ईरान स्टील सेक्टर पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद मुश्किल में भारतीय उद्योगपति

(फाइल फोटो)
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खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय उद्योगपति मुश्‍किल में, भारत पर नहीं पड़ेगा सीधा असर

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ईरान के स्टील और खनन सेक्टर पर अमेरिका की ओर से हाल में लगाए गए प्रतिबंध अब भारतीय उद्योगपतियों पर भी भारी पड़ते नजर आ रहे हैं. ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मोहित सिंघल के अनुसार खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय उद्योगपति इस निर्णय से खासे प्रभावित होंगे. गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार को ही ईरान के स्टील और खनन सेक्टर के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की थी. यह प्रतिबंध तेहरान की परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइल पर पहुंच बना कर खाड़ी देशों में अपना वर्चस्व बनाने से रोकने के लिए लगाए गए हैं.

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भारत को नहीं होगा सीधा असर
टीपीसीआई के अनुसार इन प्रतिबंधों का सीधे भारत पर तो कोई असर नहीं पड़ेगा. इसका मुख्य कारण है कि भारत का स्टील आयात खाड़ी देशों से न के बराबर है. लेकिन खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय उद्योगपतियों पर इसका प्रभाव जरूर पड़ेगा जो स्टील, बिलेट्स और छड़ेां के निर्यात से जुड़े हैं. यह जरूर है कि अमेरिका की इस घोषणा के बाद चाबहार पोर्ट में भारत के निवेशकों को निराशा जरूर होगी. साथ ही स्टील इंडस्ट्री से जुड़े अन्य भारतीय व्यवसायी भी इससे परेशान होंगे. गौरतलब है कि 2017-18 में भारत का ईरान से लौह, स्टील, मशीनरी, मैकेनिकल उपकरण, न्यूक्लियर रिएक्टर, बॉयलर और इलेक्‍ट्रिकल उपकरणों का आयात करीब 1370 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा है.

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अब निजी व्यवसाइयों और छोटे देशों का करना पड़ेगा रुख
अमेरिका के इस प्रतिबंध के बाद ईरान के स्टील उद्योगपतियों को अब निजी व्यवसाइयों और छोटे देशों की तरफ देखना होगा. इसका मुख्य कारण है कि भारत और चीन जैसे बड़े देश स्टील का आयात पहले ही न के बराबर करते हैं. वहीं अन्य बड़े देश जो ईरान से स्टील मंगवा रहे थे वे अब तेल की ही तर्ज पर इस आयात को भी बंद कर देंगे.

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