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पाक को सता रहा डेटा चोरी का डर, लगा सकता है व्हाट्सएप, फेसबुक पर रोक

News18Hindi
Updated: November 21, 2019, 11:57 AM IST
पाक को सता रहा डेटा चोरी का डर, लगा सकता है व्हाट्सएप, फेसबुक पर रोक
व्हाट्सएप, फेसबुक पर सरकारी ऑफिस में पाक लगा सकता है रोक

पाकिस्तान (Pakistan) की नेशनल असेंबली की एक कमेटी ने प्रस्ताव दिया जिसमें सरकारी कार्यालयों में ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक और यूट्यूब जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है.

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  • Last Updated: November 21, 2019, 11:57 AM IST
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) सरकार डेटा चोरी के डर के कारण सरकारी ऑफिसों में सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों (Social Networking Sites) जैसे ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक और यूट्यूब पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है. राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी बोर्ड (NITB) इस पर काम कर रहा है, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की एक कमेटी ने प्रस्ताव दिया जिसमें सरकारी कार्यालयों में ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक और यूट्यूब जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है.

NITB ने कहा- डेटा लीक होने का है डर
NITB का कहना है कि वह व्हाट्सएप की तर्ज पर एक ऐसा नया सॉफ्टवेयर तैयार कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों के लिए किया जा सकता है. इनका कहना है कि ज्यादातर बात व्हाट्सएप के माध्यम से की जाती है जिससे महत्वपूर्ण डेटा लीक होने का जोखिम बढ़ जाता है. इस सॉफ्टवेयर की मदद से अधिकारी आसानी से एक-दूसरे से बातचीत कर पाएंगे और डेटा भी लीक नही होगा.

लोगों की आज़ादी पर उठ सकती है रोक

इस कमेटी के चेयरमैन अली खान (Ali Khan) ने इस मामले में सरकार से पूरा प्लान मांगा है, क्योंकि इस तरह का सिस्टम लागू करने से विपक्ष की ओर से अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात उठ सकती है. इस सॉफ्टवेयर के आने से सरकारी कर्मचारियों द्वारा काम के दौरान सोशल मीडिया के उपयोग पर पूर्णता प्रतिबंध लगने की संभावना है.

स्टोरेज डिवाइस पर भी लगेगी रोक
कमेटी ने कहा है कि फेसबुक और व्हाट्सएप के साथ ही अधिकारियों को स्टोरेज डिवाइस, यूएसबी को भी ऑफिस में लाने पर भी रोक लग जाएगी. NITB ने कहा कि फर्जी खबरों को रोकने के लिए एक अलग से रूपरेखा पर विचार किया जा रहा है, जिसके तहत सोशल मीडिया पर केवल प्रामाणिक सरकारी समाचार जारी किए जाएंगे. NITB की ओर से कहा गया है कि वह इस प्रस्ताव पर जून 2020 तक काम शुरू कर सकती है. सरकारी कार्यालयों को ई-ऑफिस में बदलने के बाद यह कानून बनाया जाएगा. इसकी लागत 1.4 अरब रुपये हो सकती है.
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समिति को बताया गया कि 29 मंत्रालयों को ई-कार्यालयों के विभिन्न स्तरों पर अपग्रेड किया गया है जबकि 13 अभी भी बाकी हैं.

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First published: November 21, 2019, 11:23 AM IST
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