लंदन: शादी के 22 साल बाद लिया तलाक, बिक गया सब कुछ, डेढ़ करोड़ का चढ़ा कर्ज

लंदन में शादी के 22 साल बाद लिया तलाक (फाइल फोटो)
लंदन में शादी के 22 साल बाद लिया तलाक (फाइल फोटो)

अदालत (Court) में कुल 13 सुनवाई हुई और पांच दिन ट्रायल भी चली. पति ने चार बार अपील कोर्ट और हाई कोर्ट में याचिका लगाई, लेकिन खारिज हो गई. हाई कोर्ट के जस्टिस रॉबर्ट पील ने कहा कि घर बेचने से 6.04 करोड़ रुपए मिले, लेकिन फीस के खर्च के बाद किराए के घर में रह रहे पति को कर्ज भी चुकाना है.

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लंदन. पति-पत्नी (Husband-Wife) का रिश्ता ऐसा है जिसमें प्यार से लेकर लड़ाई-झगड़ा सब कुछ होता है. लेकिन उस लड़ाई-झगड़े में भी एक प्यार छिपा होता है. वहीं, कई लोग ऐसे भी हैं जो इस रिश्ते को निभा नहीं पाते और नौबत तलाक तक पहुंच जाती है. लेकिन तलाक (Divorce) की राह भी कोई आसान नहीं होती. इसका एक उदाहरण हमारे सामने है जहां लंदन के जोड़े को तलाक लेना इतना भारी पड़ा की दोनों कर्जे में डूब गए और अंत में उनके पास कुछ भी नहीं बचा. यह जोड़ा पिछले 22 साल से एक खुशहाल जिंदगी जी रहा था. इनके तीन बच्चे भी हैं. लेकिन 22 साल में कुछ ऐसा हुआ कि नौबत तलाक तक आ पहुंची.

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक पति-पत्नी अदालत पहुंचे. संपत्ति का अधिक हिस्सा पाने के लिए दोनों तर्क देते रहे. मुकदमा दो साल खिंच गया. यहां तक की घर भी बिक गया. सारी संपत्ति वकीलों की फीस में खर्च हो गई. डेबिट कार्ड का कर्ज चुकना बाकी है. शुक्रवार को जब मुकदमा खत्म हुआ, तब दोनों के हाथ में महज 5-5 लाख रुपए नकद रह गए थे.

वकीलों की फीस 6 करोड़ रुपए
लंदन का रहने वाला 53 वर्षीय पति और 50 वर्षीय पत्नी केयर होम के मालिक थे. पांच बेडरूम का मकान था. बच्चों के साथ छुट्टियां मनाने जाते थे. उनकी बेहतर पढ़ाई के लिए खर्च भी कर रहे थे. दोनों के पास पर्सनल नंबर प्लेट वाली 14 लाख रुपए की मर्सिडीज कार थी. पति-पत्नी अलग हुए तो केयर होम बंद हो गया. पति बेरोजगार हो गया. उसने पाइप कंपनी में नौकरी की. उस पर डेबिट कार्ड का 1.17 करोड़ रुपए कर्ज हो गया. करीब 6 करोड़ रुपए वकीलों की फीस और कानूनी प्रक्रिया में ही खर्च हो गए.
जज ने न्यायिक खर्च पर भी सवाल उठाए


अदालत में कुल 13 सुनवाई हुई और पांच दिन ट्रायल भी चली. पति ने चार बार अपील कोर्ट और हाई कोर्ट में याचिका लगाई, लेकिन खारिज हो गई. हाई कोर्ट के जस्टिस रॉबर्ट पील ने कहा कि घर बेचने से 6.04 करोड़ रुपए मिले, लेकिन फीस के खर्च के बाद किराए के घर में रह रहे पति को कर्ज भी चुकाना है. जज ने यह भी कहा कि यह व्यक्त करना मुश्किल है कि यह संसाधनों की कितनी दुखद बर्बादी है. उन्होंने महंगे न्यायिक खर्च पर भी सवाल उठाए.

'आत्मघाती मुकदमा आज खत्म हुआ'
जस्टिस पील ने कहा कि इतने खर्च पर विश्वास करना मुश्किल है, लेकिन यही सच्चाई है. ऐसे फैसलों के और भी मामले हो सकते हैं, लेकिन इतना बुरा नहीं होगा. यह केस उन दंपती के लिए चेतावनी है, जो कानूनी दांवपेंच में संपत्ति खर्च कर देते हैं और उनके पास कुछ नहीं बचता है. आज यह आत्मघाती मुकदमा खत्म हुआ ह.। जज ने कहा, उन्होंने कमाई से अधिक खर्च किया और कर्जदार हो गए.

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