डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को G-7 में वापस लेने का प्रस्ताव दिया, जर्मनी ने किया खारिज

डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को G-7 में वापस लेने का प्रस्ताव दिया, जर्मनी ने किया खारिज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को जी 7 में वापस लेन का प्रपोजल दिया

जर्मनी (Germany) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के रूस को सात (जी-7) सबसे उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के समूह में वापस आमंत्रित करने के एक प्रस्ताव को खारिज कर दिया है.

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बर्लिन. जर्मनी (Germany) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के रूस को सात (जी-7) सबसे उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के समूह में वापस आमंत्रित करने के एक प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. ये बातें जर्मनी के विदेश मंत्री हेको मास (Germany Foreign Minister Haiko Mass) ने सोमवार को दिए गए एक समाचार पत्र को साक्षात्कार में कही हैं. पिछले महीने ट्रंप ने जी-7 के फिर से विस्तार के लिए पिछले महीने रूस को इसमें शामिल करने की संभावना को उठाया. रूस को वर्ष 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र को कब्जा में कर लेने के के बाद जी-7 से निष्कासित कर दिया गया था.

जी-7 में रूस की वापसी की कोई संभावना नहीं: मास

जर्मन विदेश मंत्री हेको मास ने राईनिश पोस्ट समाचार पत्र को बताया कि जर्मनी को जी-7 में रूस की वापसी की कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है क्योंकि रूस की तरफ से क्रीमिया में संघर्ष को सुलझाने की कोई सार्थक कोशिश नहीं दिखाई देती और न ही पूर्वी यूक्रेन में कोई हलचल नजर आ रही है. मंत्री हेको मास ने यह भी कहा कि रूस आगे बढ़कर यूक्रेन संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान देकर फिर से जी—7 फॉर्मेट का हिस्सा बन कर बड़ा योगदान दे सकता है.



रूस अभी भी है जी-20 का हिस्सा
उन्होंने कहा कि रूस अभी भी जी-20 का हिस्सा है जिसमें अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं. जी-7 और जी-20 जानबूझकर संयोजित किये गए प्रारूप हैं. हमें अब G-11 या G-12 की आवश्यकता नहीं है. मास ने यह बात ट्रंप के न केवल रूस बल्कि अन्य देशों को जी-7 बैठकों में आमंत्रित करने के प्रस्ताव के संदर्भ में कही.

यूक्रेन के संघर्षों को हल करने की रूस की आवश्यकता: मास

मास ने रूस के साथ अपने संबंधों को कई क्षेत्रों में वर्तमान में कठिन कहते हुए वर्णित किया है. मास ने यह भी माना कि हम यह भी जानते हैं कि हमें सीरिया, लीबिया और यूक्रेन जैसे संघर्षों को हल करने के लिए रूस की आवश्यकता है और इसलिए हमें रूस के खिलाफ नहीं बल्कि रूस के साथ काम करना होगा.

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जर्मनी ने 1 जुलाई को छह महीने के लिए यूरोपीय संघ की अध्यक्षता संभाली थी. जर्मनी ने अब लीबिया के साथ-साथ यूक्रेन में भी संघर्ष में मध्यस्थता की भूमिका निभाई है. मास ने कहा कि इन संघर्षों के समाधान खोजने में रूस को भी अपना योगदान देना है, जो यूक्रेन में बहुत धीमा है.
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