चीन पर बड़ी कार्रवाई करने वाले हैं ट्रंप, बीते 15 दिनों में लिए हैं ये 9 बड़े फैसले

चीन पर बड़ी कार्रवाई करने वाले हैं ट्रंप, बीते 15 दिनों में लिए हैं ये 9 बड़े फैसले
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (File Photo)

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) जल्द ही चीन के खिलाफ सख्त एक्शन लेने वाले हैं. ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी कायली मैकनेनी (Kayleigh McEnany) ने गुरूवार को कहा कि 'चीन पर होने वाली कार्रवाई के बारे में मैं राष्ट्रपति से पहले कुछ नहीं बता सकती लेकिन, जल्द ही आप इस बारे में सुनेंगे.

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वाशिंगटन. अमेरिका (US) और चीन (China) के बीच दूरियां बढ़ती ही जा रही हैं. ऐसा बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) जल्द ही चीन के खिलाफ सख्त एक्शन लेने वाले हैं. ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी कायली मैकनेनी (Kayleigh McEnany) ने गुरूवार को कहा, 'चीन पर होने वाली कार्रवाई के बारे में मैं राष्ट्रपति से पहले कुछ नहीं बता सकती लेकिन, जल्द ही आप इस बारे में सुनेंगे. आपको हमारे अगले कदम के बारे में इंतजार करना होगा.' बता दें कि बीते 15 दिनों में ट्रंप प्रशासन ने चीन के खिलाफ 9 अहम फैसले लिए हैं.

अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) ओ ब्रिन ने बुधवार को कहा था कि चीन ने हॉन्कॉन्ग में नया सुरक्षा कानून लाकर उसे हड़प लिया है. यह इस दशक की सबसे बड़ी घटना है. इसके अलावा चीन अब वहां के आजाद लोगों पर अपनी मर्जी थोप रहा है. इसके अलावा फेडरल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एफबीआई) के डायरेक्टर क्रिस्टोफर रे ने कहा है कि चीन अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा है. उन्होंने मंगलवार को वॉशिंगटन के हडसन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में यह बात कही थी.





उन्होंने कहा था कि चीन अमेरिका के कोरोना से जुड़े रिसर्च पर असर डालना चाहता है. वह दुनिया का सुपरपावर बनने की कोशिशों में जुटा है. वह अपने मंसूबों में कामयाब होने के लिए चीन मूल के अमेरिकी लोगों को भी परेशान कर रहा है. उन्होंने कहा था कि चीन अमेरिका में आर्थिक स्थिति की जासूसी, डाटा चोरी और गैर कानूनी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल है. बता दें कि पिछले 15 दिनों में अमेरिका की तरफ़ से आए ये तमाम बयान और फ़ैसलों का वास्ता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीन से है.
23 जून: सबसे पहले अमेरिका ने H-1B वीज़ा पर इस साल के अंत तक रोक लगाने का फ़ैसला किया, जिसका सबसे अधिक असर चीन और उसके बाद भारत के नागरिकों पर पड़ेगा.
27 जून: इसके अलावा अमेरिका ने जर्मनी से सैनिकों को कम कर इंडो- पैसिफ़िक क्षेत्र में तैनाती का फ़ैसला भी जून के अंत में किया और दो एयरक्राफ्ट कैरियर भी साउथ चाइना सी में तैनात कर दिए हैं.
30 जून: अमेरिका के फ़ेडरल कम्युनिकेशंस कमिशन (एफसीसी) ने 30 जून को हुवावे टेक्नोलॉजीज़ कंपनी और ज़ेडटीई कॉरपोरेशन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताते हुए बयान जारी किया है. 5G के क्षेत्र में इन कंपनियों का वर्चस्व पूरी दुनिया मानती है.
2 जुलाई: हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लागू करने के चीन के फ़ैसले के बाद भी अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने हांगकांग से संबंधित नए प्रतिबंधों को मंज़ूरी दी है. प्रतिनिधि सभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि चीन के अधिकारियों के साथ जो भी बैंक बिज़नेस करेंगे, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा.
4 जुलाई : अमेरिका ने एक बार फिर तीन जहाज़ दक्षिण चीन सागर इलाक़े में भेजे थे, जिस पर चीन अपना दावा करता आया है और चीन की सेना ड्रिल कर रही है. इससे चिढ़कर चीन ने यूएस नेवी को चतावनी दी जिसका उन्होंने मजाक बना दिया था.
5 जुलाई: भारत-चीन सीमा तनाव पर भी अमेरिका के विदेश मंत्री ने भारत का साथ देने की बात खुलकर कही. व्हाइट हाउस ने भी स्पष्ट कहा है कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में चीनी सेना भारत का साथ देगी.
7 जुलाई: भारत की तरह ही अमेरिका भी टिकटॉक पर बैन लगाने की बात कर रहा है. अमेरिका की तरह ऑस्ट्रेलिया ने भी ये बात कही है.
7 जुलाई : इसी दिन अमेरिका ने दूसरा फ़ैसला लिया था उन चीनी अधिकारियों पर वीज़ा प्रतिबंध लगाने का, जो पत्रकार, सैलानी, राजनयिक और दूसरे अमरीकी अधिकारियों को तिब्बत जाने से रोकने के लिए ज़िम्मेदार हैं. हालांकि अमेरिका ने ये स्पष्ट नहीं किया है कि ऐसे अधिकारियों की तादाद कितनी है.
7 जुलाई : मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से ख़ुद को बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. एक साल के अंदर ये प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. चीन के खिलाफ WHO के नरम रवैये के चलते ये फैसला लिया गया है.
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