मिस्र, फ्रांस, जर्मनी और जॉर्डन ने इजरायल को धमकाया, कहा- कब्जा छोड़ दें

मिस्र, फ्रांस, जर्मनी और जॉर्डन ने इजरायल को धमकाया, कहा- कब्जा छोड़ दें
इजरायल को धमकी मिली है कि वह फिलीस्तीन के स्वामित्व वाले जमीन पर कब्जा छोड़ दें

मिस्र (Egypt) , फ्रांस (France) , जर्मनी और जॉर्डन ने मंगलवार को इजरायल को चेतावनी (Threatened to Isrel) दी कि वह फिलिस्तीन के स्वामित्व वाले इलाकों पर कब्जा छोड़ दे. इन सभी देशों ने कहा कि ऐसा करने पर उसे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा.

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बर्लिन. मिस्र (Egypt) , फ्रांस (France) , जर्मनी और जॉर्डन ने मंगलवार को इजरायल को चेतावनी (Threatened to Isrel) दी कि वह फिलिस्तीन के स्वामित्व वाले इलाकों पर कब्जा छोड़ दे. इन सभी देशों ने कहा कि ऐसा करने पर उसे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा. जर्मन विदेश मंत्रालय (Germany External Affairs) ने एक बयान में कहा कि इन सभी देशों, जिनमें इजरायल के दो प्रमुख भागीदार देश भी शामिल हैं, ने कहा कि इन सभी देशों के विदेश मंत्रियों ने इजरायल और फिलिस्तीन के बीच बातचीन को दुबारा शुरू करने के संबंध में चर्चा की. अन्य कुछ यूरोपीय देशों के साथ ये सभी देश वेस्ट बैंक के कब्जे वाले कुछ हिस्सों को भविष्य में इजरायल में जोड़ लेने की कल्पना की इजरायली योजना का विरोध करते हैं जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिकी प्रशासन द्वारा एक शांति समझौते के रूप में प्रचारित किया जा रहा है.

अमेरिका ने अभी तक नहीं दी इसकी मंजूरी

फिलिस्तीनी अथॉरिटी, जो भविष्य के फिलीस्तीनी राज्य के लिए वेस्ट बैंक इलाके को अपने में मिला लेने की इच्छा रखता है, ने इस कदम का विरोध किया है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने अभी तक इजरायल की इन योजनाओं को अपनी मंजूरी नहीं दी है. यूरोपीय और मध्य पूर्वी विदेश मंत्रियों ने अपने वीडियो सम्मेलन के बाद कहा कि हम इस बात की सहमति देते हैं कि 1967 में कब्जा किये फिलिस्तीनी क्षेत्रों को अपने देश में मिलाने की किसी भी हरकत को कानून अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जाएगा और शांति प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश समझा जाएगा.



दोनों देशों की सीमाओं में नहीं होगा कोई बदलाव
इस बयान में यह भी कहा गया कि 1967 में बनी दोनों देशों की सीमाओं में किसी तरह के बदलाव को मान्यता नहीं दी जाएगी. इस सब के बाद इजरायल के साथ संबंधों में कुछ परिवर्तन आने की भी संभावना है. इज़राइल ने इस विषय पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने एक अलग बयान में कहा कि उन्होंने सोमवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को बताया था कि वह ट्रम्प की "यथार्थवादी" शांति योजना के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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इजरायली सरकार के बयान में यह भी कहा गया है कि इज़राइल राष्ट्रपति ट्रम्प की शांति योजना के आधार पर वार्ता आयोजित करने के लिए तैयार है जो रचनात्मक और यथार्थवादी है.
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