Corona Virus: देश में 1.5 करोड़ मिंक मारेगी डेनमार्क सरकार, एक्सपर्ट्स ने कहा- वैक्सीन को कर सकते हैं प्रभावित

डेनमार्क में 1.7 करोड़ चूहों को मारा जाएगा.
डेनमार्क में 1.7 करोड़ चूहों को मारा जाएगा.

Corona Virus: डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेट फ्रेड्रिक्सन (Mette Frederiksen) ने बुधवार को कहा था कि देश में 1.5 करोड़ से ज्यादा मिंक मारे जाएंगे. मेट का कहना है कि वायरस का यह वैरिएंट वैक्सीन को प्रभावित कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 8, 2020, 3:34 PM IST
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नई दिल्ली. कुछ दिनों पहले खबरें आईं थीं कि डेनमार्क में मिंक नाम के जीव के कारण कोरोना वायरस (Corona Virus) इंसानों में फैल रहा है. हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि इस तरह से फैलने के कारण वायरस और खतरनाक हो जाएगा. लेकिन डेनमार्क की घोषणा के कारण वैज्ञानिकों में चिंता बढ़ गई है. डेनमार्क का कहना है कि SARS-Cov-2 का यह नया स्ट्रैन वैक्सीन (Vaccine) के प्रभाव पर असर डाल सकता है.

डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेट फ्रेड्रिक्सन ने बुधवार को कहा था कि देश में 1.5 करोड़ से ज्यादा मिंक (Mink) मारे जाएंगे. मेट का कहना है कि वायरस का यह वैरिएंट वैक्सीन को प्रभावित कर सकता है. हालांकि, मामले में जानकारी रखने वाले स्पेशलिस्ट इस बात को नहीं मान रहे हैं कि इस वैरिएंट से ज्यादा खतरा है. फिलहाल जानकार और ज्यादा जानकारी का इंतजार कर रहे हैं.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में वायरोलॉजिस्ट एंजेला रासमुसैन का कहना है 'मैं सच में चाहती हूं कि प्रेस रिलीज के जरिए साइंस के रुझानों को रोकना होगा.' उन्होंने कहा 'इस बात का कोई भी कारण नहीं है कि जीनोमिक डेटा क्यों साझा नहीं किया जा सकता है, जिससे मेडिकल समुदाय इन दावों का आकलन करें.'



खास बात है कि बीते साल चीन में मिला वायरस लगातार म्यूटेट कर रहा है और जरूरी नहीं है कि नए वैरिएंट्स पहले वालों से खराब हों. फिलहाल अब तक कोई भी स्टडी यह नहीं बताती है कि SARS-Cov-2 वैरिएंट्स उनके पिछले किस्म से ज्यादा खतरनाक थे. यहां तक कि मिंक से फैलने वाले वायरस के मामले में भी ऐसा नहीं है.
एएफपी से बातचीत में फ्रेंच हेल्थ एजेंसी के गिलीज सल्वात ने कहा 'डेनमार्क की अथॉरिटीज से मिली जानकारी के मुताबिक, यह वायरल न ही ज्यादा पैथोजैनिक है और न ही जहरीला है.' यहां मुख्य चिंता का कारण वैक्सीन है. सल्वात ने पाया कि यह वैरिएंट दूसरे वायरस की तरह सामने आ रहा है और आबादी पर प्रभाव डाल रहा है. उन्होंने कहा 'एक स्ट्रेन के लिए वैक्सीन लाना पहले से ही जटिल है और अगर हमें यह दो, चार, छ: स्ट्रेन्स के लिए करना पड़ा, तो यह और ज्यादा जटिल हो जाएगा.'

सरकार के फैसले को सही बता रहे हैं एक्सपर्ट
यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में पढ़ाने वाले फ्रेंकोइस बैलॉक्स स्वास्थ्य के नजरिए से इस उपाय को सही बताते हैं. हालांकि, इस दौरान वह यह भी महसूस करते हैं कि यह कहना की मिंक दूसरी महामारी ला सकता है, यह ज्यादा लगता है. उन्होंने कहा कि डर भरे इस माहौल में यह सही भी नहीं है. वैक्सीन को लेकर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह असंभव भी नहीं है कि नया स्ट्रेन फैल सकता है और वैक्सीन के प्रभाव को कम कर सकता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के जेम्स वुड बताते हैं 'नए स्पाइक प्रोटीन में हो रहे बदलावों का आकलन इंटरनेशनल साइंटिफिक कम्युनिटी ने नहीं किया है और अभी स्थिति साफ नहीं है.' उन्होंने कहा 'यह कहना जल्दबाजी होगी कि हो रहा बदलाव वैक्सीन या इम्युनिटी को खराब कर देगा.'

पहले भी सामने आए हैं जानवरों से वायरस फैलने के मामले
बिल्ली, कुत्ता और यहां तक कि न्यूयॉर्क के जू में शेर और बाघ से भी कोविड 19 फैलने के मामले सामने आए हैं. अमेरिका की सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, जानवरों से इंसानों में कोवड 19 फैलने का जोखिम काफी कम है. सल्वात ने बताया कि एपेडेमियोलॉजिस्ट (Epidemiologist) के नजरिए में कुत्ते और बिल्लियां अंतिम छोर होते हैं. उन्होंने बताया 'क्योंकि ये वायरस को रख सकते हैं, लेकिन संक्रामक होने के लिए बढ़ा नहीं सकते.'
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