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खुलासा! कोरोना का टीका बना रही जर्मन कंपनी को 7500 करोड़ में खरीदने वाले थे ट्रंप

News18Hindi
Updated: March 16, 2020, 11:31 AM IST
खुलासा! कोरोना का टीका बना रही जर्मन कंपनी को 7500 करोड़ में खरीदने वाले थे ट्रंप
जर्मन कंपनी के मुताबिक ट्रंप ने उनसे कहा कि कोरोना का टीका सिर्फ अमेरिका में ही बनना चाहिए.

जर्मन दवा कंपनी क्योर वेक ( CureVac) ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन ने उन्हें खरीदने की कोशिश की थी. कंपनी के मुताबिक न सिर्फ ट्रंप इस मुलाक़ात में शामिल रहे बल्कि उन्हें इस रिसर्च को अमेरिका शिफ्ट करने के लिए अच्छी-खासी रकम भी ऑफर की गई है.

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  • Last Updated: March 16, 2020, 11:31 AM IST
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वाशिंगटन. कोरोना वायरस (Coronavirus) पर भले ही चीन (China) ने काफी हद तक काबू पा लिया हो लेकिन एशिया और यूरोप पर इसका सबसे बुरा असर देखने को मिल रहा है. पूरी दुनिया में इससे अभी तक 6500 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं जबकि 1 लाख 70 हज़ार लोग इस संक्रमण की चपेट में हैं. एक ओर दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन बनाने के लिए दिन रात काम कर रहे हैं दूसरी तरफ दुनिया की बड़ी दवा कंपनियों को अब इसमें मुनाफा नज़र आने लगा है.

जर्मनी की एक मेडिकल फर्म है जो कि कोरोना वायरस का टीका बनाने के लिए अग्रणी मानी जा रही है. अब इसी फर्म ने एक खुलासा कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक जर्मन दवा कंपनी क्योर वेक ( CureVac) ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन ने उन्हें खरीदने की कोशिश की थी. कंपनी के मुताबिक न सिर्फ ट्रंप इस मुलाक़ात में शामिल रहे बल्कि उन्हें इस रिसर्च को अमेरिका शिफ्ट करने के लिए अच्छी-खासी रकम भी ऑफर की गई है.

क्या है मामला?
क्योर वेक की चीफ एक्जीक्यूटिव डेनियल मेनिशेला ने बताया कि खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कुछ देर के लिए इस मीटिंग में शामिल हुए थे. ट्रंप के अलावा इस मीटिंग में उपराष्ट्रपति माइक पेंस भी मौजूद थे जिन्हें व्हाइट हाउस कोरोना वायरस टास्क फ़ोर्स की जिम्मेदारी दी गई है. मेनिशेला ने कहा कि हमने उन्हें बताया था कि बस कुछ ही महीनों में हम कोरोना की वैक्सीन तैयार कर लेंगे. जर्मन अखबार Die Welt के मुताबिक ट्रंप ने वैक्सीन तक पहुंच के एक्सक्लूसिव राइट्स के लिए क्योर वेक को 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 7500 करोड़ रुपये देने का ऑफर दिया था. ट्रंप चाहते थे कि कोरोना की वैक्सीन सिर्फ और सिर्फ अमेरिका में ही बननी चाहिए.



 



बता दें कि जर्मनी में सभी को तब झटका लगा जब अमेरिकी मूल के डेनियल मेनिशेला ने अचानक कंपनी छोड़ने की घोषणा कर दी. हालांकि इसकी वजह किसी को नहीं बताई गई. हालांकि क्योर वेक ने एक स्टेटमेंट जारी कर मेनिशेला को कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए जारी खोज का 'स्टार' बताया और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं. क्योर वेक में अब मेनिशेला की जिम्मेदारी इंगमार होएर को दी गई है.

ट्रंप प्रशासन ने नहीं दिया आरोपों का जवाब
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रंप ऑफिस ने अभी तक इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया है. हालांकि अखबार ने सूत्रों के मुताबिक लिखा है कि सिर्फ क्योर वेक ही नहीं 25 ऐसी मेडिकल फर्म हैं जिनसे इस संबंध में बातचीत जारी है. अमेरिका बस चाहता है कि इसकी वैक्सीन खोज ली जाए और दुनिया को इस वायरस से राहत मिले. हालांकि इस खबर के सामने आने के बाद जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने अपने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई. सूत्रों के मुताबिक इसमें वैक्सीन को खरीदने के अमेरिकी प्रयासों को विफल करने पर चर्चा की गई है.

जर्मन मंत्री ने पूरी घटना की पुष्टि की
जर्मनी सरकार में मिनिस्टर होर्स्ट सीहॉफर ने रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में इस बात की पुष्टि कर दी कि ट्रंप प्रशासन ने वैक्सीन खरीदने की कोशिश की है. सीहॉफर ने कहा कि हमें इसकी जानकारी है और सरकार इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है. जर्मन सरकार ने इस बात की भी पुष्टि की है कि कंपनी को एक बड़ी रकम ऑफर की गई थी. मिली जानकारी के मुताबिक क्योर वेक का एक ऑफिस बॉस्टन, अमेरिका में भी है और इसमें कई अमेरिकी वैज्ञानिक काम भी कर रहे हैं.

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First published: March 16, 2020, 10:53 AM IST
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