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ईरान ने अपने देशवासियों से बोला था झूठ? अमेरिकी एयरबेस से दूर गिराई मिसाइल

अमेरिकी आर्मी के जेनरल मार्क मिले के मुताबिक इस हमले का मकसद सेना की गाड़ी और उनके समानों को नुकसान पहुंचाना था

अमेरिकी आर्मी के जेनरल मार्क मिले के मुताबिक इस हमले का मकसद सेना की गाड़ी और उनके समानों को नुकसान पहुंचाना था

ईरान ने मिसाइल से अमेरिका (America) के दो एयरबेस को निशाना बनाने की कोशिश की. तसनीम न्यूज़ एजेसी के मुताबिक फतेह-313 और क़ियम मिसाइल से निशाना साधा गया, लेकिन इस हमले से अमेरिकी सेना को कोई नुकसान नहीं हुआ.

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    बगदाद. ईरान ने मेजर जनरल कासिम सुलेमानी (General Qasem Soleimani) की मौत का बदला लेने के लिए अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर करीब दो दर्जन मिसाइल से हमले किए. ईरान (Iran) की तरफ से दावा किया गया कि इस हमले में करीब 80 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, लेकिन बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के इन दावों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि कोई भी अमेरिकी सैनिक इस हमले में हताहत नहीं हुआ. ऐसे में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. क्या ईरान ने अपने मुल्क से झूठ बोला? क्या ईरान मिसाइल हमले से अमेरिका को सिर्फ डराना चाहता था? या फिर क्या खुद ईरान भी नहीं चाहता था कि इस हमले में किसी अमेरिकी सैनिक की मौत हो. इस हमले के बाद इराकी सेना ने भी कहा कि इससे उन्हें भी कोई नुकसान नहीं हुआ.

    क्या था असली मकसद?
    ईरान ने मिसाइल से अमेरिका के दो एयरबेस अल-अशद और इरबिल को निशाना बनाने की कोशिश की. ईरान की तसनीम न्यूज़ एजेसी के मुताबिक, फतेह-313 और क़ियम मिसाइल से निशाना साधा गया, लेकिन इस हमले से अमेरिकी सेना को कोई नुकसान नहीं हुआ. अमेरिकी आर्मी के जनरल मार्क मिले के मुताबिक इस हमले का मकसद सेना की गाड़ी और उनके समानों को नुकसान पहुंचाना था. उन्होंने कहा, 'मेरा मानना ​​है कि मैंने जो देखा और जो मुझे पता है, उसके आधार पर मैं ये कह सकता हूं कि इस हमले का उद्देश्य स्ट्रक्चर डैमेज, वाहनों और उपकरणों और विमानों को नष्ट करना और कर्मियों को मारना था. यह मेरा अपना व्यक्तिगत मूल्यांकन है.'



    कहां गिरे मिसाइल?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, देर रात 1:45 से 2:15 के बीच 22 मिसाइलें दागी गई. इसमें से 17 मिसाइलें अल असद एयरबेस की तरफ दागी गई. अब इस हमले की सेटेलाइट तस्वीरें भी आ गई है. मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ के लिए इन तस्वीरों को प्लानेट लैब ने जारी किया है. इसमें देखा जा सकता है कि अल असद के पास पांच स्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया. जबकि कई ऐसे निशाने साधे गए जो बेकार थे और इससे कोई नुकसान नहीं हुआ. एक मिसाइल तो अल असद एयर बेस से 40 किलोमीटर दूर हितान के गांव में गिरे. एक मिसाइल इरबिल से 47 किलोमीटर दूर बराह में गिरे.



    जानबूझ ऐसा किया गया?
    कहा जा रहा है कि ईरान ने ऐसा जानबूझ कर किया, क्योंकि वो अमेरिका से सीधे तौर पर युद्ध नहीं चाहता था. हमले के तुरंत बाद ट्रंप ने कहा था ऑल इज वेल और ऐसा हुआ भी. अमेरिकी का इससे कोई नुकसान नहीं हुआ. अमेरिका के कई सीनियर पत्रकार भी ये दावा कर रहे हैं कि जान-बूझकर ईरान ने ऐसे जगह मिसाइल दागे जहां कम नुकसान हो.



    अलार्म सिस्टम से बची जान
    बीबीसी के मुताबिक, कई घंटे पहले अमेरिका को इन मिसाइल अटैक की भनक लग गई थी. कहा जा रहा है कि अमेरिका को इसकी जानकारी सैटेलाइट से मिली. ये वही सेटेलाइट है जिससे नॉर्थ कोरिया की न्यूक्लियर टेस्ट पर नजर रहती है. लिहाजा सूचना मिलते ही अमेरिकी सैनिक बंकर में घूस गए. ट्रंप ने भी कहा कि हमले से पहले अलार्म सिस्टम बज गए थे, जिससे किसी की भी जान नहीं गई.

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