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दोहरा टीकाकरण लंबे समय तक रहने वाले कोविड के लक्षणों को आधा कर देता है

टीकाकरण से लंबे समय तक रहने वाले कोरोना लक्षणों कम हो जाते हैं.  (सांकेतिक फोटो )

टीकाकरण से लंबे समय तक रहने वाले कोरोना लक्षणों कम हो जाते हैं. (सांकेतिक फोटो )

कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus Infection) के खतरे को वैक्‍सीन (vaccine) ने कम किया है. टीकाकरण से संक्रमण होने की आशंका कम हो जाती है और संक्रमण हो भी जाए तो यह वायरस का असर कम कर देता है. गंभीर रूप से बीमार पड़ने या मौत होने की आशंका न के बराबर हो जाती है. यह तथ्‍य एक अध्‍ययन में सामने आए हैं.

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    लंदन. कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus Infection) के खतरे को वैक्‍सीन (vaccine) ने कम किया है. टीकाकरण से संक्रमण होने की आशंका कम हो जाती है और संक्रमण हो भी जाए तो यह वायरस का असर कम कर देता है. गंभीर रूप से बीमार पड़ने या मौत होने की आशंका न के बराबर हो जाती है. यह तथ्‍य एक अध्‍ययन में सामने आए हैं. इसके अनुसार टीकाकरण नहीं हुए 20 लोगों में से तकरीबन एक व्यक्ति ने कम से कम आठ हफ्तों तक कोविड-19 के लक्षणों वाले संक्रमण का सामना किया. वहीं, 50 लोगों में से एक व्यक्ति में ये लक्षण तीन महीने या अधिक समय तक रहे.

    एक अध्ययन में यह जानने कि कोशिश की गई कि क्या कोविड-19 के टीके लंबे समय तक रहने वाले संक्रमण के लक्षणों के विकसित होने के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं? इसका पता लगाने के लिए कोविड लक्षण अध्ययन में नियमित रूप से योगदान देने वाले 10 लाख से अधिक लोगों द्वारा मुहैया किये गये आंकड़ों पर गौर किया गया. अध्ययन में मदद करने के लिए लोग इस परियोजना में एक ऐप के जरिए अपने बारे में डेटा उपलब्ध कराते हैं. अध्ययन के आंकड़ों के नवीनतम विश्लेषण में टीके की करीब 20 लाख खुराक को शामिल किया गया. इसमें यह प्रदर्शित हुआ कि टीके ने कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा काफी कम किया, पूर्ण टीकाकरण करा चुके सिर्फ 0.2 प्रतिशत लोग, बाद में संक्रमित हुए.

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    टीकाकरण कराने के बाद भी यदि आप संक्रमित हो गये तो आपके गंभीर रूप से बीमार पड़ने या मौत होने की आशंका घट जाती है. दोहरा टीकाकरण कराने वाले लोगों में कोविड-19 के गंभीर लक्षण आने की आशंका 31 प्रतिशत कम हो जाती है और उनके अस्पताल में भर्ती होने की आशंका 73 प्रतिशत कम हो जाती है. टीकाकरण के बाद कोविड-19 से पीड़ित होने वालों में करीब पांच प्रतिशत में ऐसे लक्षण पाये गये जो चार हफ्तों से अधिक समय तक रहे. इसका मतलब है कि उनके लंबे समय तक संक्रमित रहने की आशंका घट कर आधी हो गई. लंबे समय तक कोविड से पीड़ित होने से बचने के लिए एक सर्वश्रेष्ठ तरीका यह है कि यथाशीघ्र पूर्ण टीकाकरण करा लिया जाए.

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    हालांकि, अध्ययन में यह पाया गया है कि सामाजिक सुविधाओं से वंचित इलाकों में रहने वाले कमजोर बूढ़े लोगों के टीकाकरण के बाद वायरस से संक्रमित होने और बीमार पड़ने की अधिक संभावना है, खासतौर पर यदि उन्होंने टीके की एकमात्र खुराक ली हो. इससे पता चलता है कि लोगों को टीकाकरण कराने और मास्क पहनने तथा सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करने जैसे जन स्वास्थ्य उपायों को प्राथमिकता देनी चाहिए.

    ब्रिटेन का टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होने पर यह पाया गया कि लंबे समय तक कोविड से पीड़ित रहे लोगों के टीकाकरण के बाद उनमें संक्रमण के लक्षण कम होने लगे. मरीज नीत लॉंगकोविड एसओएस समूह ने 2021 की शुरुआत में 800 कोविड मरीजों का सर्वे कर इसकी जांच करने का विकल्प चुना. इसके नतीजे जारी कर दिये गये हैं लेकिन अभी प्रकाशित नहीं किए गये हैं क्योंकि अब तक अन्य वैज्ञानिकों ने इसकी समीक्षा नहीं की है. हालांकि, ऐसा लगता है कि कोविड-19 का टीका लगवाने और लंबे समय तक रहने वाले कोविड के लक्षणों के कम होने में कुछ संबंध हैं, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि दोनों किस तरह से आपस में जुड़े हुए हैं. ऐसा हो सकता है कि प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया टीके से सक्रिय हुई हो और टीके का कोविड के लक्षणों पर सीधा प्रभाव रहा हो. हालांकि, इस बारे में और अधिक अनुसंधान करने की जरूरत है.

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