इस देश में अकाल, सूखा और बीमारी के चलते तीन लाख पशुओं की हो गई मौत

इस देश में अकाल, सूखा और बीमारी के चलते तीन लाख पशुओं की हो गई मौत
जिंबावे में पिछले साल तीन लाख पशुओं की मौत हो गई. (File Photo)

जिंबावे में पिछले साल अकाल (Draught) पड़ने और बीमारी के चलते करीब तीन लाख पशु मौत (three lakh cattle died) के मुंह में चले गए. यह जानकारी नवीनतम राष्ट्रीय रिपोर्ट में दी गई है.

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हरारे. जिंबावे में पिछले साल अकाल (Draught) पड़ने और बीमारी के चलते करीब तीन लाख पशु मौत (three lakh cattle died) के मुंह में चले गए. यह जानकारी नवीनतम राष्ट्रीय रिपोर्ट में दी गई है. फसल और पशु से संबंधित दूसरे चरण की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019-20 में करीब 66,000 पशु चारा और पानी की कमी (Water Scarcity) के चलते मारे गए. माटेबेलेलांड दक्षिण और माटेबेलेलांड उत्तर और मास्विंगो अकाल से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में से हैं. यहां वर्ष 2019 में 1,98000 पशुओं की मौत हो गई. मास्विंगो प्रांत में भी बहुत बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हुई है. मास्विंगो प्रांत में सबसे ज्यादा पशुओं की आबादी है. यहां करीब 10 लाख पशुओं की आबादी है. माटेबेलेलांड उत्तर प्रांत में पशुओं की मृत्यु दर सबसे ज्यादा रही है. यहां इस अवधि के दौरान पशुओं की मृत्यु दर 16 फीसदी के करीब रही.

वर्ष 2018-19 में हुई तीन लाख से ज्यादा पशुओं की मौत

अकाल और सूखे का आलम यह रहा कि वर्ष 2018—2019 में पशुओं की बहुत बड़ी आबादी काल के गाल में समा गई. यहां इस अवधि में पशुओं की आबादी 57 लाख से कम होकर सिर्फ 54 लाख रह गई है. रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 की तुलना में 2019 में पशुओं की संख्या में 57,74,525 से घटकर 54,43,770 रह गई है.



पशुपालक मजबूरी में पशुओं को बेच रहे हैं
रिपोर्ट में यह कहा गया है कि अकाल और सूखे की वजह से ना सिर्फ पशुओं की मौत हो रही है बल्कि उनकी उत्पादक में कमी आ रही है. सूखे और अकाल के चलते इन पशुओं में बीमारी बढ़ रही है और पशुपालक इन्हें मजबूरी में बूचड़खाने में बेचने को मजबूर होना पड़ता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिंबावे में पशुओं की मांस की अच्छी कीमत मिल जाती है. कुछ जिलों बेटब्रीज, शिरेडजी, माटाबो, मबरेंगवा, बूबी और उमगुजा में मांस की थोड़ी कम कीमत मिल पाती है.

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