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अलग-अलग बैकग्राउंड के होने के बाद भी इसलिए इतने करीब हैं मोदी और ट्रंप

पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के अच्छे रिश्ते हैं.

पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के अच्छे रिश्ते हैं.

साल 2014 में राष्ट्रीय राजनीति में आने के बाद से नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और 2016 में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों नेताओं की एक-दूसरे के साथ लगातार तुलना हो रही है.

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    नई दिल्ली. पहली बार भारत दौरे पर आ रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अहमदाबाद पहुंच चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अपने दोस्त का गर्मजोशी से स्वागत किया. ट्रंप और मोदी दो अलग-अलग बैकग्राउंड से आते हैं. जहां डोनाल्ड ट्रंप मशहूर बिजनेस टाइकून हैं, वहीं नरेंद्र मोदी एक वक्त में वडनगर में चाय बेचते थे. अलग-अलग बैकग्राउंड के होने के बाद भी पीएम मोदी और ट्रंप में कुछ समानताएं हैं, जो दोनों के बीच दोस्ती के रिश्ते को मजबूत बनाती हैं.

    गुजरात की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले अहमदाबाद की सड़कें पीएम मोदी और ट्रंप के स्वागत वाले बिलबोर्ड से पटी हुई हैं. इनमें 'भारत-अमेरिका की दोस्ती', 'दो मजबूत लोकतांत्रिक देश, एक महान दोस्ती' जैसे टैग देखे जा सकते हैं.

    वॉशिंगटन के विल्सन सेंटर के माइकल कुगलमैन ने न्यूज़ एजेंसी AFP को बताया, 'पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप में कई चीजें एक जैसी हैं. इसी ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाया है.' माइकल आगे बताते हैं, 'आज के अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र में व्यक्तित्व राजनीति बहुत बड़ी भूमिका अदा करती है. यही वजह है कि बंद कमरे में बातचीत यानी क्लोज़ डोर डायलॉग का विचार धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जा रहा है.'

    साल 2014 में राष्ट्रीय राजनीति में आने के बाद से नरेंद्र मोदी और 2016 में ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों नेताओं की एक-दूसरे के साथ लगातार तुलना हो रही है. अमेरिका में 73 साल के डोनाल्ड ट्रंप और भारत में 69 साल के नरेंद्र मोदी का स्वागत भीड़ जोर-शोर से करती है


    ट्रंप और मोदी की समानताओं-असमानताओं पर एक नज़र डालते हैं:-

    राष्ट्रवादी और संरक्षणवादी
    दोनों नेता अपने-अपने देश के राष्ट्रवादी और संरक्षणवादी आंदोलनों को प्रमोट करते हैं. ट्रंप जहां 'अमेरिका फर्स्ट' की बात करते हैं, वहीं, पीएम बनने के बाद मोदी ने 'मेक इन इंडिया' की पहल की है.

    ट्रंप और मोदी विश्व के दो बड़े और शक्तिशाली लोकतांत्रिक देशों का नेतृत्व करते हैं. आलोचकों का कहना है कि ये दोनों नेता रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर मेसियस बोलसोनारो के साथ विश्व के शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्षों में भी शामिल हैं.

    भारतीय राजनयिक राकेश सूद बताते हैं, 'ट्रंप और मोदी में कई एकसमान गुण हैं- राजनीति के प्रति प्रेम और अटूट समर्पण. इसके बल पर दोनों किसी भी समस्या का सबसे उत्तम समाधान खोज लेते हैं.' हाल के रक्षा और व्यापारिक तनाव के बाद भी मोदी-ट्रंप अपने व्यक्तित्व के बल पर भारत-अमेरिका के संबंध को और मजबूती देने में जुटे हैं.

    इन समानताओं के साथ पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच कुछ असमानताएं भी हैं:-

    >>मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में अपनी शुरुआत की थी. बाद में वह भारतीय जनता पार्टी में एक सशक्त नेता के तौर पर उभरे.

    >>डोनाल्ड ट्रंप राजनीति में आने से पहले मशहूर बिजनेसमैन थे. उनका कारोबार भारत समेत पूरे विश्वभर में फैला हुआ है. राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से पहले तक ट्रंप का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं था. वह रिपब्लिकन पार्टी से थोड़े-बहुत प्रभावित जरूर थे.

    >>दक्षिण एशियाई राजनीति में लंबे समय से पर्यवेक्षक रहे माइकल कुगलमैन बताते हैं, 'मोदी ट्रंप के मुकाबले ज्यादा परंपरावादी नेता हैं. उन्होंने ट्रंप की तरह अपने कार्यकाल में क्रांति लाने की अभी तक ऐसी कोई कोशिश नहीं की है.'

    कुगलमैन आगे बताते हैं, 'एक नेता के व्यक्तिगत गुण ही दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. मसलन जॉर्ज बुश और मनमोहन सिंह, बराक ओबामा और मनमोहन सिंह, ओबामा और मोदी और अब मोदी-ट्रंप. इन सबके बीच मजबूत केमेट्री थी, जिसने दोनों देशों के रिश्ते को एक नया आयाम दिया.

    >> ट्रंप और मोदी में कश्मीर मुद्दे को लेकर भी असमानताएं हैं. ट्रंप कई मौके पर कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की इच्छा जाहिर कर चुके हैं, वही पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर हर बार यही दोहराया है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है. इसमें किसी दूसरे देश को तकलीफ नहीं होने देंगे. जानकारों का ये भी कहना है कि ट्रंप अमेरिका में अपने भारतीय मूल के वोटर्स को लुभाने के लिए ही इस दौरे पर आए हैं.

    बता दें कि ट्रंप के लिए 'हाउडी मोदी' की तर्ज पर 'नमस्ते ट्रंप' का आयोजन किया जा रहा है. इस इवेंट के जरिए ट्रंप अमेरिका के भारतीय वोटर्स को साधने की पूरी कोशिश करेंगे.



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