फ्रांस सरकार ने अफगानिस्तान से की अपील- हमारे नागरिकों के हत्यारों को ना करें रिहा

फ्रांस सरकार ने अफगानिस्तान से की अपील- हमारे नागरिकों के हत्यारों को ना करें रिहा
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी. (File Photo)

फ्रांसीसी सरकार (Frech Government) ने अफगानिस्तान सरकार से कहा है कि वह फ्रांसीसी नागरिकों की हत्या के दोषी तालिबानियों (Taliban) को मुक्त न करे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 16, 2020, 2:00 PM IST
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पेरिस. फ्रांस ने अफगानिस्तान (Afganistan) से कहा है कि वह फ्रांसीसी नागरिकों की हत्या (MurderOf French Government) के दोषी तालिबानियों (Taliban) को मुक्त न करे. विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि फ्रांस ने अफगान सरकार से कैदी रिहाई सौदे में फ्रांसीसी नागरिकों की हत्या के दोषी तालिबान लड़ाकों को शामिल नहीं करने के लिए कहा है. अफगानिस्तान में सरकार और तालिबानियों के बीच दो दशकों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता की प्रक्रिया चल रही है.

400 तालिबानी को मुक्त करेगी अफगानिस्तान सरकार

तालिबान ने शांति वार्ता में शामिल होने की शर्त के रूप में 5000 कैदियों की रिहाई की मांग की थी. 400 तलिबानियों के आखिरी बैच को मुक्त करने की प्रक्रिया में जिन कैदियों को छोड़ा जा रहा है उनमें से अधिकतर तालिबान के सदस्य रहे हैं और इन कैदियों पर अफगानी नागरिकों और विदेशियों पर बड़े हमले करने का आरोप है. इन्हीं में से फ्रांसीसी नागरिकों की हत्या के दोषी तालिबान लड़ाके भी शामिल हैं.



फ्रांसीसी नागरिकों के हत्यारों को भी किया जा रहा है रिहा
फ़्रांस के विदेश मंत्रालय ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि अफगानिस्तान में फ्रांसीसी नागरिकों की हत्या के दोषी कई आतंकवादियों को रिहा किया जा रहा है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि फ्रांसीसी सरकार फ्रांसीसी नागरिकों विशेष रूप से सैनिकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओंकी हत्या के दोषी लोगों को छोड़े जाने का कड़ा विरोध करती है. हमने तुरंत अफगान अधिकारियों से इन आतंकवादियों की रिहाई के लिए आगे कदम नहीं बढ़ने के लिए कहा है.

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जिन कैदियों की रिहाई पर असहमति है उनमें अफगानिस्तान के कुछ सबसे खूनी हमलों के आरोपी भी शामिल हैं. अफगान सरकार ने पहले ही महीनों की शांति वार्ता में देरी की है क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका ने फरवरी में तालिबान के साथ हुए एक समझौते के तहत सैनिकों को वापस बुला लिया है. तालिबान कैदियों के अंतिम जत्थे को छुड़ाने में देरी होने के कारण अफगानिस्तान में नागरिकों और अधिकार समूहों में नाराजगी फैल गई थी.
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