अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू हुई परमाणु वार्ता, राष्ट्रपति बाइडन ने कही ये बात

जो बाइडन के प्रशासन में ईरान के लिए विशेष दूत रॉब माल्ले के नेतृत्व में अमेरिका का एक प्रतिनिधिमंडल भी इस सप्ताह ऑस्ट्रिया की राजधानी में है.

फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, चीन और रूस अब भी ईरान के साथ इस समझौते के पक्षकार हैं, जिसे संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) के रूप में जाना जाता है.

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    बर्लिन. अमेरिका (America) को ईरान के साथ 2015 के परमाणु (Iran Nuclear) करार में वापस लाने के प्रयासों के तहत शुक्रवार को हुई बातचीत में वॉशिंगटन और तेहरान के मतभेद वाले जटिल मुद्दों पर तत्काल कोई प्रगति नहीं हुई है, लेकिन वार्ता में शामिल प्रतिनिधियों ने सकारात्मक माहौल की आशा व्यक्त करते हुए बातचीत जारी रखने का संकल्प जताया.

    अमेरिकी पाबंदियों को हटाने और ईरान को समझौते के पालन के लिए मनाने के तरीकों पर चर्चा के लिए मंगलवार से वियना में दो कार्यसमूह बैठक कर रहे हैं.

    ये देश है ईरान के समझौते के पक्षकार
    फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, चीन और रूस अब भी ईरान के साथ इस समझौते के पक्षकार हैं, जिसे संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) के रूप में जाना जाता है. यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब तीन दिन पहले रूस के प्रतिनिधि ने कहा था कि वे प्रतिबंधों को हटाने और परमाणु मुद्दों को लेकर विशेषज्ञ स्तर के समूहों को स्थापित करने के लिए सहमत हुए हैं.

    रूसी प्रतिनिधि मिखाइल ने कही ये बात
    रूसी प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि बैठक के प्रतिभागियों ने प्रारंभिक प्रगति पर संतोष जताया. उन्होंने कहा, ‘‘आयोग सकारात्मक माहौल को बनाये रखने के लिए अगले सप्ताह फिर बैठक करेगा.’’

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    यह बैठक अमेरिका की गैर-मौजूदगी में हुई जिसने एकपक्षीय तरीके से परमाणु करार से हाथ खींच लिया था. हालांकि जो बाइडन के प्रशासन में ईरान के लिए विशेष दूत रॉब माल्ले के नेतृत्व में अमेरिका का एक प्रतिनिधिमंडल भी इस सप्ताह ऑस्ट्रिया की राजधानी में है. अन्य वैश्विक महाशक्तियों के प्रतिनिधि अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष वार्ता के लिए प्रयासरत हैं.

    समझौते पर क्या बोले जो बाइडन
    अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कहा है कि वह अमेरिका को समझौते में वापस लाना चाहते हैं लेकिन ईरान को करार के उल्लंघनों को बंद कर देना चाहिए.

    3 साल पहले करार से अलग हुआ था अमेरिका
    करीब तीन साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ परमाणु करार से अमेरिका को अलग कर लिया था जिसके बाद से ही ईरान परमाणु समझौता अधर में लटका है. साल 2015 में हुए इस समझौते का मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था.

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