जापान के एयरस्पेस में 947 बार दूसरे देशों के लड़ाकू विमान घुसे, 675 बार चीन ने की ये हरकत

जापान के एयरस्पेस में 947 बार दूसरे देशों के लड़ाकू विमान घुसे, 675 बार चीन ने की ये हरकत
जापान एयरस्पेस में फाइटर प्लेन बार-बार घुस आता है. (कॉन्सेप्ट इमेज)

जापान एयरफोर्स (Japan Airforce) के अधिकारी एक साल से इस बात से कुछ ज्यादा ही परेशान हो गए हैं कि उनके एयरस्पेस में दूसरे देशों की लड़ाकू विमान (Fighter Plane) बार बार घुसपैठ कर रहे हैं.

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टोक्यो. जापान एयरफोर्स (Japan Airforce) के अधिकारी एक साल से इस बात से कुछ ज्यादा ही परेशान हो गए हैं कि उनके एयरस्पेस में दूसरे देशों की लड़ाकू विमान (Fighter Plane) बार बार घुसपैठ कर रहे हैं. जापान के एयरस्पेस (Japan Airspace) में औसतन हर रोज दो बार ऐसी घटनाएं घट रहीं हैं. जापान के फाइटर पायलट लेफ्टीनेंट कर्नल तकमिची शिरोटा के मुताबिक, पिछले एक दशक में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं. उनके मुताबिक ऐसी घटनाएं देश के दक्षिण पश्चिम एयर जोन में ज्यादा घटती हैं.

चीन ने 18 महीनों में 675 बार अंतरराष्ट्रीय नियम तोड़ा

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल 2019 से लेकर इस साल 31 मार्च के बीच ऐसा 947 बार हुआ है. इनमें से ज्यादातर चीन के फाइटर्स जेट ने किया. कई बार जापान के इन इलाकों में रूस के फाइटर जेट भी घुस आते हैं.जापान के एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स ने यहीं पर सबसे अधिक दूसरे प्लेन्स को इंटरसेप्ट किया है और उन्हें वापस खदेड़ा है. चीन के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, चीन के फाइटर जेट्स ने पिछले 18 महीने में 675 बार अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ा है. इसे देखते हुए जापानी एयरफोर्स को हमेशा अलर्ट रहना होता है.



जापान के इन आइलैंड पर है चीन की नजर
चीन की नजर जापान के दक्षिण पश्चिम इलाके में स्थित सेनकाकू या दायायू आइलैंड पर है. चीन और जापान के बीच में इसको लेकर विवाद है. वर्तमान समय में इन द्वीपों पर जापान का कब्जा है. हालांकि चीन भी इसे लेकर अपना दावा करता रहा है. यह द्वीप दक्षिण चीन सागर के पास है. इस आइलैंड के पास 12 मील का इंटरनेशनल एयर रूट है. हालांकि, चीन इसे नहीं मानता और अक्सर जापान के एयर स्पेस में घुस आता है.

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चीन का कहना है कि उसने सेनकाकू आइलैंड के पास कोई नियम नहीं तोड़ा है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान के मुताबिक, यह आइलैंड शुरुआत से चीन का हिस्सा रहा है. हम अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए अटल हैं. यहां पर हमारी सेना के प्लेन्स अपनी रूटीन उड़ाने भरते हैं. यह किसी भी तरह से इंटरनेशनल कानून का उल्लंघन नहीं है. इससे किसी देश को कोई खतरा नहीं है.
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