कई दिनों तक भारत में घूमता रहा, दिल्ली के होटल अशोक और जनपथ में रुका था मसूद अज़हर ..

मसूद अज़हर जब पहली बार दिल्ली आया तो वह दिल्ली के पॉश एरिया के होटल अशोक और होटल जनपथ में भी रुका.

News18.com
Updated: March 15, 2019, 4:00 PM IST
कई दिनों तक भारत में घूमता रहा, दिल्ली के होटल अशोक और जनपथ में रुका था मसूद अज़हर ..
मसूद अज़हर की फाइल फोटो
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Updated: March 15, 2019, 4:00 PM IST
साल 1994 में  मसूद अज़हर जब पहली बार दिल्ली आया तो वह दिल्ली के पॉश एरिया के होटल अशोक और होटल जनपथ में भी रुका. इमीग्रेशन अधिकारी भी उसे पहचान नहीं पाए. अधिकारियों को उसने बताया कि वह मूल रूप से गुजरात का रहने वाला है. उसके पास पुर्तगाल का पासपोर्ट था.

यहीं नहीं अगले दो हफ्तों में ही वह लखनऊ गया और सहारनपुर के दारुल उलूम देवबंद भी गया. दिल्ली में संसद भवन और पुलवामा हमले का ज़िम्मेदार मसूद अज़हर जाली पासपोर्ट पर भारत आया था. सुरक्षा गार्डों द्वारा की गई पूछताछ में अज़हर ने बताया, 'मैंने ढाका में दो दिन बिताया उसके बाद दिल्ली के लिए रवाना हुआ. एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन अधिकारियों ने मेरा पुर्तगाली पासपोर्ट देखकर मुझसे सवाल किया क्योंकि मैं पुर्तगाली नहीं दिखता था. मैंने उनसे कहा कि मैं जन्म से गुजराती हूं और उन्होंने पासपोर्ट पर स्टाम्प लगाकर मुझे दे दिया. इसके बाद मैंने किसी अच्छे होटल में रुकने के लिए टैक्सी की. टैक्सी ड्राइवर मुझे चाणक्यपुरी के होटल अशोक में लेकर गया. मैं वहीं रुका.

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उसने आगे बताया, 'उसी रात मुझसे हरकत उल अंसार आतंकी गुट के सद्स्य अशरफ डार और अबू मोहम्मद मिलने आए. मैंने उनसे सहारनपुर के देवबंद में जाकर देवबंदी बुद्धिजीवियों के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने की इच्छा ज़ाहिर की. अशरफ डार मुझे अपनी मारुति कार में देवबंद लेकर गया. हम अगले दिन वहीं रुके. अगली सुबह हम गुनगोह गए जहां से हम सहारनपुर के लिए रवाना हो गए.'

सहारनपुर में अशरफ तबलीक उल जमात मस्जिद में रुका लेकिन कहीं भी उसने अपनी सही पहचान को नहीं बताया. बाद में 31 जनवरी 1994 को वह उसी कार से दिल्ली आ गया.

दिल्ली पहुंचकर अज़हर कनॉट प्लेस के एक होटल जनपथ में रुका. चूंकि उसकी फ्लाइट 9 फरवरी को थी इसलिए उसने लखनऊ में मौलाना अबू हसन नदवी ऊर्फ अली मियां के मदरसे जाने का फैसला किया. अज़हर 6 से 7 फरवरी को लखनऊ गया वहां भी उसने अपनी पहचान को जाहिर नहीं किया.

चूंकि लखनऊ में अज़हर की मुलाकात न तो अली मियां से हुई और न ही दूसरे व्यक्ति से हुई जिससे वह मिलना चाहता था इसलिए वह बस से दिल्ली वापस लौट आया. इस बार वह दिल्ली के करोल बाग के शीश महल होटल में रुका. दिल्ली के सभी होटलो में वह वली अदम ईसा के नाम से रुका.
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पूछताछ के दौरान उसने बताया कि 8 फरवरी को वह निज़ामुद्दीन के तबलिग उल जमात मस्जिद में गया लेकिन उसकी मुलाकात किसी से भी नहीं हो पाई. कश्मीर के आतंकियों को गिफ्ट देने के लिए उसने निजामुद्दीन से 12 कम्पास भी खरीदे.

9 फरवरी को वह श्रीनगर आया जहां अशरफ डार उसके साथ लाल बाजार के मदरसा कासमियां गया. यहां अज़हर के रुकने के लिए कमरे का इंतज़ाम किया गया. बाद में शाम को हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी संगठन का एक आतंकी सज्जाद अफगानी अपने साथी अमजद बिलाल के साथ मिलने आया. अगली सुबह 10 फरवरी को सज्जाद उसे पीओके में एक जगह माटीगुंड में लेकर गया जहां सारे आतंकवादी इकट्ठे हुए.

वे लोग हरकत-उल-मुजाहिदीन और हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी को मिलाए जाने पर काफी खुश थे. अज़हर बताता है कि उसने उन लोगों के पते और चिट्ठियां ले लीं ताकि पाकिस्तान में उनके परिवारों तक उनका संदेश पहुंचाया जा सके.

माटीगुंड से लौटते वक्त उसके साथ सज्जाद अफगानी और फारुख नाम का आदमी था. लेकिन रास्ते में एक जगह उसकी कार खराब हो गई. इसके बाद उसने कार को वहीं छोड़ दी और अनंतनाग जाने के लिए एक ऑटो रिक्शा ले लिया. दो तीन किलोमीटर चलने के बाद सेना के जवानों नें उन्हें रोका. इस पर फारुख भागने लगा और सेना के जवानों पर फायरिंग कर दी. बदले में सेना ने भी उस पर फायरिंग की.

जांचकर्ताओं को उसने बताया, 'इस घटना में फारुख तो भागने में कामयाब रहा लेकिन मैं और अफगानी गिरफ्तार कर लिए गए.' बाद में अज़हर के साथ दो और आतंकवादियों को 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान अपहरण के बदले भारत की जेल से रिहा कर दिया गया.
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