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यूरोपीय संसद में लाया गया CAA के खिलाफ प्रस्ताव, भारत ने कहा- ये हमारा आंतरिक मामला!

भाषा
Updated: January 26, 2020, 11:47 PM IST
यूरोपीय संसद में लाया गया CAA के खिलाफ प्रस्ताव, भारत ने कहा- ये हमारा आंतरिक मामला!
सीएए भारत में पिछले साल दिसंबर में लागू किया गया था जिसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

यूरोपीय संसद के प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘सीएए (CAA) भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक बदलाव करेगा. इससे नागरिकता विहीन लोगों के संबंध में बड़ा संकट विश्व में पैदा हो सकता है और यह बड़ी मानव पीड़ा का कारण बन सकता है.’’

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लंदन. यूरोपीय संसद (European Parliament) भारत के संशोधित नागरिकता कानून (Citizenship Act) के खिलाफ उसके कुछ सदस्यों द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर बहस और मतदान करेगी. संसद में इस सप्ताह की शुरुआत में यूरोपियन यूनाइटेड लेफ्ट (European United Left) नॉर्डिक ग्रीन लेफ्ट (Nordic Green Left) (जीयूई/एनजीएल) समूह ने प्रस्ताव पेश किया था जिस पर बुधवार को बहस होगी और इसके एक दिन बाद मतदान होगा.

वहीं भारत की ओर से इस पर कहा गया है कि नया नागरिकता कानून पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है. सूत्रों ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि सीएए पर यूरोपीय संघ के मसौदा प्रस्ताव के समर्थक और प्रायोजक तथ्यों के पूर्ण आकलन के लिए भारत के साथ वार्ता करेंगे.

भारतीय प्राधिकारियों से की गई ये अपील
इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के घोषणापत्र, मानव अधिकार (Human Rights) की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) के अनुच्छेद 15 (Article 15) के अलावा 2015 में हस्ताक्षरित किए गए भारत-यूरोपीय संघ सामरिक भागीदारी संयुक्त कार्य योजना और मानव अधिकारों पर यूरोपीय संघ-भारत विषयक संवाद का जिक्र किया गया है.

इसमें भारतीय प्राधिकारियों के अपील की गई है कि वे सीएए (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ ‘‘रचनात्मक वार्ता’’ करें और ‘‘भेदभावपूर्ण सीएए’’ को निरस्त करने की उनकी मांग पर विचार करें.

प्रस्ताव में कही गई ये बात
प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘सीएए भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक बदलाव करेगा. इससे नागरिकता विहीन लोगों के संबंध में बड़ा संकट विश्व में पैदा हो सकता है और यह बड़ी मानव पीड़ा का कारण बन सकता है.’’सीएए भारत में पिछले साल दिसंबर में लागू किया गया था जिसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

भारत सरकार का कहना है कि नया कानून किसी की नागरिकता नहीं छीनता है बल्कि इसे पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और उन्हें नागरिकता देने के लिए लाया गया है.

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First published: January 26, 2020, 10:17 PM IST
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