FATF से पाकिस्तान को मिलेगा झटका, हाफ़िज़-मसूद के चलते ग्रे लिस्ट में ही रहेगा बरकरार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान  (File Photo)
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (File Photo)

FATF on Pakistan: फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (FATF) आज पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में बने रहने पर अपना आखिरी फैसला सुना सकती है. हालांकि जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान दिए गए 6 लक्ष्यों को पूरा करने में नाकाम रहा है और वह ग्रे लिस्ट में ही बना रहेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 9:10 AM IST
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पेरिस. फ्रांस (France) के पेरिस में 21-23 अक्टूबर को फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (FATF) की तीन दिवसीय वर्चुअल बैठक शुरू हो गई है. इस बैठक में पाकिस्तान (Pakistan) के भविष्य को लेकर अहम फैसला होना है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इमरान सरकार (Imran Khan) की नाकामियों के चलते पाकिस्तान इस बार भी ग्रे लिस्ट में ही बना रहेगा. FATF ने पाकिस्तान को 6 महत्वपूर्ण काम करने का लक्ष्य दिया था, जिन्हें पूरा करने में वह नाकाम रहा है. वहीं खबर है कि आतंकी सरगना हाफिज सईद और मौलाना मसूद अजहर उसके ग्रे लिस्ट में बने रहने का सबसे बड़ा कारण बन सकते हैं.

FATF ने पाकिस्तान को टेरर फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी संगठनों की मदद को रोकने से जुड़े 27 लक्ष्य दिए थे, जिनमें से अंतिम 6 को इस मीटिंग से पहले पूरा करना था. हालांकि इसके उलट न तो पाकिस्तान ने आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद और मौलाना मसूद अजहर के खिलाफ कोई कार्रवाई की और न ही वॉचलिस्ट से गायब हुए 400 आतंकियों के बारे में कोई स्पष्टीकरण दिया है. FATF से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान की इस नाकामी के चलते वह ग्रे लिस्ट में ही बरकरार रहेगा और उसे जल्द ब्लैकलिस्ट किये जाने पर भी विचार किया जा सकता है. पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकी संगठनों जैश ए मोहम्मद, लश्कर ए तैयबा पर कार्रवाई करने के लिए कहा गया था, लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रहा है.

ग्रे लिस्ट में ही बना रहेगा पाकिस्तान
फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (एफएटीएफ) की डिजिटल पूर्ण सत्र में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक प्रतिबद्धताओं और मानकों को पूरा करने में इस्लामाबाद के प्रदर्शन की पूरी तरह समीक्षा की जाएगी. घटनाक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि एफएटीएफ ने पाकिस्तान को आतंकवाद के वित्तपोषण को पूरी तरह रोकने के लिए कुल 27 कार्ययोजनाएं पूरी करने की जिम्मेदारी दी थी, जिनमें से उसने अभी 21 को पूरा किया है और कुछ काम पूरे नहीं कर सका है. पाकिस्तान ने जिन कार्यों को पूरा नहीं किया है, उनमें मसूद अजहर, हाफिज सईद और जाकिर उर रहमान लखवी जैसे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है.





इसके अलावा एफएटीएफ ने इस बात का पुरजोर संज्ञान लिया है कि आतंकवाद रोधी कानून की अनुसूची पांच के तहत पाकिस्तान की 7,600 आतंकियों की मूल सूची से 4,000 से अधिक नाम अचानक से गायब हो गये. अधिकारी ने कहा कि इन हालात में लगभग तय है कि पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे सूची में बना रहेगा. इसके अलावा नामित करने वाले चार देश-अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी भी पाकिस्तान की सरजमीं से गतिविधियां चला रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की उसकी प्रतिबद्धता से संतुष्ट नहीं हैं. अजहर, सईद और लखवी भारत में अनेक आतंकी हमलों में संलिप्तता के लिए सर्वाधिक वांछित आतंकवादी हैं.
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