सरकार के फैसले से नाराज एक्‍ट्रेस ने अवॉर्ड फंक्‍शन में स्टेज पर ही उतार दिए अपने सारे कपड़े

फ्रांस की एक्‍ट्रेस कोरेन मासिरो ने उतारे कपड़े. (Pic- AP)

फ्रांस की एक्‍ट्रेस कोरेन मासिरो ने उतारे कपड़े. (Pic- AP)

एक्‍ट्रेस कोरेन मासिरो (Corrine Masiero) ने सरकार के एक फैसले का विरोध करने के लिए अवॉर्ड फंक्‍शन में स्‍टेज पर ही अपने कपड़े उतार दिए. इस अवॉर्ड फंक्‍शन का नाम सीजर अवॉर्ड है, जिसे फ्रांस में ऑस्‍कर के बराबर समझा जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 14, 2021, 7:39 AM IST
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पेरिस. दुनिया भर में अपना विरोध जताने के लिए लोग तरह-तरह के रास्‍ते अपनाते हैं, लेकिन फ्रांस (France) की एक एक्‍ट्रेस ने विरोध का जो रास्‍ता अपनाया उससे सभी हैरान रह गए. फ्रांस की 57 साल की एक्‍ट्रेस कोरेन मासिरो (Corrine Masiero) ने सरकार के एक फैसले का विरोध करने के लिए अवॉर्ड फंक्‍शन में स्‍टेज पर ही अपने कपड़े उतार दिए. इस अवॉर्ड फंक्‍शन का नाम सीजर अवॉर्ड है. इसे फ्रांस में ऑस्‍कर के बराबर समझा जाता है.

दरअसल फ्रांस में कोविड 19 महामारी (COVID-19) के कारण सिनेमाघर और थिएटर को सरकार ने पिछले 3 महीने से बंद कर रखा है. ऐसे में कई आर्टिस्‍ट परेशान हैं. इस बीच फ्रांस में सोशल डिस्‍टेंसिंग के जरिये सीजर अवॉर्ड फंक्‍शन आयोजित किया गया. इसमें मासिरो को बेस्‍ट कॉस्‍ट्यूम का अवॉर्ड देने के लिए आमंत्रित किया गया था. इसके लिए मासिरो फंक्‍शन में पहुंचीं. वह गधे के कॉस्‍ट्यूम की पोशाक पहनकर स्‍टेज पर गईं. इसके नीचे उन्‍होंने खून से सनी एक ड्रेस पहनी थी.

अवॉर्ड फक्‍शन के दौरान ही उन्‍होंने स्‍टेज पर पहुंचने के बाद अपने सारे कपड़े उतार दिए. उनकी इस हरकत से वहां मौजूद सभी लोग चौंक गए. मासिरो ने अपने शरीर पर सरकार के लिए एक संदेश भी लिखा हुआ था. उन्‍होंने लिखा था, 'कल्‍चर नहीं तो फ्यूचर नहीं.'



उनकी पीठ पर एक संदेश फ्रांस के प्रधानमंत्री जिएन कास्‍टेक्‍स के लिए भी लिखा था. मासिरो की पीठ पर लिखा था, 'हमे हमारी कला लौटा दो, जिएन.' इसी फंक्‍शन में पहुंचे कुछ अन्‍य कलाकारों ने भी सरकार से ऐसी ही अपील की थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस में कोविड 19 महामारी के कारण पिछले साल दिसंबर से ही सिनेमाहॉल बंद हैं.

दिसंबर में भी फ्रांस के सैकड़ों कलाकारों, फिल्‍म डायरेक्‍टर्स, म्‍यूजिशियन समेत इंडस्‍ट्री से जुड़े अन्‍य लोगों ने पेरिस में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था. इन सभी की मांग थी कि जिस तरह से दूसरी जगहों पर से प्रतिबंध हटाए गए हैं, वैसे ही कला केंद्रों पर से भी प्रतिबंध हटाए जाए जाने चाहिए.
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