इस वजह से 30 साल में पूरी तरह खत्म हो जाएगा समुद्र में डूबा टाइटैनिक

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Updated: August 23, 2019, 4:00 PM IST
इस वजह से 30 साल में पूरी तरह खत्म हो जाएगा समुद्र में डूबा टाइटैनिक
जहाज की हालात देख हैरान रह गये वैज्ञानिक

टाइटैनिक के नए फुटेज (Footage) देखकर वैज्ञानिकों (Scientists) ने अनुमान लगाया है कि अगले 30 साल में जहाज का मलबा पूरी तरह खत्म हो जाएगा.

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जिस टाइटैनिक (Titanic) जहाज के बारे में ये कहा गया था कि वो कभी डूबेगा नहीं, वो न सिर्फ डूब गया बल्कि उसका मलबा भी धीरे-धीरे मिट्टी बन रहा है. वैज्ञानिकों ने तो यहां तक दावा कर दिया है कि खारे पानी की वजह से 30 साल में टाइटैनिक का मलबा पूरी तरह खत्म हो जाएगा. टाइटैनिक की तलाश में गए गोताखोरों ने करीब एक दशक बाद एक बार फिर इसे ढूंढकर इसकी कुछ तस्वीरें जारी की हैं. टाइटैनिक की ये तस्वीरें देंखकर न सिर्फ जेम्स कैमरून की फिल्म का वो बड़ा जहाज आंखों के सामने तैरने लगता है बल्कि इसकी हालत देखकर दुख भी होता है.

जहाज के लोहे तो तोड़कर खा रहा बैक्टीरिया
नोवा स्कोटिया के हैलिफ़ैक्स में डलहौज़ी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता हेनरीटेट मान ने वर्षों तक टाइटैनिक के मलबे का अध्ययन किया. 2010 में उन्होंने बैक्टीरिया की एक नई प्रजाति की खोज की - हेलोमोनस टिटानिका. यह बैक्टीरिया जहाज के मलबे से लिए गए जंग के नमूनों में पाया गया था. हेलोमोनस टाइटैनिका मलबे पर पाए जाने वाले जीवाणुओं में से है जो जहाज के लोहे को तोड़कर खा जाते हैं. इससे जहाज का लोहा खत्म हो रहा है और उसकेआसपास घास उग रही है.

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टाइटैनिक जहाज के मलबे के सभी फोटो Atlantic Productions के ट्विटर हैंडल से लिए गए हैं.


1912 में हुआ था एक्सीडेंट
टाइटैनिक साउथम्पटन (इंग्लैंड) से अपनी पहली यात्रा पर, 10 अप्रैल 1912 को रवाना हुआ था. टाइटैनिक का एक्सीडेंट 15 अप्रैल 1912 को हुआ था. उस वक्त दावा किया गया था कि टाइटैनिक कभी डूबेगा नहीं. लेकिन यह बर्फ से टकराकर दो हिस्सों में टूट गया था. इस घटना में करीब 1500 लोग मारे गए थे. वैसे जहाज का मलबा 34 साल पहले ही खोज लिया गया था. तब से लेकर अब तक टाइटैनिक पर कई फिल्में बन चुकी हैं. 1997 में बनी जेम्स कैमरून की टाइटैनिक फिल्म को ऑस्कर मिला था.

दोबारा चलाया गया अभियान
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टाइटैनिक की तलाशी का अभियान इस बार कैलाडन ओशनिक के CEO और गहरे समुद्र के खोजकर्ता विक्टर वेसकोवो के नेतृत्व में चलाया गया. एक अभियान दल ने आठ दिनों के दौरान पांच बार मलबे में गोते लगाए. यही नहीं अमेरिका के गहरे समुद्र में खोजकर्ता विक्टर वेसकोवो (Victor Vescovo) ने हाल ही में अब तक की सबसे गहरी सबमरिन डाइव का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया. उन्होंने विश्व में सबसे गहरी प्राकृतिक खाई प्रशांत महासागर में करीब 35,853 फुट की गहराई में पहुंचकर 4 घंटे बिताए.

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गोताखोर पिछले एक दशक में पहली बार टाइटैनिक के मलबे तक पहुंचे.


दिखाई जाएगी डॉक्यूमेंट्री
अटलांटिक प्रोडक्शंस लंदन की ओर से प्रसारित की जाने वाली डाक्यूमेंट्री में इस खोज को पूरी तरह दिखाया जाएगा कि कैसे वैज्ञानिक और गोताखोरों की टीम ने इस जहाज के मलबे को ढूंढा. टीम ने विशेष रूप से तैयार कैमरों का उपयोग करते हुए 4 हजार फोटो खींचे हैं. अटलांटिक प्रोडक्शंस द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया है कि जहाज के विभिन्न हिस्सों के बीच में आई दरारों का फोटोग्राफी की गई ताकि अत्यधिक सटीक और फोटोरिअल 3 डी मॉडल तैयार किए जा सकें.

हाल के वर्षों में टाइटैनिक को ट्रैक करने और स्मारक बनाने के लिए एक ट्रेकिंग और मैपिंग प्रोजेक्ट शुरू किया गया. 2012 में टाइटैनिक के मलबे को यूनेस्को ने कल्चरल हेरीटेज का दर्जा दिया है. "कप्तान का बाथटब," जहाज का सबसे प्रसिद्ध हिस्सा अब छतिग्रस्त होने के कारण पूरी तरह से गायब हो गया है. पार्क स्टीफेंसन ने अटलांटिक प्रोडक्शंस के बयान में टाइटैनिक के बारे में यह कहा था.

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First published: August 23, 2019, 3:25 PM IST
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