जो दूतावास ‘मित्रवत’ नहीं, उन्हें रूसी नागरिकों की नियुक्ति पर प्रतिबंध झेलना पड़ सकता है : पुतिन

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो)

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो)

Russia: चेक गणराज्य ने भी 18 रूसी राजनयिकों को जासूस बताकर निष्कासित कर दिया था जिसके बाद रूस ने चेक गणराज्य के 20 राजनयिकों को वापस भेज दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 3:00 AM IST
  • Share this:
मॉस्को. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने एक फैसले पर हस्ताक्षर किए हैं जिससे रूस अपने प्रति मित्रवत नहीं समझे जाने वाले देशों के दूतावासों में नौकरी पर रखे जाने वाले रूसी नागरिकों की संख्या को सीमित कर सकता है या पूरी तरह प्रतिबंधित कर सकता है.

राष्ट्रपति कार्यालय ने शुक्रवार को इस कदम की घोषणा की और यह अमेरिका व यूरोपीय देशों से रूसी राजनयिकों के निष्कासन तथा बदले में रूस की तरफ से किए गए निष्कासन के दौर के बीच यह घटनाक्रम हुआ है.

देशों की सूची तैयार करने के लिए दिए गए निर्देश

आदेश में सरकार को निर्देश दिया गया है कि उन देशों की सूची तैयार की जाए जो मित्रवत न हों. इससे न सिर्फ उन देशों के दूतावास, बल्कि वाणिज्य कार्यालय और सरकारी संस्थानों के कार्यालय भी प्रभावित होंगे. अमेरिका ने पिछले हफ्ते 10 रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया था.


ये भी पढ़ेंः- शिवसेना ने कहा, सुप्रीम कोर्ट अगर रैलियों और कुंभ मेले पर रोक लगाता तो इतने खराब न होते कोरोना से हालात

चेक गणराज्य ने भी 18 रूसी राजनयिकों को जासूस बताकर निष्कासित कर दिया था जिसके बाद रूस ने चेक गणराज्य के 20 राजनयिकों को वापस भेज दिया था. इससे मॉस्को स्थित चेक गणराज्य के दूतावास में काम प्रभावित हुआ तथा इससे नाराज चेक अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को 63 और रूसी राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया जिससे दोनों देशों के दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या समान हो.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज