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कोरोना वायरस के कारण बच सकता है माल्या, इस महीने भारत लौटना मुश्किल! जानें कैसे

कोरोना वायरस के कारण बच सकता है माल्या, इस महीने भारत लौटना मुश्किल! जानें कैसे

सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए विजय माल्या का आवेदन अपने आप में देरी से उठाया गया एक कदम था.

सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए विजय माल्या का आवेदन अपने आप में देरी से उठाया गया एक कदम था.

विजय माल्या (Vijay Mallya) की टीम मौजूदा कोरोनावायरस (Coronavirus) वातावरण में भारत में तय किए गए डिटेंशन में ले जाने के जोखिम को लेकर सवाल उठा सकती है. मुंबई (Mumbai) की आर्थर रोड जेल (Arthur Road Jail) के भीतर करीब 200 कोविड-19 संक्रमण के मामले सामने आए हैं

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    लंदन. मुंबई (Mumbai) के आर्थर रोड जेल (Aurthur road Jail) के अंदर कोरोना वायरस के प्रकोप को नियंत्रित करने में हो रही विफलता के चलते अब भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या (Vijay Mallya) की भारत में वापसी में और देरी कर सकती है. ब्रिटेन की अदालतों की तरफ से माल्या के लिए एक समर्पित डिटेंशन सेंटर को ही मंजूरी मिली है. उसका प्रत्यर्पण उसकी हिरासत के लिए सशर्त किया गया है.

    ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट (Westminster Court) को माल्या के लिए बनाए गए इस डिटेंशन सेंटर की रिपोर्ट दी गई है और इसे मंजूरी भी मिल गई है. बिना ब्रिटेन की कोर्ट को शामिल किए हुए माल्या को हिरासत में लेकर कहीं औऱ नहीं रखा जा सकता-- ऐसे में उसे भारत लाने में देर हो सकती है.

    इसलिए खारिज हुई माल्या की अपील
    सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए विजय माल्या का आवेदन अपने आप में देरी से उठाया गया एक कदम था. जिसे गुरुवार को विधिवत खारिज कर दिया गया- जो कि आदेश आने से पहले तय था. माल्या और उसकी मंहगे वकीलों की टीम को पता होगा कि ऐसे मामलों को ब्रिटेन में सुप्रीम कोर्ट में जाने की अनुमति नहीं है.

    भारत के विपरीत, ब्रिटेन में सर्वोच्च न्यायालय केवल व्यापक जनहित के कानून के मामलों की सुनवाई करता है. यह अपीलीय अदालत नहीं है - ब्रिटेन हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल को प्रत्यर्पण के खिलाफ माल्या की अपील ठुकरा दी थी.

    आर्थर रोड जेल में आए हैं करीब 200 केस
    लेकिन माल्या की टीम मौजूदा कोरोनावायरस वातावरण में भारत में तय किए गए डिटेंशन में ले जाने के जोखिम को लेकर सवाल उठा सकती है. मुंबई की आर्थर रोड जेल के भीतर करीब 200 कोविड-19 संक्रमण के मामले सामने आए हैं, जिनमें कई जेल कर्मचारी भी शामिल हैं. केवल कानूनी तौर पर इस तरह के माहौल में भेजे जाने को उसके मानव अधिकारों के लिए खतरा माना जा सकता है.

    वर्तमान परिस्थितियों में आर्थर रोड जेल में स्थितियां काबू में करना बेहद जरूरी हैं. या फिर भारत सरकार को लंदन की अदालत को किसी और डिटेंशन सेंटर की मंजूरी देने के लिए राजी करना होगा.

    मानव अधिकार का मुद्दा उठा सकता है माल्या
    माल्या यूरोपियन कोर्ट और ब्रिटेन सरकार के सामने भारत भेजे जाने और यहां रखे जाने को लेकर मानव अधिकार का मुद्दा उठा सकता है. माल्या अदालत के आदेश पर अब कोई बहस नहीं कर सकता, लेकिन वह अब भी सुरक्षित मार्ग और सुरक्षित गंतव्य को लेकर बातचीत कर सकता है.

    संभावित रूप से कुछ और समय है, हफ्ते नहीं महीनों के लिए वह वह यूरोपीय अदालत के पास मानव अधिकारों को लेकर पहुंच सकता है. अनिवार्य रूप से 20 अप्रैल को लंदन उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ माल्या की किसी भी अपील की अनुमति नहीं देगा.

    तीन हफ्ते और ब्रिटेन में रुक सकता है माल्या
    उच्च न्यायालय के गुरुवार के आदेश ने ब्रिटेन में विजय माल्या के लिए सभी रास्ते बंद नहीं कर दिये. यह पहले से ही उच्च न्यायालय के आदेश से साफ हो गया था. लेकिन इस कदम के बाद माल्या ब्रिटेन में तीन और सप्ताह रह सकता है.

    समय हासिल करने के लिए माल्या उनके सामने एक नई मिसाल है. उच्च न्यायालय और फिर यूरोपीय अदालत के लिए इसी तरह के एक आवेदन ने कथित सट्टेबाज संजीव चावला के लिए कुछ समय पहले खरीदा था, ब्रिटेन से प्रत्यर्पित किए जाने वाले पहले भारतीय (पहले स्वैच्छिक वापसी को छोड़कर) संजीव चावला को इस साल 13 फरवरी को भारत लाया गया था.

    संजीव चावला के मामले में भी उच्च न्यायालय को संतुष्ट किया जाना था कि दिल्ली की तिहाड़ जेल के भीतर उसके लिए समर्पित सेल कुछ न्यूनतम मानकों को पूरा करे. इस तरह के आश्वासन देने के बाद प्रत्यर्पण को सुरक्षित रखना भारत के लिए एक कानूनी जीत थी. प्रत्यर्पण के पहले के कदमों को रद्द कर दिया गया था, भारत में जेल की स्थितियों को प्रत्यर्पण से इनकार करने के लिए एक प्रमुख कारण के रूप में बताया गया था.

    जून में भारत आ सकता है माल्या
    माल्या को रखने के लिए एक वैकल्पिक डिटेंशन सेंटर पर विचार किया जा सकता है - यूके की अदालतों ने दिल्ली और मुंबई में अब तक दो को मंजूरी दी है. लेकिन लंदन की अदालत उसे देखना चाहेगी. यदि कोविड-19 कारक पर विचार नहीं किया गया, तो माल्या को जून में भारत वापस आ सकता है. स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर प्रशासनिक निर्णयों में उनकी आशा अब निहित है.

    जैसा कि अब प्रक्रिया है, एक बार अगर ये सारी परिस्थिति खत्म हो जाती है, अगर माल्या यह प्रयास करता है कि उच्च न्यायालय प्रत्यर्पण आदेश की पुष्टि करेगा. उसके बाद माल्या को 28 दिनों के भीतर भारत वापस लाने के लिए ब्रिटिश गृह सचिव प्रीति पटेल, प्रत्यर्पण का आदेश देंगी.

    गृह सचिव को अदालत के आदेश को पलटने का कोई अधिकार नहीं है, वह केवल इस पर कार्रवाई को सक्षम करने के लिए अदालत के आदेश पर ही मुहर लगा सकती हैं. माल्या 20 अप्रैल को अपनी आखिरी कानूनी लड़ाई हार गए. लेकिन वह अभी भी समय के साथ खेल सकते हैं.

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    Tags: Britain, Vijay Mallya, Vijay mallya case

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