अच्छी खबर! कुत्तों को दी जा रही है ट्रेनिंग, सूंघकर पता कर लेंगे कोरोना संक्रमण है या नहीं

अच्छी खबर! कुत्तों को दी जा रही है ट्रेनिंग, सूंघकर पता कर लेंगे कोरोना संक्रमण है या नहीं
सूंघकर कोरोना का पता लगा लेंगे कुत्ते

वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसे लोग जिनमें लक्षण नज़र नहीं आ रहे हैं उनके टेस्ट होना सबसे ज़रूरी है क्योंकि उनसे ही अनजाने में सबसे ज्यादा संक्रमण (Covid-19) के फैलने का खतरा रहता है. अब कोरोना संक्रमित व्यक्ति का पता लगाने के लिए कुत्तों की मदद ली जा रही है. इन्हें ऐसी ट्रेनिंग दी जा रही है जिससे ये सूंघ कर संक्रमण का पता लगा सकें.

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  • Last Updated: April 30, 2020, 11:48 AM IST
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वाशिंगटन. दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना संक्रमण (Coronavirus) की रोकथाम के लिए एक बात पर सहमत हैं कि वैक्सीन (Vaccine) नहीं बनाए जाने तक इस पर तभी काबू पाया जा सकता है जब ज्यादा से ज्यादा लोगों का टेस्ट किया जा सके. वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसे लोग जिनमें लक्षण नज़र नहीं आ रहे हैं उनके टेस्ट होना सबसे ज़रूरी है क्योंकि उनसे ही अनजाने में सबसे ज्यादा संक्रमण (Covid-19) के फैलने का खतरा रहता है. अब कोरोना संक्रमित व्यक्ति का पता लगाने के लिए कुत्तों की मदद ली जा रही है. इन्हें ऐसी ट्रेनिंग दी जा रही है जिससे ये सूंघ कर संक्रमण का पता लगा सकें.

वाशिंगटन पोस्ट में छपी एक खबर के मुताबिक आठ लेब्राडोर रिट्रीवर नस्ल के कुत्तों को कोरोना संक्रमण का सूंघ कर पता लगाने की ट्रेनिंग दी जा रही है. यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेन्सिल्वेनिया में एक रिसर्च टीम इन कुत्तों को सूंघ कर कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए तैयार कर रही है. रिसर्च टीम का कहना है कि अगर कुत्ते इस तरह वायरस का पता लगाने में सक्षम साबित होते हैं तो एयरपोर्ट, मार्केट और अस्पतालों में पेश आ रही काफी मुश्किलें आसान हो जाएंगी.

मलेरिया और कैंसर का पता लगा लेते हैं डॉग
बता दें कि कुत्तों का इस्तेमाल ड्रग्स और विस्फोटक पदार्थों का सूंघ कर पता लगाने के लिए काफी समय से होता आया है. इसके लावा कुत्ते मलेरिया, कैंसर और कई तरह के बैक्टीरिया का भी सूंघ कर पता लगाने में सक्षम हैं. पेन्सिल्वेनिया स्कूल ऑफ़ वेटनरी मेडिसन की डायरेक्टर सिंथिया एम में मुताबिक शोध में पता चला है कि हर वायरस की अपनी एक गंध होती है. सिंथिया के साथ प्रोजेक्ट पर का कर रहे ओट्टो बताते- हमें ये नहीं पता कि ये गंध कितनी मजबूत है लेकिन कुत्ते इस तरह काम भी नहीं करते. वे ऐसे मामलों में पता लगाते है कि सामान्य सैम्पल और मौजूद सैम्पल की गंध में कोई अंतर तो नहीं है, फर्क के इसी सिद्धांत के आधार पर कम से कम हर किसी का टेस्ट नहीं करना पड़ेगा.
लंदन में भी चल रहा है ऐसा प्रयोग


अमेरिका की ही तरह ब्रिटेन के लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसन में भी इसी तरह का एक प्रयोग जारी है. यहां की रिसर्च टीम ने बताया था कि कैसे कुत्ते मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति की पहचान करने में सक्षम होते हैं. इस स्कूल के डिजीज कंट्रोल विभाग के अध्यक्ष जॉन लोगन बताते हैं कि कुत्ते इस तरह की महामारी से निपटने में काफी अहम साबित हो सकते हैं, जितना जल्दी संक्रमण का पता चलेगा उतनी ही जल्दी काबू पाया जा सकेगा. उन्होंने बताया कि कुछ ही हफ़्तों में हम छह कुत्तों को कोरोना संक्रमण का सूंघ कर पता लगाने में ट्रेंड कर देंगे और हमारा लक्ष्य है कि ये छह देश के बड़े एयरपोर्ट्स पर जल्द से जल्द सेवाएं दे सकें.

कुत्तों की नाक के जैसी डिवाइस बनाएंगे
ओट्टो बताते हैं कि हम कुत्तों को ट्रेनिंग ज़रूर दे रहे हैं लेकिन ये समस्या को हल नहीं कर सकेगा. उन्होंने कहा कि हम कितने भी कुत्तों को ट्रेंड कर लें लेकिन अमेरिका के सभी एयरपोर्ट्स के लिए ही काफी नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि अगर ये साबित हो जाता है कि कुत्ते इस वायरस का सूंघ कर पता लगाने में सक्षम हैं तो हम कुत्ते की नाक जैसी इलेक्ट्रोनिक नोज बना सकते हैं, जो सेंसर के आधार पर काम करेगी. इसके जरिए हजारों लोगों की स्क्रीनिंग करना आसान हो जाएगा.

 

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