ट्रंप ने रद्द की तालिबान के साथ शांति वार्ता, कैंप डेविड में होनी थी सीक्रेट मीटिंग

पिछले दिनों राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा था, 'यदि तालिबान (Taliban) के साथ शांति समझौता हो जाता है तो अफगानिस्तान में अमेरिकी फौज की संख्या घटकर 8,600 हो जाएगी.

News18Hindi
Updated: September 8, 2019, 1:40 PM IST
ट्रंप ने रद्द की तालिबान के साथ शांति वार्ता, कैंप डेविड में होनी थी सीक्रेट मीटिंग
ट्रंप ने यह कदम काबुल में हुए कार बम धमाके के बाद उठाया है, जिसमें एक अमरीकी सैनिक सहित कुल 12 लोगों की मौत हो गई थी.
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Updated: September 8, 2019, 1:40 PM IST
अमेरिका (America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अफगानिस्तान और तालिबान नेताओं के साथ चल रही शांति वार्ता को रद्द करने का ऐलान किया है. ट्रंप ने यह कदम काबुल में हुए कार बम धमाके के बाद उठाया है, जिसमें एक अमरीकी सैनिक सहित कुल 12 लोगों की मौत हो गई थी. तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि तालिबान और अफगानिस्तान के नेताओं के साथ रविवार को 'कैम्प डेविड' में होने वाली गोपनीय बैठक रद्द कर दी गई है. इसके साथ ही पिछले एक साल से जारी शांति वार्ता के प्रयास विफल होते दिख रहे हैं.





ट्रंप ने कहा कि उन्हें रविवार को 'कैम्प डेविड' में दो पक्षों के साथ अलग-अलग वार्ता करनी थी, लेकिन तालिबान के लगातार हिंसात्मक कृत्यों ने उसे विश्वास ना करने योग्य बना दिया. ट्रंप ने ट्वीट किया, "लगभग सभी को बिना बताए, प्रमुख तालिबान नेतओं और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के साथ रविवार को 'कैम्प डेविड' में अलग-अलग गोपनीय बैठक करनी थी." उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से....उन्होंने काबुल में किए हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसमें हमारे बेहतरीन सैनिकों में से एक की जान चली गई थी और अन्य 11 लोग घायल हो गए थे." अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए इतने सारे लोगों की हत्या करने वाले लोग कैसे होंगे? ... उन्होंने इसे केवल बदतर बनाया है."




 हमले में एक अमेरिकी जवान की मौत हुई थी

काबुल में गुरुवार को हुए हमले में एक अमेरिकी जवान और अन्य एक कर्मी की जान चली गई थी. अमेरिकी राजदूत के साथ शांति समझौते पर बातचीत कर रहे तालिबान ने इसकी जिम्मेदारी ली थी. अमेरिकी वार्ताकार और तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच कतर में जारी शांति वार्ता के बावजूद काबुल में घातक हिंसक वारदातें जारी हैं. ट्रंप के इस खुलासे के बाद से ही वाशिंगटन में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. ट्रंप प्रशासन में अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि के रूप में काम कर चुकी लॉरेल मिलर ने कहा, "ट्रंप के 'कैम्प डेविड' में तालिबान नेताओं के साथ बातचीत करने की योजना बनाने की बात चौंकाने वाली है."



'कैम्प डेविड' बुलाने के फैसले की हो रही है आलोचना

वहीं डेमोक्रेट सांसद टॉम मालिनोवस्की ने अफगानिस्तान में अमेरिकी रणनीति पर स्पष्टता की मांग की और तालिबान नेताओं को 'कैम्प डेविड' बुलाने के फैसले को "विचित्र" करार दिया. मालिनोवस्की ने ट्वीट किया, "सबको पता है कि वे लगातार आतंकवादी हमलों को अंजाम दे रहे हैं. लेकिन मैं खुश हूं कि राष्ट्रपति ने इस तमाशे को बंद किया और उम्मीद करता हूं कि इस सही निर्णय पर टिके रहेंगे." ट्वीट के बाद से तालिबान के साथ कतर में करीब एक साल से जारी वार्ता पर विराम लगता दिखाई दे रहा है. गौरतलब है कि अमेरिकी राजनयिक जलमी खलीलजाद अभी तक तालिबान के साथ नौ दौर की वार्ता कर चुके हैं. पिछले दिनों राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, 'अगर तालिबान के साथ शांति समझौता हो जाता है तो अफगानिस्तान में अमेरिकी फौज की संख्या घटकर 8,600 हो जाएगी, साथ ही स्थाई मैजूदगी बनी रहेगी.'

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First published: September 8, 2019, 8:14 AM IST
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