मशहूर अमेरिकी बेले डांसर जिलियन, जिन्‍हें भा गया पाकिस्‍तान

मशहूर अमेरिकी बेले डांसर जिलियन, जिन्‍हें भा गया पाकिस्‍तान
जिलियन कहती हैं, 'मैं भी हैरान हूं. मेरी जिंदगी में यह सब कैसे हुआ.' फोटो साभार/बीबीसी

'मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा हो जाएगा. मेरा कभी भी पाकिस्‍तान में रहने का कोई इरादा नहीं था. मैं सिर्फ चलती रही और यहां पहुंच गई. मैं सिर्फ तीन महीने के लिए लाहौर आई थी. मैंने सोचा था कि मैं देखूंगी कि पाकिस्‍तान में क्‍या कुछ है. फिर मुझे यहां काम मिल गया. पाकिस्‍तानी खाना और यहां के लोग भी मुझे बहुत अच्‍छे लगे.'

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इस्‍लामाबाद. अमेरिका (Anmerica) को छोड़ कर पाकिस्‍तान (Pakistan) में लंबे अरसे से रहने वाली जीलियन रोड्स (Gillian Rhodes) कहती हैं, 'मैं अब पाकिस्‍तान में रहती हूं. मुझसे सब पहला सवाल यही करते हैं कि आप पाकिस्‍तान में क्‍यों रहती हैं. मैं कहती हूं मैं क्‍यों नहीं. असल में मैं भी हैरान हूं. कि मेरी जिंदगी में यह सब कैसे हुआ.' उन्‍होंने बीबीसी उर्दू को बताया, 'मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा हो जाएगा. मेरा कभी भी पाकिस्‍तान में रहने का कोई इरादा नहीं था. मैं सिर्फ चलती रही और यहां पहुंच गई. मैं सिर्फ तीन महीने के लिए लाहौर आई थी. मैंने सोचा था कि मैं देखूंगी कि पाकिस्‍तान में क्‍या कुछ है. फिर मुझे यहां काम मिल गया. पाकिस्‍तानी खाना और यहां के लोग भी मुझे बहुत अच्‍छे लगे.'

वह  बताती हैं, 'इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं यहां कुछ समय जरूर गुजारूंगी. यह कुछ समय अब दो साल हो गया है. जब मैं छोटी थी तब मैंने बेले डांस सीखा. मेरा ज्‍यादा ध्‍यान आज के डांस पर है. फिर जब मैंने पाकिस्‍तान का पारंपरिक डांस सीखा तो इसे अपने मुताबिक पेश करना शुरू किया. पाकिस्‍तान के बड़े शहर जैसे  इस्‍लामाबाद, लाहौर, कराची सियाहत के लिए बहुत आसान हैं. सफर के लिए ऊबर और करीम जैसी सर्विस हैं. यहां बेशुमार होटल हैं, जहां अमेरिकी खाना मिल जाता है. जब मैं पाकिस्‍तान आई तो मुझे अंदाजा हुआ कि अगर मुझे यहां लगातार रहना है तो यहां रहने की जगह और अपनी सवारी की जरूरत होगी.'

मैंने इसे नजरअंदाज करना सीख लिया है
'जब मैं यहां अपना वाहन चलाती हूं, तो अक्‍सर यहां लोग घूर कर देखते हैं. कभी बद्तमीजी भी करते हैं,



लेकिन ज्‍यादा नहीं. मैंने भी इसे नजरअंदाज करना सीख लिया है. मैं जहां भी जाती हूं वहां अलग ही नजर


आती हूं, क्‍योंकि वहां और दूसरी कोई 'गोरी' नहीं होती. मुझे जरूरत से ज्‍यादा लोगों की तवज्‍जो मिलती है. अब मैं इसकी आदी हो गई हूं. लोड शेडिंग और इसी तरह की अन्‍य समस्‍याएं तो मौजूद हैं मगर मेरी जिंदगी बहुत सादा है. मैंने इस साल गीजर खरीदा है. इससे पहले मेरे पास एक बाल्‍टी और बिजली से चलने वाली रॉड थी और यह काफी था, क्‍योंकि गरम पानी तो मिल रहा था. मगर जाहिर है कि अगर अमेरिकी यहां आकर अपनी शर्त रखेंगे कि उन्‍हें हर हाल में कमोड चाहिए. क्‍योंकि डब्‍ल्‍यूसी उन्‍हें मंजूर नहीं. तो जाहिर है कि पेरशानियां होंगी. मेरे परिवार को मेरे पाकिस्‍तान में रहने पर कोई एतराज नहीं है.'

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