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इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने से आई सुनामी, समुद्री लहरों ने लील ली 222 जिंदगियां

इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने से आई सुनामी, समुद्री लहरों ने लील ली 222 जिंदगियां

इंडोनेशिया के कारिता में मलबे में अपने प्रियजनों को तलाशते लोग

इंडोनेशिया के कारिता में मलबे में अपने प्रियजनों को तलाशते लोग

अनक क्रैकटो एक छोटा वॉल्कैनिक आइलैंड है, जो कि 1883 में क्रैकटो ज्वालामुखी के फटने के बाद अस्तित्व में आया था.

    इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने से आई सुनामी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 222 तक जा पहुंची है और लगभग 600 लोग घायल हुए है. इस सुनामी के कारण करीब 20 मीटर ऊंची लहरें उठीं, जिसने कई टूरीस्ट बीच और तटवर्ती इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया और भारी तबाही मचाई.

    इंडोनेशिया की भूगर्भीय एजेंसी सुनामी की असली वजह पता लगाने में जुटी है. शुरू में अधिकारियों ने दावा किया था कि यह सुनामी नहीं है और सिर्फ समुद्र में उठीं ऊंची लहरें हैं. इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान और भूगर्भ एजेंसी के वैज्ञानिकों ने कहा कि अनाक क्राकाटाओ ज्‍वालामुखी के फटने के बाद समुद्र के नीचे भूस्खलन सुनामी का कारण हो सकता है. उन्होंने लहरों के उफान का कारण पूर्णिमा के चंद्रमा को भी बताया.

    जावा के दक्षिणी छोर और दक्षिणी सुमात्रा के तटों पर आई सुनामी की लहरों से दर्जनों इमारतें तबाह हो गई हैं. नेशनल डिज़ास्टर एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पुर्वो नुग्रोहो ने बताया कि सुनामी स्थानीय समयानुसार शनिवार रात करीब 9:30 बजे आई.

    उन्होंने बताया कि दक्षिणी सुमात्रा और पश्चिमी जावा के पास समुद्र की ऊंची लहरें तटों को तोड़कर आगे बढ़ीं जिससे अनेक मकान नष्ट हो गए. लोगों को बचाने के लिए खोज और बचाव का काम तेज कर दिया गया है. सुनामी की चपेट में आने से कम से कम 584 लोग घायल हुए हैं और तीन इलाकों में 20 लोग लापता बताए जा रहे हैं.

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    टीवी चैनलों पर जावा के पश्चिमी पट पर स्थित मशहूर कारिता बीच पर हुए नुकसान की तस्वीरें भी दिखाई जा रही हैं. प्रत्यक्षदर्शियों ने भी आंखों देखा मंजर बयान किया है. सुनामी के समय कारिता बीच पर मौजूद मुहम्मद बिनतांग ने बताया कि अचानक तेज लहरें उठने लगीं और अंधेरा छा गया. पंद्रह वर्षीय बिनतांग ने कहा, 'हम रात करीब नौ बजे यहां आए थे कि अचानक तेज लहरें उठने लगीं, अंधेरा छा गया और बिजली चली गई.'



    वहीं इस आपदा के एक अन्य चश्मदीद ओएस्टीन एंडरसन ने फेसबुक पर लिखा, 'मैं ज्वालामुखी की तस्वीरें ले रहा था, तभी समुद्र में उठ रही ऊंची-ऊंची लहरें जमीन पर 15-20 से मीटर अंदर तक पहुंच गईं. इसे देखकर मुझे वहां से भागना पड़ा.'

    वह कहते हैं, 'अगली लहर होटल एरिया तक जा पहुंचीं और सड़कों व कारों को तहसनहस कर दिया. किसी तरह मैं अपने परिवार के साथ वहां से निकलने में कामयाब रहा और जंगल के रास्ते ऊंचे इलाके तक पहुंचा. शुक्र है कि हम सब ठीक-ठीक है.'


    इस सुनामी का सबसे ज्यादा असर जावा के बानतेन प्रांत स्थित पंडेगलांग इलाके पर पड़ा है. मृतकों में शामिल 33 लोग इसी इलाके से हैं. इसके अलावा दक्षिणी सुमात्रा के बांदर लामपंग शहर में सैकंड़ों लोगों को गवर्नर के कार्यालय में शरण लेनी पड़ी है.

    अधिकारियों का कहना है कि अनक के फटने की वजह से समुद्र के अंदर लैंडस्लाइड हुआ और लहरों में असामान्य परिवर्तन आया, जिसने सुनामी का रूप ले लिया. इंडोनेशिया की जियोलॉजिकल एजेंसी सुनामी के कारणों का पता लगाने में जुट गई है. नुग्रोहो ने कहा कि मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है.

    अनक क्रैकटो एक छोटा वॉल्कैनिक आइलैंड है जो कि 1883 में क्रैकटो ज्वालामुखी के फटने के बाद अस्तित्व में आया था. इससे पहले सितंबर में सुलावेसी द्वीप पर पालू शहर में आए भूकंप और सुनामी में करीब 2,500 लोगों की मौत हुई थी.

    ये है सुनामी की असली कहानी, इसलिए आती है ये खतरनाक आपदा

    Tags: Earthquake, Indonesia, Tsunami, World news

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