डॉक्‍टरों ने मस्जिदों में नमाज रोकने मांग की, बोले, 'संक्रमण फैला तो यह पाकिस्तान की विफलता'

डॉक्‍टरों ने मस्जिदों में नमाज रोकने मांग की, बोले, 'संक्रमण फैला तो यह पाकिस्तान की विफलता'
रमजान में मस्जिदों में इबादत करने वालों की संख्या बढ़ेगी. इससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ेगा. फाइल फोटो

पत्र में चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि कुप्रबंधन के नतीजे में नमाज पढ़ने वालों, मस्जिद प्रशासन और प्रशासन के बीच झगड़े और विवाद का खतरा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 22, 2020, 12:40 PM IST
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इस्‍लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) और विदेश में मौजूद सीनियर डॉक्टरों के एक समूह ने पाकिस्‍तान सरकार को पत्र लिखकर सामूहिक नमाज पढ़ने और मस्जिदों में इकट्ठे होकर प्रार्थना करने के फैसले पर एक बार फिर विचार करने को कहा है. 'डॉन' की खबर के मुताबिक इंडस अस्पताल (Indus Hospital) के डॉ. अब्दुल बारी खान ने पत्र की पुष्टि करते हुए कहा है कि उलेमा और व्यापारिक समुदाय की ओर से भी यही मांग की गई है. साथ ही पत्र में सरकार और मौलवियों की सहमति पर प्रार्थना करने की अनुमति देने पर भी चिंता व्यक्त की गई है.

शनिवार को राष्ट्रपति आरिफ अल्‍वी (Arif Alvi) ने कहा था कि 'राज्य और उलेमा लोगों को मस्जिदों में जाने से नहीं रोक सकते.' सरकार ने समाजी फासले को बनाए रख कर और एहतियाती उपायों को करने की शर्त पर शुक्रवार की नमाज, रमजान की तरावीह और प्रतिदिन की नमाज के हवाले से उलेमा की सभी मांगें मान ली हैं.

मस्जिदों में जाने वाले 60 से 70 वर्ष की उम्र वाले ज्‍यादा
वहीं डॉक्टरों के इस पत्र ने चेतावनी दी गई है कि देश भर की मस्जिदों में 50 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्‍या ज्‍यादा होती है. ऐसे में संक्रमण के फैलने का खतरा ज्‍यादा है. उन्होंने कहा कि पिछले 48 घंटों के दौरान ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि मस्जिदों में प्रार्थना करने वालों में से अधिकांश की उम्र 60 से 70 वर्ष के बीच है. पाकिस्तान इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन द्वारा प्रमाणित पत्र में कहा गया है कि इसके नतीजे में वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अपनाए गए उपायों का उल्‍लंघन किया है.
'बढ़ती महामारी राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान की विफलता होगी.'


पत्र में कहा गया है कि रमजान का महीना शुरू होने को है. ऐसे में मस्जिदों में इबादत करने वालों की संख्या बढ़ेगी. साथ ही तरावीह की नमाज़ का ये सिलसिला लंबे समय तक जारी रहेगा, जिसमें वायरस फैलने की आशंका है, क्योंकि जिन मस्जिदों में फासले को बनाए रख कर नमाज पढ़ी जा रही है, वहां भी केवल 20 से 25 फीसदी नमाज पढ़ने वालों की नमाज पढ़ने की गुंजाइश है. ऐसे में हालात बिगड़ने की पूरी आशंका है. वहीं सीनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान स्थिति में अगर कोरोना वायरस पाकिस्तान में अगर महामारी बन गया और सरकार इस संबंध में नियंत्रण खो बैठी तो यह एक राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान की विफलता होगी.

वहीं पत्र में आगे चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि कुप्रबंधन के नतीजे में नमाज पढ़ने वालों, मस्जिद प्रशासन और प्रशासन के बीच झगड़े और विवाद का खतरा है, क्योंकि कराची में पहले भी इस तरह की
घटनाएं हुई हैं. पत्र में कहा गया है कि इन समस्‍याओं की वजह से हमारे मजहब और उलेमा की साख प्रभावित होने के साथ-साथ गैरजरूरी तौर पर लोगों की जान जाने की भी पूरी संभावना है.

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