इमरान के कहने पर पाकिस्तान के कानून मंत्री ने दिया इस्तीफ़ा, सुप्रीम कोर्ट में लड़ेंगे केस

इमरान के कहने पर पाकिस्तान के कानून मंत्री ने दिया इस्तीफ़ा, सुप्रीम कोर्ट में लड़ेंगे केस
भारतीय उच्चायोग के दोनों कर्मियों का आरोप- रॉड से पीटा गया

इमरान सरकार (Imran Khan) में कानून मंत्री फरोग़ नसीम (Farogh Naseem) ने न्यायाधीश काजी फाइज़ ईसा (Justice Isas reference case) के खिलाफ एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में सरकार का बचाव करने के लिये मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया.

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इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) के कानून मंत्री फरोग़ नसीम (Farogh Naseem) ने न्यायाधीश काजी फाइज़ ईसा (Justice Isas reference case) के खिलाफ एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में सरकार का बचाव करने के लिये मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया. कराची से ताल्लुक रखने वाले नसीम सरकार की ओर से अदालत में पेश होंगे. सरकार ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में ईसा के खिलाफ मामला दायर कर उन्हें अपनी पत्नी और बच्चों के मालिकाना हक वाली ऑफशोर कंपनियों में बारे में बात छिपाने के लिये बर्खास्त करने की अपील की थी. नसीम ने कहा कि मैंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के अनुरोध पर मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया. अब मैं मामले में सरकार का प्रतिनिधित्व करूंगा.

इस्तीफ़ा देने के बाद नसीम ने कहा- मेरी किसी से कोई निजी दुश्मनी नहीं है. मेरा ये कदम न तो किसी व्यक्ति, जज, बार काउंसिल या फिर किसी वकील से निजी दुश्मनी निकालने से संबंधित नहीं हैं. मैं सिर्फ कोर्ट में इसलिए पेश होना चाहता हूं क्योंकि मुझे इस जिम्मेदारी के लायक माना गया है. मिली जानकारी के मुताबिक इमरान खान ही चाहते थे कि नसीम ये केस लड़ें. हालांकि उनका इस्तीफा मंजूर किये जाने की अभी पुष्टि नहीं हुई है.

उधर पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सिंध सरकार की एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें उच्च न्यायालय के फैसले को स्थगित करने की मांग की गई थी. उच्च न्यायालय ने अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल के अपहरण और हत्या मामले में अल-कायदा के आतंकवादी अहमद उमर सईद शेख और उसके तीन सहयोगियों को दी गई सजा के फैसले को पलट दिया था. फैसले का पलटा जाना पत्रकार को न्याय दिलाने के अमेरिकी प्रयास को करारा झटका है. ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के दक्षिण एशिया के ब्यूरो प्रमुख 38 वर्षीय डैनियल पर्ल 2002 में पाकिस्तान में जब देश की शक्तिशाली खुफिया एजेंसी आईएसआई और अल-कायदा के बीच कथित संबंधों की खबर को लेकर कुछ तथ्य जुटा रहे थे, तभी उनका अपहरण कर लिया गया और उनका सिर कलम कर दिया गया था.



मौत की सजा को हाईकोर्ट ने पलटा



सिंध उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों की पीठ ने ब्रिटेन में जन्मे 46 वर्षीय अल-कायदा के आतंकवादी के मौत की सजा को दो अप्रैल को पलट दिया था. 2002 में पर्ल के अपहरण और हत्या मामले में उसे सजा सुनाई गई थी. वह पिछले 18 वर्षों से जेल में है. अदालत ने उसके तीन सहयोगियों -- फहाद नसीम, सलमान साकिब और शेख आदिल को भी बरी कर दिया था, जो मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। चारों दोषियों द्वारा 18 वर्ष पहले दायर अपील पर पीठ ने यह फैसला सुनाया. सिंध की सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी और दो मई को मारे गए पत्रकार के माता-पिता ने भी दोषियों को बरी करने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की. उच्चतम न्यायालय ने सिंध सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील फारूक एच. नाइक को आदेश दिया कि अदालत को विस्तृत ब्यौरा सौंपें ताकि अदालत आगे की सुनवाई कर सके. इसके बाद सुनवाई को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया.
प्रधान न्यायाधीश गुलजार अहमद की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को इस्लामाबाद में अपीलों पर सुनवाई की. उच्चतम न्यायालय ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद सिंध उच्च न्यायालय के फैसले को रोकने से इंकार कर दिया और सिंध सरकार से कहा कि मामले का पूरा रिकॉर्ड मुहैया कराए. इसने कहा कि याचिका में अप्रासंगिक धाराएं हैं. न्यायमूर्ति मंजूर मलिक ने कहा, 'सबसे पहले यह साबित किया जाना चाहिए कि डैनियल पर्ल का अपहरण हुआ था. साक्ष्य से स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जिसका अपहरण हुआ, वह डैनियल पर्ल था. सिंध सरकार का दावा है कि षड्यंत्र रावलपिंडी में रचा गया. रावलपिंडी में जो षड्यंत्र हुआ उसे भी साक्ष्यों से साबित किया जाना चाहिए.' उन्होंने कहा, 'हमें मामले का पूरा रिकॉर्ड मुहैया कराया जाना चाहिए. मैं सभी रिकॉर्ड को देखना चाहता हूं ताकि मैं सभी बिंदुओं को समझ सकूं.'

 

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