विशेषज्ञों का दावा : सोशल डिस्‍टेंसिंग कोविड-19 के लिए बेहतर, दिल के लिए खतरनाक

विशेषज्ञों का दावा : सोशल डिस्‍टेंसिंग कोविड-19 के लिए बेहतर, दिल के लिए खतरनाक
एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि सोशल डिस्‍टेंसिंग दिल की सेहत के लिए खतरनाक है.

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अपने पसंदीदा लोगों के साथ रहने से न सिर्फ आप अच्छा महसूस करते हैं, बल्कि यह अच्छे स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है. विशेष रूप से दिल की सेहत के लिए यह अच्‍छा है. जबकि सोशल डिस्‍टेंसिंग के नतीजे में हृदय रोगों में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है.

  • Share this:
बर्लिन. जर्मनी (Germany) की एसेन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के चिकित्‍सा विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक अध्ययन (Study) में यह बात सामने आई है कि कोरोना वायरस (Corona Virus) वैश्विक महामारी को रोकने के लिए अमल में लाई जा रही सोशल डिस्‍टेंसिंग (Social Distancing) कोविड-19 (Covid-19) की रोकथाम के लिए तो बेहतर है, मगर दिल की सेहत के लिए खतरनाक है. चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अपने पसंदीदा लोगों के साथ रहने से न सिर्फ आप अच्छा महसूस करते हैं, बल्कि यह अच्छे स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है. विशेष रूप से दिल की सेहत के लिए यह अच्‍छा है. जबकि सोशल डिस्‍टेंसिंग के नतीजे में हृदय रोगों में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है. इसमें दिल से दिमाग तक होने वाले रक्त के प्रवाह में कमी और दिल का दौरा पड़ना भी शामिल है.

इससे यह साबित होता है कि हमारा दिल अपने पसंदीदा लोगों से मिलना चाहता है. 'हमारी वेब डॉट कॉम' की खबर के मुताबिक 13 वर्षों की अवधि में किए जाने वाले एक अध्ययन में 4,316 लोगों को शामिल किया गया, जो 60 वर्ष से कम उम्र के थे. अध्‍ययन की शुरुआत में इन सभी लोगों को दिल से संबंधित किसी तरह का कोई मर्ज नहीं था. इस अध्ययन में लोगों के अपनी पसंद के लोगों से मिलने-जुलने को अहम विषय बनाया गया. इसमें विवाहित लोग, परिवार या करीबी दोस्तों से मिलने-जुलने वाले किसी राजनीतिक या धार्मिक संगठन के लोगों और दफ्तर जाने वाले लोगों शामिल किया गया.

सामाजिक संबंध इंसान के जीवन में बहुत अहमियत रखते हैं
इसमें देखा गया कि किसी इंसान की सेहत पर उसके सामाजिक संबंधों का क्या प्रभाव पड़ता है. जर्मनी की एसेन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के डॉ. जेनी ग्रोएन वर्ल्ड के अनुसार "शोध से पता चला है कि सामाजिक संबंध मानव जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं. न केवल हृदय स्वास्थ्य, बल्कि मानव शरीर का रक्तचाप भी इससे प्रभावित होता है. कोलेस्ट्रॉल संतुलित रहता है और वजन भी नहीं बढ़ता. 13 साल और 4 महीने गुजरने के बाद अध्ययन के नतीजों के मुताबिक 339 लोग हृदय संबंधी रोगों के शिकार हुए. वहीं 530 लोगों की मौत भी हुई, जिसकी वजह स्ट्रोक या दिल का दौरा पड़ना था. चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक इन मौतों में दूसरी वजह की भी भूमिका हो सकती है, जिसमें सामाजिक संबंधों में कमी के कारण 44 फीसदी, अन्य बीमारियों के कारण 47 और आर्थिक रूप से मजबूत न होने पर दिल का दौरा या दिल का दौरा पड़ने के तीस फीसदी मामले सामने आते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक दूरी बनाए रखना अभी की जरूरत है, लेकिन हमें अपने जीवन में सामाजिक संबंधों के महत्व को जानना चाहिए, हम अपने संबंधों को जीवित रखने और इन्‍हें खुशहाल बनाने का कोई प्रयास नहीं करते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार इस वैश्विक महामारी में आधुनिक तकनीक का पूरा उपयोग करें और अपने सामाजिक संबंधों को बनाए रखें.



ये भी पढ़ें - पाकिस्‍तान में कोरोना के दौरान हुई शादी, दूल्हा गया जेल, बाराती क्‍वारंटाइन

               लॉकडाउन में भूख से मर रहे चूहों में आया बड़ा बदलाव, इंसानों पर कर रहे हमला

 
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading