अमेरिका में मिला युवक के कोरोना वायरस से दोबारा संक्रमित होने का पहला केस, ज्यादा गंभीर

अमेरिका में मिला युवक के कोरोना वायरस से दोबारा संक्रमित होने का पहला केस, ज्यादा गंभीर
यूपी कोरोना संक्रमण में कोई कमी नहीं आ रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में शोधकर्ताओं ने पहली बार एक आदमी को दोबारा कोरोना संक्रमित (First Case of second time infected wit Covid-19) होने की पुष्टि की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 29, 2020, 12:20 PM IST
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वाशिंगटन. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में शोधकर्ताओं ने पहली बार एक आदमी को दोबारा कोरोना संक्रमित (First Case of second time infected wit Covid-19) होने की पुष्टि की है. हालांकि अभी तक बाहरी विशेषज्ञों ने इसकी समीक्षा नहीं की है. ऑनलाइन प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट में नेवादा के रेनो में रहने वाले 25 साल के एक व्यक्ति (Youth Infected With Coronavirus) का जिक्र किया गया है जिसे अप्रैल में हल्की बीमारी के लक्षणों के बाद किये कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव बताया गया था. मई के अंत में वह आदमी फिर से बीमार हो गया और इस बार उसमें अधिक खतरनाक कोविड​​-19 के लक्षण दिखाई दिए हैं.

दोबारा हो सकता है कोरोना वायरस का संक्रमण
यह अध्ययन दोबारा कोरोना होने की आशंका का एक स्पष्ट उदाहरण है. इसका अर्थ साफ है कि कोरोना से पुन: संक्रमण संभव है और जिसे हम पहले से जानते थे, क्योंकि प्रतिरक्षा (Immunity) कभी भी 100% नहीं होती है. यह बात कैलिफोर्निया के लाजोला में स्क्रिप्स रिसर्च में इम्यूनोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी के एक प्रोफेसर क्रिस्टियन एंडरसन ने एक ईमेल टिप्पणी में बताई है. इस तरह के पुनः संक्रमण के मामले पूरी दुनिया में उभर रहे हैं लेकिन टेस्टिंग की सटीकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

चार महीने बाद हुआ दोबारा संक्रमण
इस हफ्ते की शुरुआत में हांगकांग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 33 साल के एक व्यक्ति की सूचना दी जो अप्रैल में कोविड-19 के गंभीर लक्षणों से ग्रस्त था लेकिन तब वह उससे उबर गया था. चार महीने बाद कोरोना वायरस के एक गंभीर रूप से संक्रमित पाया गया है.



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नेवादा विश्वविद्यालय, रेनो स्कूल ऑफ मेडिसिन और नेवादा स्टेट पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी के शोधकर्ताओं ने कहा कि वे कोरोना की ज्यादा बेहतर टेस्टिंग के माध्यम से यह दिखाने में सक्षम हैं कि रेनो में रहने वाले 25 साल के उस संक्रमित व्यक्ति की हर अवस्था से जुड़ा वायरस अनुवांशिक रूप से अलग विकृतियों का प्रतिनिधित्व करता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोरोना से दोबारा संक्रमण होना दुर्लभ है लेकिन शोध के निष्कर्षों से पता चलता है वायरस से पहले हुए संक्रमण से हर किसी को पूरी तरह इम्युनिटी नहीं मिल सकती. प्रोफ़ेसर क्रिस्टियन एंडरसन ने कहा कि हम नहीं जानते कि कोरोना वायरस का पुनः संक्रमण किस तरह होगा और समय रहते इसमें क्या क्या बदलाव आएंगे.
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