पाकिस्तान के पास ब्लैकलिस्ट होने से बचने का आखिरी रास्ता, जब्त करे हाफिज-मसूद की संपत्ति

पाकिस्तान को अगर अपने यहां पल रहे आतंकियों पर एक्शन लेना है तो इसके लिए पाकिस्तान के आधा दर्जन से ज्यादा विभागों के बीच आपसी सामंजस्य की जरूरत होगी.

News18Hindi
Updated: June 23, 2019, 11:12 PM IST
पाकिस्तान के पास ब्लैकलिस्ट होने से बचने का आखिरी रास्ता, जब्त करे हाफिज-मसूद की संपत्ति
पाकिस्तान के पास एफएटीएफ से ब्लैकलिस्ट होने से बचने का आखिरी मौका है (फाइल फोटो- हाफिज सईद)
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Updated: June 23, 2019, 11:12 PM IST
टेरर फंडिग पर निगरानी रखने वाली वैश्विक एजेंसी फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने आतंकियों के खिलाफ एक्शन न लेने को लेकर पाकिस्तान को फिर से लताड़ लगाई है. हालांकि पाकिस्तान को कुछ वक्त और मिल गया है. ऐसे में सितंबर तक पाकिस्तान को आतंक रोकने की दिशा में काम करना है. लेकिन पाकिस्तान को अगर ये एक्शन लेना है तो इसके लिए पाकिस्तान के आधा दर्जन से ज्यादा विभागों के बीच आपसी सामंजस्य की जरूरत होगी.

वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए भी स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान और सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन ऑफ पाकिस्तान इनसे जुड़े सभी विभागों में सहमति होना जरूरी है. हालांकि एक सच यह भी है कि पाकिस्तान सरकार पहले भी इन विभागों में सामंजस्य बनाने में जूझती रही है.

पाकिस्तान की कई एजेंसियों को मिलकर करना होगा काम
अगर पाकिस्तान सितंबर तक इस 27 सूत्रीय एक्शन प्लान को लागू नहीं कर पाया तो अक्टूबर में पाकिस्तान को FATF ब्लैकलिस्ट में भी डाल सकता है. ऐसे में पाकिस्तान पर इन आतंकियों पर कार्रवाई का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है.

लेकिन इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान की कानूनी एजेंसियों के अलावा, फेडरल इंवेस्टिगेशन और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट के अलावा कई एजेंसियों का सामने आना होगा ताकि आतंकियों के खिलाफ शिकायत, उनपर कार्रवाई, गिरफ्तारी और उनकी संपत्ति जब्त किए जाने तक की सारी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें.

मसूद अज़हर और हाफिज सईद पर कार्रवाई के अलावा और कोई रास्ता नहीं
संयुक्त राष्ट्र संघ के आतंकी घोषित किए जाने के बाद हाफिज सईद की संपत्ति जब्त करने के साथ ही उसके संगठनों जमात-उद-दावा, लश्कर-ए-तैयबा, फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन, मिल्ली मुस्लिम लीग के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करनी होगी. ऐसी ही कार्रवाई की जरूरत पाक के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और उसके प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ भी करनी होगी.
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वित्तीय अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए भी स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान और सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमिशन ऑफ पाकिस्तान और इनसे जुड़े सभी विभागों में सहमति का होना जरूरी है. पाकिस्तान अगर आतंक के मोर्चे पर काम नहीं करता तो आर्थिक मोर्चे पर पहले से ही जूझ रहे पाकिस्तान की स्थिति और ज्यादा खराब होने की संभावना है.

पहले से ही पाकिस्तान पर बहुत ज्यादा है आर्थिक दबाव
पाकिस्तान पर इस समय बहुत ज्यादा विदेशी कर्ज हो चुका है, जो दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है. डॉलर के मुकाबवे पाकिस्तानी रुपये की कीमत लगातार गिरती जा रही है. पाकिस्तान में मंहगाई की दर भी बहुत ऊपर जा चुकी है. इसके अलावा पाकिस्तान के लिए एफएटीएफ का एक्शन प्लान लागू करना किसी युद्ध से कम नहीं होगा.

बता दें कि FATF ने पाकिस्तान को आतंक के मोर्चे पर काम न कर पाने के चलते लताड़ लगाई है. एजेंसी ने पाकिस्तान ने यह भी कहा था कि टेरर फंडिंग और आतंकी ट्रेनिंग कैंपों के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए तो उसे ब्लैकलिस्ट करने की धमकी भी दी है. वैश्विक एजेंसी ने इसे आखिरी चेतावनी बताया है.

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First published: June 23, 2019, 10:46 PM IST
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