मिस्र विद्रोह के दौरान 2011 में सत्‍ता से बेदखल कर दिए गए पूर्व राष्‍ट्रपति हुस्‍नी मुबारक का निधन

मिस्र पर तीन दशक तक शासन करने वाले पूर्व राष्‍ट्रपति हुस्‍नी मुबारक का मंगलवार को निधन हो गया.

हुस्‍नी मुबारक (Hosni Mubarak) ने करीब तीन दशक तक मिस्र (Egypt) पर शासन किया. उन्‍हें देश में चले 18 दिन के जबरदस्‍त विरोध प्रदर्शन (Protest) के बाद 11 फरवरी 2011 में राष्‍ट्रपति पद से इस्‍तीफा (Resign) देना पड़ा था. उनका 91 वर्ष की उम्र में मंगलवार को निधन (Dies) हो गया.

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    काहिरा. मिस्र पर तीन दशक तक शासन करने वाले पूर्व राष्‍ट्रपति हुस्‍नी मुबारक (Hosni Mubarak) का मंगलवार को 91 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्‍हें मध्‍य-पूर्व (Middle-East) में स्‍थायित्‍व का प्रमुख चेहरा माना जाता है. मिस्र (Egypt) के सरकारी चैनल के मुताबिक, हुस्‍नी मुबारक को देश में 18 दिनों तक चले विरोध प्रदर्शनों (Protest) के बाद 11 फरवरी, 2011 को इस्तीफा देना पड़ा था. उन्‍हें अरब में लोकतंत्र समर्थकों के प्रदर्शन (Pro-Democracy Protest) के कारण सत्‍ता छोड़नी पड़ी थी. इसके बाद वह अज्ञातवास में चले गए थे.

    इस्‍लामी आतंकवाद के खिलाफ मुखर थे हुस्‍नी मुबारक
    हुस्‍नी मुबारक के तीन दशक के शासनकाल में मिस्र के अमेरिका (US) से काफी अच्‍छे संबंध रहे थे. वह इस्‍लामी आतंकवाद (Islamic Terrorism) के खिलाफ काफी मुखर रहते थे. उनके शासनकाल में मिस्र इजरायल (Israel) के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने में सफल रहा था. लेकिन, काहिरा (Cairo) के सेंट्रल तहरीर स्‍क्‍वायर पर 18 दिन तक डटे रहे हजारों की संख्‍या में युवाओं ने 2011 में उन्‍हें सत्‍ता छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया.

    विद्रोह करने वाले युवाओं ने सोशल मीडिया का किया इस्‍तेमाल
    मिस्र के युवाओं ने ट्यूनीशिया की बगावत (Tunisian Revolt) से प्रेरणा लेकर हुस्‍नी मुबारक के खिलाफ विद्रोह कर दिया था. युवाओं ने आम लोगों को एकजुट करने के लिए सोशल मीडिया (Social Media) का जमकर इस्‍तेमाल किया. इसके बाद मिस्र में जमकर हिंसा हुई. आखिरकार लाखों की तादाद में प्रदर्शनकारी काहिरा के तहरीर स्‍क्‍वायर समेत शहर के कई इलाकों में इकट्ठे हो गए. इकट्ठा हुए लाखों लोग उसी शाम मुबारक के पैलेस (Palace) की ओर बढ़ने लगे. अब तक हुस्‍नी के साथ खड़ी रही सेना (Military) ने उन्‍हें 11 फरवरी 2011 को सत्‍ता से बेदखल कर दिया.

    कोर्ट ने हुस्‍नी मुबारक को सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा
    हुस्‍नी मुबारक के इस्‍तीफे के बाद सेना प्रमुख ने सत्‍ता पर कब्‍जा जमा लिया. उन्‍हें उम्‍मीद थी कि वह बिगड़े हुए हालात पर काबू पा लेंगे. हुस्‍नी मुबारक और उनके पूर्व सुरक्षा प्रमुख को जून 2012 में आंदोलन के दौरान 900 प्रदर्शनकारियों की हत्या का दोषी पाया गया था. उन्‍हें आजीवन कारावास (Life in Prison) की सजा सुनाई गई. इसके बाद उन्‍हें जेल में डाल दिया गया. बाद में उनकी सजा माफ कर दी गई और मार्च, 2017 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया. कोर्ट के इस फैसले पर मिस्र के बहुत से लोग चौंक गए. एक बार फिर हजारों लोगों ने सेंट्रल काहिरा में इकट्ठे होकर उन्‍हें माफ करने के कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया. बता दें कि हुस्नी मुबारक 14 अक्टूबर, 1981 को मिस्र के राष्ट्रपति बने थे.

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