लाइव टीवी

हम भारत के खिलाफ नहीं, अफगानिस्तान को फिर से बसाने के लिए चाहिए उसकी मदद: तालिबान

News18Hindi
Updated: October 14, 2019, 8:49 PM IST
हम भारत के खिलाफ नहीं, अफगानिस्तान को फिर से बसाने के लिए चाहिए उसकी मदद: तालिबान
तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद सुहैल शाहीन की फाइल फोटो (Photo Credit- Twitter@suhailshaheen1)

तालिबान (Taliban) के प्रवक्ता मोहम्मद सुहैल शाहीन (Mohammad Suhail Shaheen) ने कहा यदि कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (American President Donald Trump) ने बातचीत को बंद नहीं किया होता, शांति समझौते पर अब तक हस्ताक्षर किए गए होते तो अफगानिस्तान (Afghanistan) में युद्धविराम होता.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2019, 8:49 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने वार्ता बंद करने के बाद अमेरिकी अधिकारियों से अफगानिस्तान (Afghanistan) में राजनीतिक समझौते के लिए तालिबान के दूतों के साथ फिर से बातचीत शुरू करने के तरीकों पर चर्चा की जा रही है. ऐसे में संगठन के प्रवक्ता मोहम्मद सुहैल शाहीन (Mohammad Suhail Shaheen) का कहना है कि इस मुद्दे का कोई सैन्य समाधान नहीं है.

सीएनएन न्यूज़18 के ज़क्का जैकब को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में शाहीन ने कहा कि भारत को अमेरिकी सैनिकों की वापसी को लेकर आशंकित होने की जरूरत नहीं है, अफगानिस्तान को अपने पुनर्निर्माण के लिए पड़ोसी राष्ट्र की मदद की आवश्यकता होगी.

अमेरिका ने किसी भी तरह की शांति वार्ता से इंकार कर दिया है. आप कितने आशान्वित हैं कि यह दोबारा शुरू होगी? अफगानिस्तान में शांति की वापसी आपको कितनी उम्मीद है?

हमें लगता है कि कोई सैन्य समाधान नहीं है और अमेरिकी इसे अच्छी तरह से जानते हैं कि क्या बेहतर है क्योंकि वह बिना किसी परिणाम के साथ पिछले 18 साल से सैनिक कार्रवाई कर रहे हैं. इसलिए मुझे लगता है कि इस मुद्दे का सबसे अच्छा विकल्प उसका शांतिपूर्ण समाधान है. अगर वह अफगान मुद्दे का हल करना चाहते हैं तो वह शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए सामने आएंगे. अन्यथा, वे पहले की तरह बिना किसी परिणाम के अपने कड़वे अनुभव दोहराते रहेंगे.



अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत बंद करने से पहले कहा था कि वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं कि तालिबान ने बातचीत की शक्ति को बढ़ाने के लिए एक अमेरिकी सैनिक को मार डाला था. क्या यह सच है? ट्रम्प के आरोप का आप कैसे जवाब देंगे?

अगर ऐसा है तो जैसा वह कहते हैं, तो वे हमारे खिलाफ हमले क्यों करते हैं? क्या वह हमले वार्ता में फायदा उठाने के लिए किए गए थे? उन्होंने हमले शुरू कर दिए थे और हम केवल इस पर प्रतिक्रिया दे रहे थे. यह बातचीत में दबाव बनाने के लिए नहीं था. हरगिज़ नहीं. ऐसा सिर्फ उनके हमारी जगहों, हमारे लोगों पर हमला करने और हमारे आदमियों और नागरिकों को मारने के बाद ही हमने जवाबी हमला किया था. वहीं, युद्धविराम नहीं हुआ. युद्धविराम शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद शुरू होना था, जो नहीं किया गया है. अगर आज समझौते पर हस्ताक्षर किए जाते हैं, तो तुरंत अमेरिकी पक्ष के साथ संघर्ष विराम शुरू हो जाएगा.
Loading...

दोहा शांति दौर में अशरफ गनी के नेतृत्व वाली अफगान सरकार की कोई भागीदारी नहीं थी. अब चुनाव के बाद, क्या आप मानते हैं कि उनकी स्थिति मजबूत हुई है?

