फेसबुक ने दो साल के लिए US के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप का अकाउंट सस्पेंड किया

ट्रंंप का अकाउंट फेसबुक ने किया सस्‍पेंड. (File pic)

ट्रंंप का अकाउंट फेसबुक ने किया सस्‍पेंड. (File pic)

माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट सस्पेंड कर दिया था. ट्विटर और फेसबुक दोनों अमेरिकी कंपनियां हैं.

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वॉशिंगटन. सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट दो साल के लिए सस्पेंड कर दिया है. फेसबुक का ये फैसला 7 जनवरी 2021 से प्रभावी माना जाएगा. इससे पहले माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट सस्पेंड कर दिया था. ट्विटर और फेसबुक दोनों अमेरिकी कंपनियां हैं. फेसबुक ने वाशिंगटन में छह जनवरी को संसद परिसर में हुई हिंसा को भड़काने के लिये चार महीने पहले ट्रंप के खाते को निलंबित कर दिया था. ट्रंप को माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर भी स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया गया है.

इससे पहले खबर आई थी कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फिलहाल फेसबुक पर वापसी नहीं होगी. सोशल मीडिया नेटवर्क के अर्ध-स्वतंत्र पर्यवेक्षण बोर्ड ने फेसबुक पर उनके अकाउंट के निलंबन को बरकरार रखने के पक्ष में राय व्यक्त की. वाशिंगटन में छह जनवरी को संसद परिसर में हुई हिंसा को भड़काने के लिये चार महीने पहले उनके खाते को निलंबित कर दिया गया था.

निलंबन को बरकरार रखते हुए बोर्ड को हालांकि उस तरीके में कमी नजर आई जिसके तहत फेसबुक ने यह फैसला लिया था. बोर्ड ने कहा, “फेसबुक के लिये अनिश्चितकाल के लिये निलंबन का अनिश्चित और मानकविहीन जुर्माना लगाना उचित नहीं था.” बोर्ड ने कहा कि फेसबुक के पास सात जनवरी को लगाए गए “मनमाने जुर्माने” के खिलाफ फिर से जांच कर कोई और जुर्माना तय करने के लिये छह महीने का समय है, जिससे “उल्लंघन की गंभीरता और भविष्य में नुकसान की संभावना” परिलक्षित हो.

बोर्ड ने कहा कि नया जुर्माना निश्चित रूप से “स्पष्ट, अनिवार्य और आनुपातिक” तथा गंभीर उल्लंघनों को लेकर फेसबुक के नियमों के मुताबिक होना चाहिए. बोर्ड ने कहा कि फेसबुक अगर ट्रंप के खाते को बहाल करने का फैसला करता है तो कंपनी को आगे होने वाले उल्लंघनों का तत्काल पता लगाने में सक्षम होना चाहिए.
फेसबुक के फैसले पर अमेरिकी संसद में बहस

मई की शुरुआत में फेसबुक के फैसले पर अमेरिकी संसद में 1996 कम्युनिकेशंस डिसेंसी कानून में संशोधन को लेकर बहस तेज हो गई. इस कानून के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों को उनके पास उपलब्ध सामग्री को रखने और उन्हें आपत्तिजनक मानते हुए हटाने का कानूनी संरक्षण प्राप्त है. इस कानून के अनुच्छेद 230 में फेसबुक, टि्वटर और गूगल जैसी कंपनियों को काफी शक्तियां दी गई हैं. यह कानून तब लागू हुआ था जब सोशल मीडिया की यह शक्तिशाली कंपनियां बनी भी नहीं थीं.

सीनेट की वाणिज्य समिति में वरिष्ठ रिपब्लिकन सांसद रोजर विकर ने कहा, ‘‘लंबे वक्त से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उनकी राय में आपत्तिजनक माने वाले वाली सामग्री को हटाने के लिए अनुच्छेद 230 की आड़ लेते रहे हैं.’’ इस पर ट्रंप और राष्ट्रपति जो बाइडन ने सहमति जताई थी. ट्रंप ने राष्ट्रपति रहने के दौरान अनुच्छेद 230 को रद्द करने की मांग करते हुए इसे ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी अखंडता के लिए गंभीर खतरा’’ बताया था. बाइडन ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान कहा था कि इसे ‘‘फौरन रद्द’’ करना चाहिए. हालांकि राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा.



टि्वटर और गूगल के प्रवक्ता ने अनुच्छेद 230 पर विधायी कार्रवाई के आयाम पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था. फेसबुक ने अभी इस पर टिप्पणी नहीं की है.

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