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विदेशमंत्री एस. जयशंकर तेहरान के रास्ते मास्को रवाना, रूस संग तालिबान पर करेंगे चर्चा

विदेशमंत्री एस. जयशंकर तेहरान के रास्ते मास्को रवाना, रूस संग तालिबान पर करेंगे चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर (फाइल फोटो)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर (फाइल फोटो)

Foreign minister S Jaishankars visit to Moscow: अफगानिस्तान में बदलती परिस्थितियों के बीच मास्को तालिबान के उभार को लेकर चिंतित है. तालिबान का उभरना सेंट्रल एशिया में उथल पुथल पैदा कर देगा. इन्हीं परिस्थितियों को लेकर तेहरान भी चिंतित है.

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    Smनई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) बुधवार की शाम को अपनी कैबिनेट का विस्तार करेंगे, लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) का कार्यक्रम बदस्तूर जारी है. विदेश मंत्री तेहरान के रास्ते द्विपक्षीय दौरे पर मास्को (Moscow) के लिए रवाना हो गए हैं. माना जा रहा है कि तेहरान (Tehran) में विदेशमंत्री अफगानिस्तान (Afghanistan) में चल रही गतिविधियों पर बातचीत कर सकते हैं. दरअसल विदेशमंत्री का जहाज ईंधन भरवाने के लिए तेहरान में रूकेगा, इस दौरान ईरानी अधिकारियों के साथ विदेशमंत्री बैठक कर सकते हैं.

    तीन दिवसीय रूस यात्रा पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर मास्को के साथ कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा के साथ ही क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर चर्चा होने की संभावना है. विदेश मंत्रालय ने दौरे की घोषणा करते हुए कहा कि जयशंकर और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के बीच वार्ता में कोरोना वायरस महामारी से लड़ाई में सहयोग एवं अन्य मुद्दों पर विचार-विमर्श हो सकता है.

    इससे पहले सूत्रों ने बताया कि जयशंकर के दौरे का उद्देश्य वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारी करना और अफगानिस्तान में तेजी से उभरती परिस्थितियों पर चर्चा करना है. एमईए ने बयान जारी कर कहा, ‘‘बातचीत में कोविड-19 महामारी से लड़ाई के खिलाफ सहयोग तथा विभिन्न क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों सहित द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.’’

    विदेश मंत्री का मास्को दौरा अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए भारत और रूस के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. अमेरिकी और नाटो फौजों के निकलने के बाद से अफगानिस्तान पर सबकी निगाहें हैं, क्योंकि तालिबान अफगानिस्तान में लगातार अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है और काबुल में अशरफ गनी सरकार के खिलाफ तालिबान का अभियान भी जोर पकड़ रहा है. भारत ने अफगानिस्तान से ना तो अपने नागरिकों को वापस बुलाया है और ना ही अपने राजनयिकों को.

    अफगानिस्तान में बदलती परिस्थितियों के बीच मास्को तालिबान के उभार को लेकर चिंतित है. तालिबान का उभरना सेंट्रल एशिया में उथल पुथल पैदा कर देगा. इन्हीं परिस्थितियों को लेकर तेहरान भी चिंतित है, क्योंकि अफगान नागरिकों पर तालिबानी अत्याचार शुरू होते ही ईरान के जाहेदान प्रांत में सीमा पर अफगानी शरणार्थियों की बाढ़ लग जाएगी.

    पढ़ेंः भारत-रूस शिखर सम्मेलन: एस जयशंकर करेंगे रूस का दौरा, इन मुद्दों पर रहेगा फोकस

    सात जुलाई से नौ जुलाई के दौरे में जयशंकर उप प्रधानमंत्री यूरी बोरीसोव से मुलाकात करेंगे जो भारत-रूस वाणिज्य, अर्थ, वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी एवं सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर सरकारी आयोग में उनके समकक्ष हैं. वह अंतरराष्ट्रीय मामलों पर स्टेट डूमा कमिटी के अध्यक्ष लियोनाद स्लत्सकी से भी मुलाकात करेंगे.

    विदेश मंत्रालय ने बताया कि जयशंकर मॉस्को में प्रतिष्ठित प्रीमाकोव इंस्टीट्यूट ऑफ वर्ल्ड इकोनॉमी एंड इंटरनेशनल रिलेशंस में ‘बदलती दुनिया में भारत-रूस संबंध’ पर व्याख्यान भी देंगे. भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन पिछले वर्ष कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हो गया था.

    Tags: EAM S Jaishankar, India Russia bilateral relations, S Jaishankar in Tehran, S Jaishankar Russia tour, Taliban rise in Afghanistan

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