क्या बराक ओबामा से बेहतर रही हैं डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियां?

डोनाल्ड ट्रंप और बराक ओबामा. (फोटो क्रेडिट-Reuters)
डोनाल्ड ट्रंप और बराक ओबामा. (फोटो क्रेडिट-Reuters)

ब्लूमबर्ग पर प्रकाशित एक लेख का कहना है कि अगर जो बाइडन (Joe Biden) राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो उन्हें बराक ओबामा (Barack Obama) की बजाए डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की आर्थिक नीतियां फॉलो करनी चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 31, 2020, 6:56 AM IST
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वाशिंगटन. अमेरिकी चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन (Joe Biden) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) की आर्थिक नीतियों की आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप ने अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं किया जबकि उन्हें विरासत में बेहतर अर्थव्यवस्था मिली थी. बाइडन का इशारा साफ था कि ट्रंप से पहले बराक ओबामा के शासनकाल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था बेहद अच्छी स्थिति में थी. लेकिन ब्लूमबर्ग पर प्रकाशित एक लेख का कहना है कि अगर बाइडन राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो उन्हें ओबामा की बजाए ट्रंप की आर्थिक नीतियां फॉलो करनी चाहिए.

लेख का कहना है कि बाइडन ने ट्रंप की आलोचना में भले ही कोरोना के मुश्किल वक्त को जोड़ दिया हो लेकिन महामारी फैलने के पहले ट्रंप की आर्थिक नीतियां आंकड़ों में ओबामा से कहीं बेहतर हैं.

घटी बेरोजगारी दर
लेख कहता है
कि ओबामा के शासनकाल के दौरान दिसंबर 2009 से दिसंबर 2016 के बीच बेरोजगारी का प्रतिशत कम हुआ था. 2009 में बेरोजगारी प्रतिशत 9.9 था तो 2016 में यह 4.7 ही रह गया. लेकिन अगर 2019 के दिसंबर महीने के आंकड़े देखें तो बेरोगजगारी दर 1.2 प्रतिशत और कम हुई. यानी यह 3.5 प्रतिशत हो गई.
लेकिन लेख कहता है कि ट्रंप के शासन में 1980 के दशक के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब 25 से 54 आयुवर्ग के नौकरीपेशा या नौकरी की तलाश करने वाले अमेरिकियों को लगातार ग्रोथ मिली. इस बदलाव ने लेबर मार्केट के चरित्र को बदल कर रख दिया.



आम अमेरिकी घरों की सालाना आय में हुआ बड़ा इजाफा
साल 2016 में आम अमेरिकी घरों की सालाना आय 62,898 डॉलर थी. जो 1999 के स्तर से महज 257 डॉलर ज्यादा थी. लेकिन अगले तीन सालों में यह बढ़कर 68,703 डॉलर हो गई. यानी तकरीबन 6 हजार अमेरकी डॉलर का बड़ा अंतर आया. भारतीय रुपए के अनुसार यह अंतर करीब साढे़ चार लाख का था. यही वजह है कि एक सर्वे के मुताबिक महामारी का संकट देखने के बावजूद वोटिंग करने वाले 56 प्रतिशत मतदाताओं ने माना कि उनकी जिंदगी बेहतर हुई है.

इसके पीछे ट्रंप प्रशासन की उस नीति को बड़ा जिम्मेदार माना जा रहा है जिसके तहत उसने बिजनेस घरानों पर टैक्स कम करने पर जोर दिया. विचार यह था कि टैक्स कम करने से बिजनेस घराने निवेश और तनख्वाह में ज्यादा पैसे खर्च करेंगे. इससे नौकरियां भी सृजित होंगी और लोगों की सैलरी भी बढ़ेगी. पारंपरिक तौर पर अमेरिका में दोनों ही पार्टियां खर्च बढ़ाने पर ज्यादा जोर देती रही हैं जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में सुधार हो और रोजगार बढ़े. ब्याज नीति पर अब तक सरकारें वैसा ध्यान नहीं देती थीं, जैसा ट्रंप ने दिया.

कृषि और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार बढ़ाने पर जोर
इसके अलावा ट्रंप ने मैन्यूफैक्चरिंग और कृषि क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए आक्रामक ढंग से काम किया. इसी वजह से ट्रंप कई देशों के साथ ट्रेड वॉर में भी उलझे. विशेष रूप से चीन के साथ. कई एक्सपर्ट्स का तब ये मानना था कि ये सबकुछ ट्रंप को नुकसान पहुंचा सकता है. लेख कहता है कि अगर लोगों को ट्रंप की नीतियों और ट्रेड वॉर के बीच चुनना होगा तो पसंद बेहद आसान है.
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