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अफ्रीका से लेकर अमेरिका तक धरती में हो रहे खतरनाक बदलाव, जानिए क्या है वजह

News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 10:43 PM IST
अफ्रीका से लेकर अमेरिका तक धरती में हो रहे खतरनाक बदलाव, जानिए क्या है वजह
सांकेतिक तस्वीर

यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के सैटेलाइट स्वार्म (Swarm) से मिली जानकारी के मुताबिक, पृथ्वी के एक बहुत बड़े हिस्से में मैग्नेटिक शक्ति कमजोर हो गई है. ये हिस्सा अफ्रीका से लेकर दक्षिण अमेरिका तक करीब 10 हजार किमी में फैला है.

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नई दिल्ली. एक तरफ जहां कोरोना वायरस (Coronavirus) ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है. वहीं बीते कुछ दिनों से धरती (Earth) में हो रहे कुछ हैरतअंगेज बदलावों ने भी लोगों को डरा दिया है. जमीन के एक बड़े हिस्से में धरती की मैग्नेटिक शक्ति (Earth Magnetic Field) धीरे-धीरे कमजोर हो गई है. ये इतनी कमजोर हो गई कि इस इलाके में विमानों के साथ संचार करना मुश्किल हो सकता है. वैज्ञानिक भी इस समस्या से हैरान हैं. आइए जानते हैं कैसे आई ये समस्या?

यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के सैटेलाइट स्वार्म (Swarm)  से मिली जानकारी के मुताबिक, पृथ्वी के एक बहुत बड़े हिस्से में मैग्नेटिक शक्ति कमजोर हो गई है. ये हिस्सा लगभग 10,000 किमी में फैला है. इस क्षेत्र के 3 हजार किलोमीटर नीचे धरती के आउटर कोर तक मैग्नेटिक एरिया की शक्ति में कमी आई है. इस कारण इस क्षेत्र के ऊपर तैनात सैटेलाइट्स और उड़ने वाले विमानों के साथ संचार करना भी मुश्किल हो सकता है.

अफ्रीका से लेकर अमेरिका तक फैला एरिया



यूरोपियन स्पेस एजेंसी के मुताबिक, ये एरिया अफ्रीका से लेकर दक्षिण अमेरिका तक करीब 10 हजार किमी में फैला है. इसी क्षेत्र में धरती के अंदर चुंबकीय फील्ड की ताकत कम हो चुकी है. सामान्य तौर पर इसे 32 हजार नैनोटेस्ला होनी चाहिए थी. 1970 में यह 24 हजार थी, लेकिन 2020 में घटकर 22 हजार नैनोटेस्ला रह गई है. साइंटिस्ट ने बताया कि पिछले 200 सालों में धरती की चुंबकीय शक्ति में 9 फीसदी की कमी आई है. लेकिन अफ्रीका से दक्षिण अमेरिका तक मैग्नेटिक शक्ति में काफी कमी देखी जा रही है. वैज्ञानिक इसे साउथ अटलांटिक एनोमली (South Atlantic Anomaly) कहते हैं.



धरती की मैग्नेटिक फील्ड कैसे होती है पैदा?

ऐसे में आप सोच रहे होंगे की पृथ्वी का मैग्नेटिक शक्ति से क्या लेना-देना. तो बता दें कि पृथ्वी की मैग्नेटिक शक्ति की वजह से हम अतंरिक्ष से आने वाले रेडिएशन से बचे रहते हैं. इसी शक्ति के सहारे सभी प्रकार की संचार प्रणालियां जैसे सैटेलाइट, मोबाइल, चैनल आदि काम कर रही हैं. धरती की सतह से करीब 3 हजार किमी नीचे गर्म लोहे का बहता हुआ समंदर है. यह घूमता रहता है. इसके घूमने से पृथ्वी के अंदर से इलेक्ट्रिकल करंट बनता है जो ऊपर आते-आते इलेक्ट्रोमैंग्नेटिक फील्ड में बदल जाता है.

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First published: May 21, 2020, 10:29 PM IST
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