर मार्क वूलहाउस का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं पर प्रतिबंध से अन्य देशों को इस वेरिएंट से लड़ने के लिए वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाने का मौका मिलेगा, साथ ही लोगों को कोविड नियमों को लेकर जागरूक किया जा सकेगा. वहीं स्वीडिन की महामारी विभाग की मुखिया का कहना है कि ट्रैवल बैन लगाने से इतना फायदा नहीं होगा क्योंकि सभी अंतर्राष्ट्री उड़ानों की निगरानी रखना थोड़ा मुश्किल काम होगा.

    अफ्रीकी देशों की मदद के लिए क्या कर सकती है दुनिया
    कोरोना वायरस के इस नए वेरिएंट के संक्रमण को रोकने के लिए विश्व समुदाय को अफ्रीकी देशों की मदद करनी होगी. इनमें विकसित देशों द्वारा अधिक से अधिक वैक्सीन सप्लाई, आर्थिक मदद और कोविड-19 वैक्सीन पर लगे पेटेंट बैन को हटाना होगा. साउथ अफ्रीका और इंडिया ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन से कोविड-19 वैक्सीन से बौद्धिक संपदा का अधिकार हटाने की मांग की है. ताकि न केवल विकसित देशों को बल्कि विकासशील और गरीब देशों को भी पर्याप्त वैक्सीन मिल सके.

    इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कोविड-19 वैक्सीन के बूस्टर डोज को स्कैंडल करार देते हुए इस रोकने को कहा था. WHO ने कहा था कि इस बात का कोई मतलब नहीं बनता है कि स्वस्थ वयस्क, वैक्सीनेटेड बच्चे, हेल्थ वर्कर और अन्य लोगों को वैक्सीन का बूस्टर डोज दिया जाए. क्योंकि दुनिया के कई देशों में अब भी लाखों लोग वैक्सीन के पहली खुराक का इंतजार कर रहे हैं.

    Tags: Coroanvirus Vaccination, Corona Virus Vaccine, Omicron variant

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