हमने काबुल प्रशासन को शामिल नहीं किया क्योंकि हमने अफगान मुद्दे को दो भागों में विभाजित किया है. एक हिस्सा बाहरी है, जो अमेरिकियों को अफगानिस्तान से अपनी सेना की वापसी को लेकर बातचीत कर रहा है और यह साथ ही इस चिंता पर भी बात करता है कि अफगान की मिट्टी का इस्तेमाल अमेरिकियों और उनके सहयोगियों और अन्य देशों के खिलाफ नहीं किया जाएगा.



जब वह समाप्त हो जाता है, और शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाते हैं, तो हम अफगान मुद्दे के आंतरिक भाग की ओर मुड़ते हैं और सभी अफगान पक्षों से बात कर रहे हैं और इसमें काबुल प्रशासन - जो कि वर्तमान में हैं क्योंकि हम जानते हैं कि वे भी संघर्ष में एक पार्टी हैं. तो क्या यह प्रशासन, वर्तमान प्रशासन या भविष्य में कोई अन्य प्रशासन है, हम उन्हें संघर्ष के लिए एक पार्टी के रूप में मानते हैं और क्या हम अन्य अफगानों के साथ उनके साथ बातचीत करेंगे.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने UNGA में कहा कि केवल उनकी सरकार ही तालिबान को बातचीत की मेज पर ला सकती है? आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं? तालिबान पर पाकिस्तान का कितना प्रभाव है?

सबसे पहले, हम पहले से ही बातचीत में हैं, आप जानते हैं कि... पिछले एक साल से, हमने अमेरिकी वार्ता टीम के साथ लगभग नौ दौर की बातचीत की थी. हमने शांति समझौते पर चर्चा पूरी कर ली है और इसे केवल हस्ताक्षर करना है. अगर बातचीत को राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बंद नहीं किया जाता, तो इस पर हस्ताक्षर हो जाते और अफगानिस्तान में अब तक युद्धविराम होता. अमेरिकी अफगानिस्तान से वापस चले जाते और हमने उन्हें एक सुरक्षित मार्ग प्रदान किया होता. अफगानिस्तान में हमारा अपना राष्ट्रीय हित है. उसके आधार पर, हम अमेरिकियों के साथ अपनी बातचीत कर रहे हैं और हमें अन्य सभी देशों के साथ संबंध बनाए रखना है. ऐसा कुछ भी नहीं है जो हम किसी विशेष देश के लिए करते हैं या नहीं करते हैं.



आपने हाल ही में अपने कुछ लोगों के बदले में कुछ भारतीय कैदियों को रिहा किया है? ये कैसे हुआ? क्या आप हमें बता सकते हैं कि कौन लोग थे जो इस बातचीत में शामिल थे और आपको सफलता कैसे मिली?
हां हमारे एक प्रतिनिधिमंडल ने अपने पिछले दौरे में कैदियों को लेकर कई बैठकें कीं. हां इसे लेकर कई बार बातचीत हुई.

भारत में एक डर है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद, आप अपने लड़ाकों को भारत की ओर भेज देंगे. आप इसे कैसे देखते हैं? यह एक वास्तविक डर है?

पहला, यह वास्तविक भय नहीं है, यह वास्तविकता नहीं है. जब हम अपने देश के फिर से मुक्त होने के बाद अपने देश में बदलाव लाएंगे तो हमें अपने लोगों की जरूरत पड़ेगी. ऐसे में हम उन्हें भारत क्यों भेजेंगे. हमें अपने देश के पुनर्निर्माण और विकास में मदद करने के लिए अन्य देशों के साथ संबंध बनाने की आवश्यकता है. हमारे पास किसी अन्य देशों में हस्तक्षेप की कोई नीति नहीं है, बल्कि, हम हर वैश्विक साझेदार के साथ अच्छे संबंध रखना चाहते हैं. यही हमारी नीति है. धन्यवाद.

ये भी पढ़ें-
FATF में यूं ही पाकिस्तान की मदद नहीं कर रहे चीन-मलेशिया और तुर्की, ये है वजह

हाफिज सईद सहित 4 आतंकियों पर ठोस कार्रवाई करे पाक- अमेरिका

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दुनिया से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 14, 2019, 7:44 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...