क्वाड देशों की बैठक की तैयारियां जोरों पर, भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के खिलाफ बनेगी रणनीति

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी, ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री मारिज पायने और तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी, ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री मारिज पायने और तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

Quad Meeting: क्वाड की बात सबसे पहले साल 2007 में सामने आई थी, लेकिन इसके क्रियान्वयन में एक दशक का समय गुजर गया. नवंबर 2017 में मनीला में ईस्ट एशिया समिट और ASEAN समिट के दौरान चारों देशों ने एक बार फिर क्वाड्रिलेटरल के बारे में विचार किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 7, 2021, 10:55 AM IST
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(माहा सिद्दीकी)
नई दिल्ली. क्वाड नेशन्स (Quad Nations) के विदेश मंत्रियों की तीसरी बैठक को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है. इसी बीच समूह के सदस्य ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन (Scott Morrison) ने खुलासा किया है कि चारों देशों के नेता जल्द मुलाकात करने जा रहे हैं. हालांकि, अभी तक इस बैठक की तारीख का पता नहीं लग पाया है. अगर ऐसा होता है, तो यह क्वाड देशों की पहला शिखर सम्मेलन होगा. क्वाड देशों के इस समूह में भारत (India), अमेरिका (US), ऑस्ट्रेलिया (Australia) और जापान (Japan) शामिल हैं. खास बात है कि इस समूह को लेकर भारत हमेशा संकोच करता रहा है.

बैठक की खबर सामने आते ही एक बात साफ हो गई है कि मुलाकात को लेकर तैयारियां जारी हैं. मॉरिसन ने जानकारी दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से कुछ हफ्तों पहले मुलाकात के बाद इसी मुद्दे पर चर्चा की गई थी. उन्होंने कहा 'राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ने यह साफ कर दिया है कि इंडो-पेसिफिक में शांति के लिए बहुपक्षीय संगठनों पर दोबारा काम करना होगा.' ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा कि वे क्वाड नेताओं की मुलाकात का इंतजार कर रहे हैं.

क्या है क्वाड और भारत इसमें शामिल होने में संकोच क्यों करता है?
क्वाड की बात सबसे पहले साल 2007 में सामने आई थी, लेकिन इसके क्रियान्वयन में एक दशक का समय गुजर गया. नवंबर 2017 में मनीला में ईस्ट एशिया समिट और ASEAN समिट के दौरान चारों देशों ने एक बार फिर क्वाड्रिलेटरल के बारे में विचार किया. हालांकि, इस दौरान भी भारत समूह को लेकर संशय व्यक्त करता रहा. इसके बाद भारत 2019 में न्यूयॉर्क में मंत्री स्तर की बैठक के लिए तैयार हुआ.



ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि चीन ने क्वाड के विचार का विरोध किया था और चेतावनी दी थी कि समूह को किसी अन्य देश को निशाना नहीं बनाना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2018 में शांगरी ला वार्ता में इस मुद्दे पर बात की थी. उन्होंने कहा था 'भारत इंडो-पेसिफिक क्षेत्र को रणनीति और सीमित सदस्यों के क्लब के तौर पर नहीं देखता है. न ही इसे दबाव बनाने वाले समूह की तरह देखता है. साथ ही हम इसे किसी भी तरह से अन्य देश के खिलाफ निर्देशित नहीं मानते हैं.' हालांकि, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ तनाव के बीच भारत ने मंत्री स्तर की बैठक की मांग की थी.

इसके बाद चारों देशों के मंत्रियों ने अक्टूबर 2020 में टोक्यो में मुलाकात की थी. इस मुलाकात में तत्कालीन विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो भी पहुंचे थे और वे चीन के खिलाफ मुखर होकर बोलने वाले सबसे बड़ी मंत्री भी थे. साउथ कोरिया और ब्रिटेन जैसे देश भी अब इस समूह में शामिल होने की मांग कर रहे हैं. खास बात है कि हाल ही के कुछ समय में इंडो-पेसिफिक चीन के साथ जियोपॉलिटिक्स क्षेत्र के रूप में उभरा है.

(यह अनुवाद है. अंग्रेजी में पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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