चीन को डबल झटका! इस देश ने रेल प्रोजेक्ट रद्द किया, नेपाल में भी खिलाफत शुरू

चीन को डबल झटका! इस देश ने रेल प्रोजेक्ट रद्द किया, नेपाल में भी खिलाफत शुरू
चीन को केन्या और नेपाल से दोहरा झटका लगा है.

चीन (China) की विस्तारवादी नीति को ध्यान में रखकर अब केन्या (Kenya) ने भी उसके अरबों डॉलर वाले एक रेलवे प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया है. केन्या की अदालत ने न सिर्फ इसे गैरकानूनी पाया है बल्कि चीन की कंपनियों को कड़ी फटकार भी लगाई है.

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नैरोबी/काठमांडू. अमेरिका (US), ऑस्ट्रेलिया (Australia) और भारत (India-China Rift) के निशाने पर आने के बाद चीन के बुरे दिन शुरू हो गए हैं. चीन (China) की विस्तारवादी नीति को ध्यान में रखकर अब केन्या (Kenya) ने भी उसके अरबों डॉलर वाले एक रेलवे प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया है. केन्या की अदालत ने न सिर्फ इसे गैरकानूनी पाया है बल्कि चीन की कंपनियों को कड़ी फटकार भी लगाई है. ये रेल प्रोजेक्ट चीन के लिए काफी अहम माना जा रहा था और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद इसकी बधाई दी थी. उधर नेपाल (Nepal) की विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने संसद के निचले सदन में चीन के अतिक्रमण को रेग्युलेट करने की मांग करते हुए प्रस्ताव दिया है.

गौरतलब है कि जिनपिंग ने चाइना अफ्रीका समिट के दौरान बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत केन्या के साथ एक स्टेंडर्ड गेज रेललाइन बिछाने का समझौता भी किया था. यहां तक कि जिनपिंग ने केन्या के राष्ट्रपति उहुरू केन्याटा को मोम्बासा पोर्ट तक से कार्गो सप्लाई किए जाने को लेकर बधाई भी दी थी. हालांकि अब जिनपिंग को केन्या की अदालत ने बड़ा झटका दे दिया है. केन्या के साथ चीन ने रेलवे लाइन को लेकर साल 2017 में समझौता किया था जिसके तहत चाइना रोड एंड ब्रिज कॉर्पोरेशन केन्या में अरबों डॉलर की लागत से महत्वकांक्षी प्रोजक्ट बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के माध्यम से रेलवे लाइन का विस्तार कर रहा था. केन्या ने इसके लिए एक्सिम बैंक ऑफ चाइना से 3.2 बिलियन डॉलर का कर्ज लिया है.





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चीनी कंपनियों ने किया घोटाला
केन्याई अपीलीय अदालत ने केन्या और चाइना रोड एंड ब्रिज कॉर्पोरेशन (CRBC) के बीच रेल अनुबंध को गैरकानूनी बताया है और इस सौदे में रिश्वत लिए-दिए जाने की बात भी सामने आई है. अदालत ने कहा है कि चीनी कंपनियों ने रसूख और पैसे का इस्तेमाल कर केन्या के कानूनों का उल्लंघन किया है. आरोप लगाया गया था कि रेलवे एक सार्वजनिक सम्पत्ति है जिसमें सभी परियोजनाओं के जुड़ी खरीद प्रक्रिया निष्पक्ष, प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए लेकिन, इस परियोजना में किसी भी बिड को जारी किए बिना एक चीनी कंपनी को सीधे तौर पर अनुबंध सौंप दिया गया.

नेपाल में भी चीन का विरोध शुरू
बता दें कि नेपाल के कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक देश के कुल 10 जगहों पर चीन ने कब्‍जा कर लिया है. इसके आलावा 33 हेक्टेयर नेपाली जमीन पर नदियों की धारा बदलकर चीन ने अपनी तरफ मोड़ ली है. अब चीन के अतिक्रमण को रेग्युलेट करने की मांग लेकर नेपाली कांग्रेस के सांसद देवेंद्र राज कंदेल, सत्य नारायण शर्मा खनाल और संजय कुमार गौतम ने संसद के निचले सदन में एक प्रस्ताव पेश किया है.



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चीनी सरकार तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) में सड़क नेटवर्क के लिए निर्माण कर रहा है जिससे नदियों और सहायक नदियों का रास्ता बदल गया है और वे नेपाल की तरफ बहने लगी हैं. इस प्रस्ताव के मुताबिक, 'चीन ने दोलका, हुमला, सिंधुपलचौक, संखूवसाभा, गोरखा और रसूवा जिलों में 64 हेक्टेयर की जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है.' साथ ही यह भी दावा किया गया है कि सीमा पर 35 खंभों को हटा दिया गया है जिससे उत्तरी गोरखा के रूई गांव चीन तिब्बत क्षेत्र में मिल गए हैं.
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