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इस देश के पहले शख्स को मिली इच्छामृत्यु, जानिए कैसे हुई मौत

इस देश के पहले शख्स को मिली इच्छामृत्यु, जानिए कैसे हुई मौत

सांकेतिक तस्वीर. (Shutterstock)

सांकेतिक तस्वीर. (Shutterstock)

Euthanasia gives to Colombian man: लैटिन अमेरिकी देश कोलंबिया में बेहद लाइलाज बीमारी से जूझ रहे एक व्यक्ति को इच्छा मृत्यु (euthanasia) की अनुमित मिलने के बाद शुक्रवार को शुक्रवार को इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला दिया गया. उन्हें न्यायालय ने इच्छा मृत्यु की अनुमित दे दी थी. इस तरह विक्टर एस्कोबार (Víctor Escobar ) कोलंबिया के पहले नागरिक बन गए, जिन्हें मौत के करीब न होने के बावजूद भी इच्छामृत्यु (euthanasia ) दे दी गई. न्यायालय से अनुमित मिलने के बाद कोलंबिया के कैली में रह रहे विक्टर एस्कोबार (Víctor Escobar ) ने बताया कि वह इस मौत से डर नहीं रहे हैं बल्कि चिर शांति का अनुभव कर रहे हैं.

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    नई दिल्ली. उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के मध्य में स्थित देश कोलंबिया में बेहद लाइलाज बीमारी से जूझ रहे एक व्यक्ति को इच्छा मृत्यु (euthanasia )की अनुमित मिलने के बाद शुक्रवार को हमेशा-हमेशा के लिए चैन की नींद सुला दिया गया. उन्हें न्यायालय ने इच्छा मृत्यु की अनुमित दे दी थी. इस तरह विक्टर एस्कोबार (Víctor Escobar ) कोलंबिया के पहले नागरिक बन गए, जिन्हें मौत के करीब न होने के बावजूद भी इच्छामृत्यु (euthanasia ) दे दी गई. न्यायालय से अनुमित मिलने के बाद कोलंबिया के कैली में रह रहे विक्टर एस्कोबार (Víctor Escobar ) ने बताया कि वह इस मौत से डर नहीं रहे हैं बल्कि चिर शांति का अनुभव कर रहे हैं.

    एस्कोबार ने कहा, मैं बहुत शांति महसूस कर रहा हूं. मेरे साथ जो होने वाला है मुझे उससे डर नहीं लगता है. विक्टर ने कहा कि मुझे डॉक्टरों ने बताया कि पहले मुझे धीरे-धीरे बेहोश किया जाएगा. यानी तो मेरे पास अलविदा कहने का बहुत वक्त होगा.

    मेरे जैसे कई लोगों को शांतिपूर्ण मौत का मौका मिलेगा
    विक्टर को इच्छामृत्यु का इंजेक्शन दिया गया जिसके बाद उसकी मौत हो गई. विक्टर ने कहा था, डॉक्टरों ने मुझसे कहा है कि मुझे दर्दरहित इंजेक्शन दिया जाएगा. इस प्रकार मुझे बहुत शांतिपूर्ण मौत मिलेगी. उन्होंने कहा कि मुझे भगवान पर भरोसा है कि सब कुछ ऐसा ही होगा. उनके वकील लुइस गिराल्डो ने शुक्रवार शाम को बताया कि प्रक्रिया पूरी हो गयी है और एस्कोबार की मौत हो चुकी है. कैली में अपने अपार्टमेंट में एस्कोबार में गुरुवार को कहा, एक दरवाजा खुल गया है ताकि मेरे जैसे मरीज को गरिमापूर्ण तरीके से मरने का अवसर मिले. मॉर्फिन जैसी दवा भी उनके दर्द को कम नहीं कर पा रही थी और उन्होंने बताया कि अन्य दवाएं भी उनके शरीर पर असर नहीं कर पा रही थीं.

    अदालत ने दिया था फैसला
    देश की एक अदालत ने जुलाई में फैसला देते हुए इच्छामृत्यु के नियमों में बदलाव किया था और उन लोगों के लिए भी इच्छामृत्यु के दरवाजे खोल दिए थे जो एक गंभीर और लाइलाज बीमारी के कारण गहन शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं चाहे उनकी मौत करीब न हो. हालांकि, कैथोलिक चर्च इस फैसले के विरोध में है.

    2008 से दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थे एस्कोबार
    एस्कोबार 2008 से बीमार थे. दो बार उन्हें स्ट्रोक लगा था. इससे उनके आधे शरीर को लकवा मार गया था. हालांकि बाद में कुछ अंगों ने काम करना शुरू कर दिया लेकिन उन्हें सांस लेने में रुकावट पैदा करने वाली फेफड़ों की बीमारी, हाइपरटेंशन, मधुमेह, गंभीर गठिया जैसे रोगों ने जकड़ लिया और एक दुर्लभ बीमारी भी हो गई. उन्हें कॉस्टोकॉन्ड्रल जंक्शन सिंड्रोम (costochondral junction syndrome) हो गया. इसमें पसलियां वक्ष की ऊपरी हड्डी से जुड़ जाती है जिससे दर्दनाक सूजन होती है.

    Tags: Euthanasia, International news

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