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चीन-रूस के हैकर्स चुराते रहे संवेदनशील डेटा, ट्रंप प्रशासन को नहीं लगी खबर

ट्रंप प्रशासन को नहीं थी रूसी हैकिंग की खबर (फ़ाइल फोटो)
ट्रंप प्रशासन को नहीं थी रूसी हैकिंग की खबर (फ़ाइल फोटो)

US cyber hack: CNN की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बीते कई महीनों से रूस और चीन के हैकर्स अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और विभागों के संवेदनशील डेटा चुरा रहे थे लेकिन ट्रंप प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 18, 2020, 8:43 AM IST
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वाशिंगटन. अमेरिकी (US) ख़ुफ़िया एजेंसियों के संवेदनशील डेटा की चोरी के मामले में पता चला है कि ये कई महीनों से जारी था और डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन को इस हैकिंग (Cyber hack) की खबर ही नहीं थी. CNN के मुताबिक CIA, FBI और होमलैंड सिक्योरिटी समेत कई अन्य सुरक्षा एजेंसियों के डेटा में रूस (Russia) और चीन (China) के हैकर्स ने लगातार कई महीनों तक सेंध लगाई थी. हैकर्स लगातार डिपार्टमेंट ऑफ़ डिफेन्स, स्टेट डिपार्टमेंट, जस्टिस डिपार्टमेंट, डायरेक्टर ऑफ़ नेशनल इंटेलीजेंस जैसे अहम विभागों की फाइलें चोरी हुईं लेकिन CIA के साइबर सेल को इसकी कोई खबर ही नहीं थी.

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने इस डेटा लीक के मामलों को लेकर गुरूवार को अहम अधिकारियों के साथ बैठक की और स्थिति का जायजा लिया. फिलहाल ट्रंप सरकार ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस बड़े डेटा ब्रीच में कितना नुकसान पहुंचा है. बाइडन की ट्रांजिशन टीम ने भी इस पूरी घटना को लेकर गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं. हालांकि ट्रंप प्रशासन ने बयान जारी कर कहा है कि रूसी हैकर्स ने डेटा चुराने की कोशिश की थी लेकिन वे इसमें नाकाम रहे हैं. टीम बाइडन का मानना है कि इलेक्शन के बाद से बीते दो महीनों से सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक नहीं हो रही थी जिसके चलते फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

सुरक्षा चाक चौबंद करने में जुटीं अमेरिकी एजेंसियां
अमेरिका में साइबर हमले के खुलासे के बाद कई सरकारी एवं निजी कंपनियां अपने कम्प्यूटर नेटवर्क को सुरक्षित करने में जुट गई हैं. आशंका है कि गोपनीय जानकारी हासिल करने के लिए रूसी हैकरों ने साइबर घुसपैठ की कोशिश की. संभावित खतरे को देखते हुए अमेरिका के आंतरिक सुरक्षा विभाग की साइबर सुरक्षा इकाई ने सोमवार को सभी संघीय एजेंसियों को इससे प्रभावित नेटवर्क प्रबंधन सॉफ्टवेयर को हटाने का निर्देश दिया। हजारों कंपनियां इस दिशा में काम करने वाली हैं. जिस तरह से वित्त एवं वाणिज्य विभाग और संभवत: अन्य विभागों की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाई गई और विभागों की गोपनीय फाइलों तक पहुंच बनाई गई, उससे साइबर घुसपैठ के जरिए गोपनीय सूचना चुराने की आशंका है.
अमेरिका की पूर्व साइबर सुरक्षा अधिकारी रहीं और वर्तमान में सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में वरिष्ठ सलाहकार सुजैन स्पोल्डिंग ने कहा, 'यह ध्यान रखने वाली बात है कि रक्षा करने से आसान हमला करना होता है. हमें अब भी काफी कुछ करना बाकी है.' साइबर घुसपैठ करने वालों का पता लगाया जा रहा है. एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि मामले में रूसी हैकरों का हाथ होने की आशंका है. वाशिंगटन पोस्ट ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से कहा है कि हमला रूसी सरकार की खुफिया सेवा से जुड़े हैकरों ने किया है. घुसपैठ का पता उस वक्त चला जब साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक प्रमुख कंपनी फायर आई ने बताया कि उसकी साइबर सुरक्षा में सेंध लगाई गई है और कुछ दूसरे देशों एवं प्रमुख संगठनों की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाए जाने की आशंका जताई. हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि उसे किस पर संदेह है लेकिन साइबर हमले के तरीकों को देखकर विशेषज्ञों की राय है कि इसमें रूस का हाथ है.



चीन ने ब्रिटेन के चप्पे-चप्पे में तैनात किये हैं जासूस!
बता दें कि एक बड़े लीक में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के पूरी दुनिया में रह रहे और काम कर रहे करीब 20 लाख कथित सदस्यों के आधिकारिक रिकॉर्ड हैं जिनमें पार्टी में उनकी स्थिति, जन्मतिथि, राष्ट्रीय पहचान संख्या और जातियता आदि का ब्यौरा है. द ऑस्ट्रेलियन अखबार ने इस डाटा लीक को हासिल किया है जिसमें पता चलता है कि सीपीसी के कथित सदस्य किस तरह से दुनिया भर में रक्षा, बैंक और कोरोना वायरस का टीका बनाने वाली दवा कंपनियों में नियोजित हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, जिन कंपनियों में सीपीसी सदस्यों के कर्मचारी होने की पहचान की गई है उनमें बोइंग और फॉक्सवैगन, दवा कंपनियां फाइजर और एस्ट्राजेनेका और वित्तीय संस्थान एएनजेड तथा एचएसबीसी शामिल हैं. लीक में सीपीसी के 19.5 लाख सदस्यों का ब्यौरा है. इसे व्हिस्लब्लोअर (मुखबिरों) ने शंघाई के एक सर्वर से निकाला है.



'द ऑस्ट्रेलियन' की एक जांच से पता चलता है कि पूर्वी चीन के शंघाई के कम से कम दस वाणिज्य दूतावासों में सीपीसी के सदस्य वरिष्ठ राजनीतिक और सरकारी मामलों के विशेषज्ञ, लिपिक, आर्थिक सलाहकार और सहायक के तौर पर कार्यरत हैं. इसने करीब 79 हजार शाखाओं का खुलासा किया जिनमें कई कंपनियों, विश्वविद्यालयों और यहां तक कि सरकारी एजेंसियों के अंदर हैं. लीक में आरोप लगाया गया है कि सत्तारूढ़ सीपीसी ने शंघाई में ऑस्ट्रेलियाई, ब्रिटिश और अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों में घुसपैठ की है.
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