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FATF की बैठक जारी, पाकिस्तान के ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए ये 3 दोस्त बन सकते हैं मददगार

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Updated: October 14, 2019, 9:11 AM IST
FATF की बैठक जारी, पाकिस्तान के ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए ये 3 दोस्त बन सकते हैं मददगार
जून 2018 में पेरिस में हुई एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाल दिया गया था (News18 Creative)

पेरिस में फाइनैंशियल एक्शन टास्क फोर्स FATF की बैठक रविवार से पेरिस में शुरू हुई. पाकिस्तान (Pakistan) को अगर ग्रे लिस्ट होने से बचना है, तो उसे कमिटी के सामने साबित करना होगा कि उसने टेरर फंडिंग में लिप्त लोगों पर कार्रवाई की है. FATF की ये बैठक 18 अक्टूबर तक चलेगी. इसमें पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री हम्माद अजहर मौजूद रहेंगे.

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  • Last Updated: October 14, 2019, 9:11 AM IST
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पेरिस. पाकिस्तान (Pakistan) और इमरान खान (Imran Khan) के लिए सोमवार बहुत मुश्किल भरा होने वाला है. दरअसल, टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की एक अहम बैठक फ्रांस की राजधानी पेरिस में हो रही है. इसमें टेरर फंडिंग को रोकने में नाकाम पाकिस्तान पर बड़ा एक्शन लिया जाएगा. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अपने तीन दोस्तों की मदद से खुद को ब्लैकलिस्ट होने से बचा ले जाएगा. FATF ज्यादा से ज्यादा पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरकरार रख सकता है. बता दें कि पाकिस्तान पहले से ही ग्रे लिस्ट में है.

'The Mint' की रिपोर्ट के मुताबिक, FATF की एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) की रिपोर्ट में पाकिस्तान आतंकियों को फंडिंग (Terror Funding) और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) रोकने में नाकाम रहा है. ऐसे में आज की बैठक में पाकिस्तान पर तमाम तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. लेकिन, वर्तमान समय में चीन और मलेशिया FATF का नेतृत्व कर रहे हैं. तुर्की और सऊदी अरब भी इसके सदस्य देश हैं. चीन, मलेशिया और तुर्की पाकिस्तान को अपना दोस्त मानते हैं. ऐसे में ये तीनों देश पाकिस्तान के पक्ष में वोट करेंगे.

ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए 3 वोट जरूरी
FATF के नियम के मुताबिक, किसी देश को ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए अपने पक्ष में कम से कम तीन वोट चाहिए. ऐसे में अगर चीन, मलेशिया और तुर्की ये कह दें कि पाकिस्तान ग्रे से ब्लैक कैटेगरी में डाउनग्रेड नहीं किया जाएगा, तो FATF को उनका फैसला मानना होगा और पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट होने से बच जाएगा.

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इमरान खान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ


बता दें कि जून 2018 में पेरिस में हुई एफएटीएफ  की बैठक में पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाल दिया गया था और 27 पॉइंट का एक्शन प्लान देते हुए अक्टूबर 2019 तक का समय दिया था. इसमें मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग और नॉन-बैंकिंग कॉर्पोरेट व नॉन-कॉर्पोरेट सेक्टरों से रोकने के उपाय थे. FATF की इस बैठक में इस बात का निर्णय होगा कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में ही रखा जाए या फिर ब्लैकलिस्ट किया जाएगा.

रिपोर्ट के मुताबिक, वैसे ग्रे लिस्ट में होने पर भी पाकिस्तान को भारी नुकसान होगा. पाकिस्तान के विदेशमंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इसके पहले अप्रैल में कहा था, 'अगर पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा जाता है, तो कम से कम 10 अरब डॉलर का नुकसान होगा.' समझा जा सकता है कि अगर FATF पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में डाल देता है, तो उससे कितना नुकसान झेलना पड़ेगा.

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पाकिस्तान 27 पॉइंट्स में से सिर्फ 6 पर खरा उतरा
हालांकि, चीन पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट होने से बचाने में पूरी कोशिश करेगा. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि बैंकॉक मीटिंग को लेकर पाकिस्तान बेहद तनाव में है. इस मीटिंग में पाकिस्तान FATF से मिले 27 पॉइंट्स के एक्शन प्लान में से सिर्फ 6 पर ही खरा उतर पाया था. तकनीकी अनुपालन में भी पाकिस्तान 40 में से 10 पॉइंट्स में सही पाया गया था. वह 30 पॉइंट्स पर बिल्कुल जीरो था. ऐसे में पाकिस्तान पर ब्लैकलिस्ट होने का संकट और बढ़ गया है.

ग्रे लिस्ट होती है चेतावनी
मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामलों में टैक्स चोरी का स्वर्ग न होकर ऐसे देश, जो इस स्थिति का शिकार होते लगते हैं, उन्हें इस लिस्ट में रखा जाता है. यह एक तरह से चेतावनी होती है कि समय रहते ये देश काबू करें और वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने के कदम उठाएं. अगर ये देश ग्रे लिस्ट में आने के बाद भी सख़्त कदम नहीं उठाते हैं, तो इन पर ब्लैकलिस्ट होने का खतरा बढ़ता है.

जब किसी देश को एफएटीएफ ग्रे लिस्ट में रखता है तो उसके सामने कुछ चुनौतियां पेश आती हैं. आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और एडीबी जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और अन्य देशों से आर्थिक सहयोग, कर्ज़ मिलने में मुश्किल के साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कई तरह की अड़चनें और इंटरनेशनल बहिष्कार तक की नौबत का खतरा पैदा होता है, अगर कोई देश ग्रे लिस्ट में आता है.


पाकिस्तान के ब्लैक लिस्ट होने पर क्या होता?
एफएटीएफ दोनों लिस्ट में चिंताजनक हालात वाले देशों को शामिल करती है. इनमें से एक ब्लैकलिस्ट है. आतंकवाद को वित्तीय तौर पर बढ़ावा देने वाले देशों को इस लिस्ट में तब रखा जाता है, जब उनका असहयोगात्मक रवैया जारी रहता है. मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को लगातार काबू न कर पाने के चलते इन देशों को टैक्स चोरी का स्वर्ग भी करार दिया जाता है.

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First published: October 14, 2019, 8:08 AM IST
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