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फ्रांस में इस्लामिक कट्टरपंथ को रोकने वाले बिल का विरोध, 107 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार

प्रतीकात्मक फोटो: Ap

प्रतीकात्मक फोटो: Ap

France Police Arrested More than Hundred Protesters: फ्रांस की पुलिस ने 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया है. हिरासत में लिए गए इन सभी प्रदर्शनकारियों पर ये आरोप है कि वे प्रस्तावित सुरक्षा बिल (Proposed Safety Bill) के खिलाफ तनावपूर्ण और कभी कभी उग्र प्रदर्शन कर रहे थे.

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    पेरिस. फ्रांस की पुलिस (France Police) ने 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत (Protesters Arrested) में ले लिया है. हिरासत में लिए गए इन सभी प्रदर्शनकारियों पर ये आरोप है कि वे प्रस्तावित सुरक्षा बिल के खिलाफ तनावपूर्ण और कभी कभी उग्र प्रदर्शन (Violent Protest) कर रहे थे. पुलिस ने उन प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जिनपर पुलिस को यह संदेश था कि इन लोगों ने दुकानों और वाहनों में तोड़फोड़ की और पिछले प्रदर्शनों में अधिकारियों पर हमला किया था. फ्रांस में नए सुरक्षा बिल का बड़े पैमान पर विरोध शुरू हो गया है। बिल के खिलाफ हजारों लोग देश भर में हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं.

    पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर रात में वाटर कैनन का इस्तेमाल

    पेरिस पुलिस ने अभी तक कम से कम 107 की गिरफ्तारी की सूचना दी है. शनिवार को पेरिस में बारिश से भीगी सड़कों पर दंगा नियंत्रक अधिकारियों के साथ पुलिस वाहनों का काफिला इस प्रदर्शन के साथ साथ चल रहा था. पुलिस ने चारों तरफ से प्रदर्शनकारियों को घेर लिया था जिससे उस हिंसा को रोका जा सके जो पिछले कई प्रदर्शनों में भड़का दी गई थी. रात ढलते ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया.

    क्या है यह सुरक्षा कानून?

    प्रदर्शनकारी प्रस्तावित सुरक्षा विधेयक का विरोध कर रहे थे जिसे फ्रांस की संसद के निचले सदन ने 24 नवंबर को इस्लामवादी कट्टरपंथ का मुकाबला करने के उद्देश्य से पारित किया था. इस बिल के चलते पुलिस अधिकारियों को फिल्माना मुश्किल हो जाएगा. इस बिल में पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तस्वीरों को खींचना गैरकानूनी माना जाएगा.

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    इस बिल के अनुसार पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों की निजी विवरण युक्त तस्वीरों अथवा वीडियो का प्रसारण करने पर जुर्माना लगाया जाएगा. आरोपी को 45 हजार यूरो जुर्माने के अलावा एक साल कैद की सजा का भी प्रावधान किया गया है. इस बिल को मीडिया की स्वतंत्रता के लिए भी खतरा माना जा रहा है. बढ़ते हिंसक प्रदर्शनों के कारण सरकर को इस बिल को पुनर्लेखन के लिए मजबूर होना पड़ा.

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